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भाजपा के फ्रेम में फिट नहीं हुए बड़े कांग्रेसी चेहरे

इन चेहरों में भाजपा के पास सबसे बड़ा नाम कृष्णा तीरथ थी। वे चौदहवीं लोकसभा में कांग्रेस से बतौर सांसद कार्यभार संभाल चुकी हैं। इनके पास केंद्रीय मंत्रिमंडल में महिला एंव बाल विकास का भी प्रभार था।

Author Published on: January 16, 2020 5:02 AM
अरविंदर सिंह लवली

पंकज रोहिला

कांग्रेस के बड़े चेहरों को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जोड़ने की बड़ी पहल के बाद भाजपा इन नेताओं को संभाल नहीं पाई है। दिल्ली भाजपा में संघ के दबदबे और पुराने चेहरों की दौड़ भाग के बीच ये चेहरे एक साल में पार्टी में अपनी जगह नहीं बना पाए। इन चेहरों में पूर्व सांसद कृष्णा तीरथ, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली और दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री राजकुमार चौहान का नाम शामिल है। हालांकि अब पार्टी के वरिष्ठ नेता इनकी वापसी को इनका अपना फैसला बताकर बचते नजर आ रहे हैं।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव में इन बड़े नेताओं को केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बाद दिल्ली भाजपा में शामिल किया गया था। भाजपा की मजबूती संघ से है और इसका सीधा असर दिल्ली भाजपा में साफ नजर आता है। यही वजह है कि दूसरे दलों से आए नेता खुद को यहां पर सही किरदार में नहीं पा पाए, जो उसकी वापसी का अहम कारण था। इन नेताओं के शामिल होने से पार्टी ने अनुसूचित जाति, पंजाबी और सिख सीटों पर असर होने की संभावना जताई थी। चुनाव से पहले शुरू हुआ यह उलटफेर भाजपा के लिए नई परेशानियां खड़ी कर सकता है।

इन चेहरों में भाजपा के पास सबसे बड़ा नाम कृष्णा तीरथ थी। वे चौदहवीं लोकसभा में कांग्रेस से बतौर सांसद कार्यभार संभाल चुकी हैं। इनके पास केंद्रीय मंत्रिमंडल में महिला एंव बाल विकास का भी प्रभार था। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी वर्तमान में अनुसूचित जाति की सीटों पर एक बेहतर चेहरे के संकट से जूझ रही है। इस स्थिति में यह चेहरा विधानसभा में पार्टी को मजबूती देगा लेकिन पहले ही पार्टी से इन्होंने विदाई ले ली। हाल ही में दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री राजकुमार चौहान भी इसी रणनीति के तहत लाए गए थे।

बीते माह में उन्होंने सक्रियतौर पर भाजपा में काम भी किया और संभावना जताई जा रही थी कि पार्टी इन्हें मंगोलपुरी सीट से मैदान में उतार सकती है। राजकुमार चौहान भी पार्टी को छोड़कर चले गए। ऐसी ही स्थिति में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व दिल्ली सरकार के मंत्री अरविंदर सिंह लवली भी रहे। अंत में उन्होंने भाजपा को छोड़कर वापस कांगे्रस में जाना ही बेहतर समझा। इस पूरे प्रकरण को दिल्ली भाजपा के लिए एक नुकसान से जोड़कर देखा जा रहा है और माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से आने वाले इन चेहरों को रोककर रखना प्रदेश की जिम्मेदारी थी। हालांकि इस बार भाजपा ने राजकुमार चौहान को अपने चुनाव घोषणापत्र समिति में भी जगह दी थी। इसके अतिरिक्त कांग्रेस के पूर्व विधायक अमरीश गौतम समेत आम आदमी पार्टी के कई विधायक भी भाजपा में शामिल हुए थे।

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