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BHU में नीता अंबानी को विजिटिंग प्रोफेसर बनाने के प्रस्ताव का विरोध, कुलपति के घर के बाहर प्रदर्शन

नीता अंबानी को बीएचयू का विजिटिंग प्रोफेसर नियुक्ति किए जाने का छात्रों ने विरोध किया है। मंगलवार को परिसर में कुलपति राकेश भटनागर के आवास के बाहर 40 से अधिक छात्रों के एक समूह ने विरोध प्रदर्शन किया और एक ज्ञापन सौंपा।

लखनऊ | Updated: March 17, 2021 8:47 AM
नीता अंबानी को विजिटिंग प्रोफेसर बनाने का बीएचयू के छात्रों ने विरोध किया है। (express file photo)

अरबपति उद्योगपति मुकेश अंबानी की पत्नी नीता अंबानी को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का विजिटिंग प्रोफेसर नियुक्ति किए जाने का छात्रों ने विरोध किया है। छात्र कुलपति आवास का घेराव कर मंगलवार को धरने पर बैठ गए। छात्रों का आरोप है कि इससे विश्वविद्यालय द्वारा “गलत उदाहरण” सैट किया जा रहा है। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय के लोग सरकार के इशारे पर पूंजीपतियों के हाथ में इस विश्वविद्यालय को सौंपने की षड्यंत्र कर रहे हैं।

मंगलवार को परिसर में कुलपति राकेश भटनागर के आवास के बाहर 40 से अधिक छात्रों के एक समूह ने विरोध प्रदर्शन किया और एक ज्ञापन सौंपा। हाल ही में, विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान फैकल्टी ने रिलायंस फाउंडेशन को एक प्रस्ताव भेजा था, जिसमें नीता अंबानी को उनके महिला अध्ययन केंद्र में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में शामिल होने के लिए कहा गया था। सामाजिक विज्ञान फैकल्टी के महिला अध्ययन केंद्र को तक़रीबन दो दशक पहले स्थापित किया गया था और यहां पर विज़िटिंग प्रोफ़ेसर के तीन पद हैं।

अभी प्रस्ताव केवल नीता अंबानी को भेजा गया है, अधिकारियों ने पुष्टि की कि बाकी दो विजिटिंग फैकल्टी पदों के लिए जिन अन्य नामों पर विचार किया गया है, वे अरबपति उद्योगपति गौतम अडानी की पत्नी प्रीति अदानी और स्टील टाइकून लक्ष्मी मित्तल की पत्नी उषा मित्तल हैं।

सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन कौशल किशोर मिश्रा ने कहा “हम स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण से संबंधित शैक्षणिक और शोध कार्य करते हैं। परोपकारी उद्योगपतियों को शामिल करने की बीएचयू की परंपरा को ध्यान में रखते हुए हमने रिलायंस फाउंडेशन को एक पत्र भेजा जिसमें नीता अंबानी को महिला अध्ययन केंद्र में एक विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में शामिल होने के लिए कहा गया ताकि हम उनके अनुभव से लाभ उठा सकें।”

मिश्रा ने कहा कि हमने ऐसा इसलिए किया क्योंकि रिलायंस फाउंडेशन ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में बहुत काम किया है। प्रदर्शनकारी छात्रों में शामिल रिसर्च स्कॉलर शुभम तिवारी ने आरोप लगाया कि यह फैसला ”एक साजिश के तहत” लिया गया है।

तिवारी ने कहा “हम एक गलत उदाहरण स्थापित कर रहे हैं। एक अमीर व्यक्ति की पत्नी बनना कोई उपलब्धि नहीं है और ये लोग हमारे प्रतीक नहीं हो सकते। अगर आप महिला सशक्तीकरण की बात करें तो अरुणिमा सिन्हा, बछेंद्री पाल, मैरी कॉम या किरण बेदी जैसे लोगों को आमंत्रित कीजिये।”

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