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Jehanabad, Bhabua By-Election Results 2018: भभुआ में पहली बार 2015 में खिला था कमल, जहानाबाद में जदयू 2010 तो राजद 2015 का इतिहास चाहती है दोहराना

Bihar Bhabua, Jehanabad ByPoll Election UP Chunav Result 2018 (बिहार भभुआ, जहानाबाद विधानसभा उपचुनाव नतीजे 2018): जहानाबाद में कुल 12 उम्मीदवार जबकि भभुआ में कुल 17 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। रविवार को यहां 50.06 और 54.03 फीसदी वोट पड़े थे।

महागठबंधन से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने पहली बार चुनाव का सामना किया। ऐसे में उपचुनाव के परिणाम उनके लिए बेहद महत्‍वपूर्ण हैं। (फाइल फोटो)

Bhabua, Jehanabad By-Election Result 2018: बिहार में अररिया संसदीय सीट के अलावा जहानाबाद और भभुआ विधानसभा सीट पर भी रविवार (11 मार्च) को उप चुनाव हुए हैं। इनके भी नतीजे बुधवार (14 मार्च) को आएंगे। बता दें कि जहानाबाद से राजद विधायक मुंद्रिका सिंह यादव के निधन के बाद ये सीट खाली हुई है, जबकि भभुआ सीट भी बीजेपी विधायक आनंद भूषण पांडेय के निधन से खाली हुई थी। जहानाबाद में जहां राजद ने दिवंगत विधायक के बेटे सुदय यादव को मैदान में उतार कर सहानुभूति की लहर के सहारे जीत हासिल करने की कोशिश की है, वहीं बीजेपी ने भी दिवंगत विधायक की विधवा रिंकी रानी पांडेय को खड़ाकर सहानुभूति का वोट हासिल करने की कोशिश की है।

जहानाबाद में राजद के खिलाफ एनडीए की तरफ से जदयू ने साल 2010 में जीते पूर्व विधायक अभिराम शर्मा को खड़ा किया है वहीं भभुआ में महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस ने शंभू सिंह पटेल को खड़ा किया है। जहानाबाद में जदयू की नजर भूमिहार वोटरों पर टिकी थी, जबकि भभुआ में कांग्रेस ने दलित-पिछड़े वोट पर कब्जा जमाने की कोशिश की है। भभुआ में सबसे पहले 2015 में आनंद भूषण पांडेय ने ही जीतकर कमल खिलाया था। 2015 के विधानसभा चुनाव में जहानाबाद में राजद के मुंद्रिका सिंह यादव ने एनडीए की तरफ से राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के उम्मीदवार को हराया था, जबकि भभुआ में आनंद भूषण पांडेय ने जदयू के प्रमोद कुमार सिंह को हराया था।

बता दें कि जहानाबाद में कुल 12 उम्मीदवार, जबकि भभुआ में कुल 17 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। रविवार को यहां 50.06 और 54.03 फीसदी वोट पड़े थे। राजद के सुदय यादव पिता की साफ-सुथरी छवि और सहानुभूति के सहारे बिहार विधानसभा जाने की कोशिशों में हैं। बिहार में महागठबंधन में टूट और नीतीश के एनडीए में शामिल होने के बाद पहला चुनाव है। इस चुनाव के सियासी मायने आगे की रणनीति तय करेगी। यह चुनाव सभी दलों के लिए खास है।

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