बीजेपी को बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा। बांकीपुर के नतीजों के बाद बीजेपी में एक वर्ग का मानना है कि यूपी चुनाव के नजदीक आने तक पार्टी पर ऊंची जातियों या सवर्ण समुदाय का दबाव बढ़ सकता है।

यूपी में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं। यहां बीजेपी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों को लेकर विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा है। राजस्थान के जयपुर में भी 3 अगस्त को राजपूत करणी सेना ने यूजीसी नियमों के खिलाफ एक बड़ी रैली आयोजित की। इस दौरान पुलिस ने राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ताओं को बीजेपी दफ्तर की ओर बढ़ने से रोक दिया।

जंतर-मंतर पर हुआ छात्रों का आंंदोलन

इसी बीच, बीते दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। बीजेपी के एक नेता कहते हैं कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन की शुरुआत अंबेडकरवादियों से हुई फिर वामपंथी भी इसमें आए लेकिन ऊंची जातियों की बड़ी भागीदारी और सहानुभूति की वजह से यह आंदोलन बड़ा हो गया।

बांकीपुर के नतीजों के बाद बीजेपी ने माना है कि यूजीसी नियमों को लेकर ऊंची जातियों के बीच नाराजगी इस सीट पर हार की प्रमुख वजह रही है। इस तरह की चिंता पार्टी को उत्तर प्रदेश को लेकर भी है।

सवर्ण समुदाय ने किया विरोध

यूजीसी नियमों का सवर्ण समुदाय के छात्रों ने विरोध किया और इन्हें वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि इन नियमों की वजह से जाति को लेकर बंटवारा और बढ़ेगा और सामान्य वर्ग के छात्रों का उत्पीड़न होगा। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया और अदालत ने यूजीसी के नियमों पर रोक लगा दी।

उत्तर प्रदेश में बीजेपी से जुड़े ब्राह्मण और ठाकुर समुदाय के कई नेताओं का कहना है कि यूजीसी नियमों को लेकर सवर्ण समुदाय में नाराजगी है।

सुल्तानपुर जिले में बीजेपी से जुड़े ब्राह्मण समुदाय के एक बीजेपी नेता ने सवर्ण समुदाय की नाराजगी को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “वे आम तौर पर यूजीसी के नए नियमों की जरूरत पर सवाल उठाते हैं। उनका तर्क है कि ऊंची जातियों ने मुश्किल दौर में और राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान बीजेपी का साथ दिया, जब ओबीसी और दलित पार्टी के पीछे एकजुट नहीं हुए थे। वे बूथों पर बीजेपी के लिए लड़े। वे सवाल करते हैं कि फिर बीजेपी ने ऐसा फैसला क्यों लिया जिससे उन्हें नुकसान होगा।”

ब्राह्मण समुदाय का वोट मिलने का भरोसा

प्रतापगढ़ जिले के एक ब्राह्मण नेता कहते हैं कि उन्हें इस बात का भरोसा है कि नाराजगी के बावजूद भी ब्राह्मण समुदाय पार्टी को ही वोट देगा। उन्होंने कहा, “ब्राह्मणों के एक वर्ग का कहना है कि अगर उन्होंने बीजेपी के खिलाफ जाने का फैसला किया तो वे बहुजन समाज पार्टी को वोट दे सकते हैं लेकिन उनके समाजवादी पार्टी के साथ जाने की संभावना कम है क्योंकि वे सपा के यादव मतदाताओं के साथ बेहतर महसूस नहीं करते।”

अयोध्या में सवर्ण समुदाय के एक नेता ने कहा, “पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के दबाव में इस्तीफा देने के बजाय अगर धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी नियमों के मुद्दे पर इस्तीफा दिया होता तो ज्यादा अच्छा होता। इससे सामान्य जातियों के बीच सकारात्मक संदेश जाता लेकिन तब बीजेपी के नेता चुप बैठे रहे।”

बीजेपी के खिलाफ वोट देने की धमकी

इसी तरह, लखीमपुर खीरी के सवर्ण समुदाय के एक नेता ने कहा कि यह गुस्सा राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार से ज्यादा केंद्र के खिलाफ है क्योंकि यूजीसी का मामला केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है। उन्होंने कहा, “जिस तरह ठाकुरों ने 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ वोट दिया थ और बांकीपुर उपचुनाव में ब्राह्मणों ने, इसी तरह ऊंची जातियां 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव में बीजेपी के खिलाफ वोट देने की धमकी दे रही हैं।”

सवर्ण नेता ने कहा कि केंद्र को इसका समाधान निकालना होगा क्योंकि अगर उसे 2029 में फिर से केंद्र की सत्ता में आना है तो वह उत्तर प्रदेश को हाथ से जाने का जोखिम नहीं उठा सकती।

वाराणसी में ठाकुर समुदाय के एक नेता ने कहा कि यूजीसी के नियमों और पेपर लीक के मुद्दे पर हर घर में चर्चा हो रही है क्योंकि हर परिवार में कम से कम एक छात्र जरूर है और लोग अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

वह बताते हैं कि एक बार बहस के दौरान सवर्ण समुदाय के एक शख्स ने कहा कि कांग्रेस सरकार इस मामले में बेहतर थी क्योंकि उसने ऐसा कोई भी कानून नहीं बनाया जिससे समाज में बंटवारा होता हो।

नितिन नवीन ने दिया भरोसा

पिछले महीने बीजेपी के नेताओं की इस मामले में बंद कमरों के अंदर कई बैठकें हुई। इन बैठकों में बीजेपी के अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी के सहयोगियों से कहा कि वे घबराएं नहीं और इस तरह के मामलों को जाति के चश्मे से नहीं देखना चाहिए। ऐसी ही एक बैठक में मौजूद रहे पार्टी के नेता के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन्हें भरोसा दिलाया कि यूजीसी नियमों के पीछे गलत मंशा नहीं थी और सरकार इस मामले में सुधार करेगी।

ऐसी ही एक बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने यूपी बीजेपी के नेताओं से इस मामले में सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बारे में लोगों को बताने को कहा।

2024 के लोकसभा चुनाव में ठाकुर समुदाय के नेताओं को टिकट न मिलने की वजह से नाराजगी दिखाई दी थी और माना गया कि बीजेपी को जो 29 सीटों का नुकसान हुआ है, उसकी एक बड़ी वजह यही है। ठाकुर समुदाय में इस असंतोष की वजह से बीजेपी को मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और कैराना की सीटों पर हार का सामना करना पड़ा जबकि मेरठ और मथुरा में पार्टी की जीत का अंतर गिर गया। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी इसका असर हुआ।

राजस्थान में राजपूत करणी सेना के जरिए सवर्ण समुदाय के लोग यूजीसी के नियमों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

राजपूत करणी सेना के प्रवक्ता ने क्या कहा?

राजपूत करणी सेना के प्रवक्ता विजेंद्र सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अब वे हरियाणा में भी इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे। उन्होंने कहा, “सवर्ण जातियां भाजपा का सबसे मजबूत वोट बैंक रही हैं लेकिन पार्टी का फोकस अन्य वर्गों में विस्तार करने पर है। इसलिए, केंद्र सरकार हमें हल्के में ले रही है और ओबीसी, एससी और एसटी के मुताबिक अपनी नीतियां बना रही है।”

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यूजीसी के नए नियमों के मामले में देश भर में कई जगहों पर प्रदर्शन हो चुके हैं। सवर्ण मोर्चा ने लखनऊ में प्रदर्शन किया। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।