बिहार में गंगा नदी पर बना विक्रमशिला सेतु, भागलुर और नवगछिया को जोड़ता है। बिहार के सीमांचल और कोसी क्षेत्र के बीच यह पुल एक महत्वपूर्ण कड़ी है। रविवार रात यह पुल अचानक बीच में से टूट गया। जी हां, पुल का एक हिस्सा पूरी तरह से ध्वस्त होकर गिर गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। इसके बाद प्रशासन ने यातायात को दोनों ओर से डायवर्ट कर दिया।
विक्रमशिला पुल एक तरफ से भागलपुर, बांका और झारखंड व दूसरी ओर नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया, सहरसा और मधेपुरा को जोड़ता है। इस क्षेत्र में इस पुल को लाइफलाइन माना जाता है। इस पुल का उद्घाटन साल 2001 में राबड़ी देवी के कार्यकाल में हुआ था।
भागलपुर के जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने बताया कि पुल दो चरणों में ध्वस्त हुआ। पहला हिस्सा रविवार रात 11:55 बजे के आसपास पुल संख्या 133 पर हुआ जबकि आधी रात बाद 1:07 बजे एक पूरा स्पैन गिर गया जिससे 4.7 किलोमीटर लंबा पुल दो हिस्सों में बंट गया।
उन्होंने कहा, ”पहले से अलर्ट जारी होने के कारण कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। भागलपुर की ओर का यातायात मुंगेर की तरफ मोड़ दिया गया है, जबकि दूसरी ओर का ट्रैफिक खगड़िया की ओर डायवर्ट किया गया है।”
उन्होंने बताया कि भागलपुर के एसएसपी प्रमोद कुमार यादव और नवगछिया के एसपी राजेश कुमार घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे और यातायात व्यवस्था संभाली।
अधिकारियों के अनुसार, राज्य मुख्यालय को घटना की सूचना दे दी गई है और एक उच्चस्तरीय तकनीकी टीम जल्द ही जांच के लिए पहुंचेगी तथा मरम्मत के सुझाव देगी। पुल के सभी पिलर और स्पैन की सुरक्षा जांच भी की जाएगी।
इसी साल मार्च में भी विक्रमशिला सेतु के कुछ हिस्सों के टूटने की खबरें सामने आई थीं जिसके बाद जिला प्रशासन ने इसकी संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर आश्वासन दिया था।
विक्रमशिला सेतु के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी बिहार सड़क निर्माण विभाग (एनएच विंग) और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (BRPNNL) के पास है।
इस हादसे ने बुनियादी ढांचे की उपेक्षा और समय पर रखरखाव की कमी को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। जांच शुरू होने के साथ ही यह घटना पिछले दो वर्षों में डेढ़ दर्जन से ज्यादा पुलों के आंशिक या पूर्ण रूप से गिरने की याद दिलाती है।
