Great Nicobar Project: ग्रेट निकोबार परियोजना के मुद्दे पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाए थे, जिसका अब केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आक्रामक जवाब दिया है। उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ग्रेट निकोबार द्वीप समूह (जीएनआई) परियोजना को दी गई वैधानिक पर्यावरण मंजूरी सभी आधारभूत आंकड़ों पर आधारित अध्ययनों पर आधारित थी।

दरअसल, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने 10 मई को पत्र लिखा था, और निकोबार परियोजना पर सवाल खड़े किए थे। उनको दिए लिखित जवाब में भूपेंद्र यादव ने कहा कि पर्यावरण प्रभाव आकलन और जैव विविधता प्रभावों पर उठाई गई चिंताओं की वैधानिक मूल्यांकन और उसके बाद न्यायिक रूप से अनिवार्य समीक्षा प्रक्रिया के दौरान पहले ही विस्तार से जांच की जा चुकी है।

नियमों के तहत मिली मंजूरी

भूपेंद्र यादव ने कहा कि परियोजना का पर्यावरणीय मूल्यांकन पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006, द्वीप तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचना (आईसीआरजेड), 2019 और अन्य लागू प्रावधानों के अनुसार ‘व्यापक और बहुस्तरीय तरीके से’ किया गया था।

जानकारी के मुताबिक, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर बता दें कि यह 166 वर्ग किलोमीटर में फैली होगी और इसमें एक ट्रांसशिपमेंट कंटेनर पोर्ट, एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य-नागरिक उपयोग वाला हवाई अड्डा, बिजली अवसंरचना और एक हरित तटीय शहर शामिल होगा। इसके लिए पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील द्वीपों पर स्थित 13,000 हेक्टेयर प्राचीन वन क्षेत्र की कटाई की आवश्यकता होगी।

जयराम रमेश ने क्या कहा था?

जयराम रमेश ने परियोजना के मूल्यांकन के दौरान विचार किए गए अध्ययनों को पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) प्रक्रिया का उपहास और विज्ञान का अपमान बताया। उन्होंने 1 मई को पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी विस्तृत प्रश्नोत्तर और बयान का जवाब देते हुए यह बात कही।

उन्होंने सरकार से राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) द्वारा गठित उच्चाधिकार समिति (एचपीसी) की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का भी आग्रह किया, जिसे परियोजना की पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियों की समीक्षा करने का कार्य सौंपा गया था।

अपने जवाब में भूपेंद्र यादव ने परियोजना मूल्यांकन प्रक्रिया का बचाव किया और जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जेडएसआई), बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (बीएसआई), सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (एसएकॉन) और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा किए गए विस्तृत पर्यावरणीय अध्ययनों, तटरेखा आकलन, समुद्री जांच और मॉडलिंग अभ्यासों का हवाला दिया।

‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं’, अरावली मुद्दे पर बोले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। इस फैसले में अरावली पर्वतमाला की एक जैसी परिभाषा को मानने वाले पहले के आदेश पर रोक लगाई गई है। मंत्री ने कहा कि सरकार अरावली के संरक्षण और उसे फिर से बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पढ़िए पूरी खबर…