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जब गांधी जी से बोले थे डॉ. बिधान चंद्र रॉय- वो 40 करोड़ लोगों की उम्मीद, उनका जीवन देश के लिए जरूरी

डॉ. बिधानचंद्र राय एक महान चिकित्सक थे। प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस मनाया जाता है। यह दिवस महान डॉक्टर/चिकित्सक डॉक्टर बिधानचंद्र राय की स्मृति में सम्मान में मनाया जाता है। अजब संयोग है कि 1 जुलाई डॉक्टर विधान चंद्र राय की जन्मतिथि भी है और पुण्यतिथि भी है।

जब गांधी जी से बोले थे डॉ. बिधान चंद्र रॉय- वो 40 करोड़ लोगों की उम्मीद, उनका जीवन देश के लिए जरूरी (फोटोः ट्विटर@PrasannaDange1)

एक वाकया है। 1933 में महात्‍मा गांधी को आगा खान पैलेस में कैद करके रखा गया था। वो लगातार अनशन कर रहे थे। इसी बीच उन्‍हें उनकी तबीयत बिगड़ गई। गांधीजी स्वदेशी के अलावा कोई दवा नहीं लेना चाहते थे। उन्‍होंने बिधान चंद्र राय से कहा- मैं आपकी दवा क्‍यों लूं। क्‍या आप मेरे 40 करोड़ देशवासियों का मुफ्त में इलाज करते हैं?

बिधान बाबू मुस्कुराए और बोले-वो यहां मोहनदास करमचंद गांधी को ठीक करने नहीं, बल्कि उस इंसान को ठीक करने आए हैं जो 40 करोड़ लोगों का अगुवा है। वो बोले कि मुझे लगता है कि अगर वो मर गया तो 40 करोड़ लोग मर जाएंगे और अगर वो जीता है जो 40 करोड़ लोग जिएंगे। उनकी बात ने गांधी जी को लाजवाब कर दिया। उन्होंने कहा- ठीक है, आप जीते। जो दवा आपको ठीक लगे, दे दीजिए, मैं ले लूंगा। लेकिन मैं सोचता हूं कि आपने मेडिसिन के बजाय लॉ क्‍यों नहीं पढ़ा। आपमें बारीकियां पकड़ने का जबर्दस्‍त हुनर है। डॉ रॉय ने जवाब दिया कि ईश्‍वर ने उन्हें डॉक्‍टर बनाया क्‍योंकि उसे पता था कि एक दिन वो बापू का इलाज करेंगे।

डॉ. बिधानचंद्र राय एक महान चिकित्सक थे, जिन्होंने अपने जीवन में कई लाख मरीजों का इलाज किया और उनकी जान बचाई उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में रहकर पूरा जीवन देश की सेवा में लगा दिया। प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस मनाया जाता है। यह दिवस महान डॉक्टर/चिकित्सक डॉक्टर बिधानचंद्र राय की स्मृति में सम्मान में मनाया जाता है। अजब संयोग है कि 1 जुलाई डॉक्टर विधान चंद्र राय की जन्मतिथि भी है और पुण्यतिथि भी है।

वो गांधी जी के निजी चिकित्सक भी रहे। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी रहे। दूरदर्शी राजनेता और मुख्यमंत्री भी रहे और कभी विवाह नहीं किया। वो डॉक्टरी के जादूगर थे। मरीजों को महज देखकर उनका मर्ज बता देते थे। उन्होंने अपना सारा जीवन बीमार लोगों के इलाज में समर्पित कर दिया और जब राजनीति में कदम रखा तो वहां भी बतौर प्रशासक स्वास्थ्य संबंधी आधारभूत संरचना को बेहतर करने के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए।

मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने बंगाल में स्वास्थ्य संबंधी आधारभूत संरचना को तेजी से उन्नत किया। जादवपुर टीबी हास्पिटल, चित्तरंजन सेवा सदन, कमला नेहरु मेमोरियल हॉस्पिटल विक्टोरिया इंस्टीट्यूशन (कॉलेज) और चित्तरंजन कैंसर हॉस्पिटल उन्हीं की देन हैं। वे पहले ऐसे डॉक्टर थे, जिन्होंने लंदन में एमआरसीपी और एफआरसीएस दोनों एक साथ किया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की स्थापना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।’

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