केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के दफ्तर में एक साथ चार अहम सहयोगियों को हटाए जाने के मामले ने सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मामले को “बेहद चौंकाने वाला” बताते हुए कहा कि मोदी सरकार में इस तरह की नियुक्तियां कैसे होती हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर बिना किसी स्पष्ट वजह के मंत्री कार्यालय में इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों की गई। तंज कसते हुए उन्होंने पूछा कि क्या यह “प्रधानमंत्री चंदा दो, धंधा लो” योजना के बिगड़ने का मामला है?
अभिषेक मनु सिंहवी ने कहा- यह सामान्य फैसला नहीं है
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने भी एक्स पर सरकार को घेरते हुए कहा कि अगर किसी केंद्रीय मंत्री के पूरे दफ्तर में एक रात में “क्लीन स्वीप” जैसी कार्रवाई होती है, तो इसे सामान्य प्रशासनिक फैसला नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि आखिर ऐसा क्या हुआ, क्या सामने आया और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
दरअसल, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के कार्यालय में एक साथ चार प्रमुख सहयोगियों को हटाया गया है। सबसे पहले मंत्री के प्राइवेट सेक्रेटरी और एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी के तबादले की जानकारी सामने आई। इसके बाद एक अन्य एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी की नियुक्ति समाप्त किए जाने की खबर आई। अब मंत्री के असिस्टेंट प्राइवेट सेक्रेटरी सिद्धार्थ यादव की नियुक्ति भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।
3 जुलाई 2026 को जारी आदेश में कहा गया है कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के आदेश और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद सिद्धार्थ यादव की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती है। आदेश में उन्हें तत्काल सभी दायित्वों से मुक्त करने की बात कही गई है। इस आदेश पर पर्यावरण मंत्रालय की अंडर सेक्रेटरी विभूति पंजियार के हस्ताक्षर हैं। इसकी प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग तथा पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई हैं।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक सिद्धार्थ यादव, भूपेंद्र यादव के सबसे पुराने और भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल थे। दोनों का संबंध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शुरुआती दिनों से बताया जाता है। सूत्रों का कहना है कि सिद्धार्थ यादव केवल मंत्री का प्रशासनिक कामकाज ही नहीं संभालते थे, बल्कि मंत्री कार्यालय में आने वाले महत्वपूर्ण पत्राचार और संदेशों की निगरानी भी करते थे। वे कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ नियमित संपर्क में रहते थे।
जानकारी के अनुसार, सिद्धार्थ यादव की नियुक्ति एक राजनीतिक व्यक्ति के रूप में मंत्री के निजी स्टाफ में की गई थी। उनकी नियुक्ति 11 जून 2024 से प्रभावी थी और यह “को-टर्मिनस” आधार पर थी, यानी मंत्री के कार्यकाल या अगले आदेश तक।
अब तक पर्यावरण मंत्रालय ने सिद्धार्थ यादव सहित अन्य तीन अधिकारियों को हटाने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है। प्राइवेट सेक्रेटरी अमर सिंह को प्रशासनिक आधार पर हटाया गया, जबकि एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी शैलेश कुमार सिंह को समय से पहले उनके मूल विभाग भेज दिया गया। वहीं एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी आयुष सारण की नियुक्ति भी समाप्त कर दी गई। इन फैसलों के पीछे सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।
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पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के तीन प्रमुख सहयोगियों को एक साथ हटा दिया है। मंत्री के निजी सचिव (प्राइवेट सेक्रेटरी) का तबादला ‘प्रशासनिक आधार’ पर किया गया है। वहीं, एक अतिरिक्त निजी सचिव (एडिशनल प्राइवेट सेक्रेटरी) को उनके मूल विभाग में समय से पहले वापस भेज दिया गया है जबकि दूसरे अतिरिक्त निजी सचिव की नियुक्ति समाप्त कर दी गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
