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भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर की हालत नाजुक, एयर एंबुलेंस से मुंबई रेफर किया गया

सांसद के स्टाफ ने बताया कि शनिवार सुबह से उनकी तबियत खराब थी। हालांकि दोपहर में जब ज्यादा परेशानी हुई तो भोपाल के चिकित्सकों से सलाह ली गई। डॉक्टरों ने चेकअप के बाद उन्हें रेफर करने का मशविरा दिया।

pragya thakurभोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा को एयर एंबुलेंस से मुंबई ले जाते चिकित्सक (फोटो सोर्सः एजेंसी)

बीजेपी की सांसद सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सांस लेने में परेशानी होने के बाद एयर एंबुलेंस से मुंबई ले जाया गया है। उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। सांसद के ऑफिस की तरफ से बताया गया कि उन्हें वहां मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में दाखिल कराया जाएगा। प्रज्ञा भोपाल की सांसद हैं।

सांसद के स्टाफ ने बताया कि शनिवार सुबह से उनकी तबियत खराब थी। हालांकि दोपहर में जब ज्यादा परेशानी हुई तो भोपाल के चिकित्सकों से सलाह ली गई। डॉक्टरों ने चेकअप के बाद उन्हें रेफर करने का मशविरा दिया। उसके बाद एयर एंबुलेंस के जरिए उन्हें मुंबई ले जाया गया। सांसद के करीबी लोगों का कहना है कि इस तरह की समस्या उन्हें पहले कभी नहीं हुई थी। डॉक्टर उनकी मेडिकल हिस्ट्री की भी जांच कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार सांसद को इससे पहले फरवरी में भी तबियत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया था। तब चिकित्सकों ने उन्हें ज्यादा भागदौड़ न करने की सलाह दी थी, लेकिन वह पिछले कुछ दिनों से लगातार बैठकें कर रहीं थीं। आज दोपहर तीन बजे होने वाली दिशा समिति की जिला पंचायत कार्यालय में रखी गई बैठक भी उन्हें शामिल होना था पर उससे पहले ही उनकी हालत बिगड़ गई।

प्रज्ञा सिंह को पिछले साल दिसंबर में दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। तब भी उन्होंने सांस लेने की समस्या, छाती में दर्द और उच्च रक्तचाप की शिकायत की थी। हालांकि तब उन्होंने खुद के कोरोना संक्रमित होने का अंदेशा भी जताया था। लेकिन जांच में वह कोरोना नेगेटिव पाई गईं। एम्स में उनके स्वास्थ्य की निगरानी करने वाली टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सांसद को अस्थमा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कई अन्य बीमारियां हैं।

प्रज्ञा भोपाल से 2019 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सांसद बनीं थीं। चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को हराया था। इससे पहले मालेगांव ब्लास्ट मामले में उन्हें एनआईए की हिरासत में भी रहना पड़ा था। इस मामले में मोदी सरकार बनने के बाद प्रज्ञा को राहत मिली थी। उसके बाद ही वह जेल से बाहर निकल सकी थीं। प्रज्ञा उस समय सुर्खियों में रहीं जब उन्होंने गोडसे को लेकर विवादास्पद बयान दिया। खुद पीएम मोदी ने उनके उस बयान की आलोचना करते हुए कहा था कि वह प्रज्ञा को दिल से माफ नहीं कर पाएंगे।

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