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भोपाल: सिमी सदस्यों द्वारा जेल तोड़ने के दौरान, VIP ड्यूटी पर थे जेल की सुरक्षा में लगाए गए 80 जवान

भोपाल की सेंट्रल जेल जहां से सिमी के आठ सदस्य भागने में कामयाब हो गए थे वहां से लगभग 80 सुरक्षाकर्मी गायब थे।
भोपाल की सेंट्रल जेल

भोपाल की सेंट्रल जेल जहां से सिमी के आठ सदस्य भागने में कामयाब हो गए थे वहां से लगभग 80 सुरक्षाकर्मी गायब थे। जेल की ड्यूटी ने नाम पर उन गार्ड्स को कहीं और पोस्ट किया गया था। जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का घर और ऑफिसर, जेल मंत्री कुसुम मेहेंडे, पूर्व जेल मंत्रियों और जेल अधिकारियों के घर और जेल का हेडक्वॉटर शामिल था। ऐसे में राज्य की सबसे बड़ी जेलों में से एक में 3,300 कैदियों पर निगरानी रखने के लिए कुल 139 गार्ड्स थे। इस मुद्दे पर जब जेल मंत्री कुसुम से सवाल पूछा गया तो उन्होंनें मीडिया पर बात को बढ़ाने-चढ़ाने का आरोप लगाया। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, उन्होंने कहा, ‘मेरे पास एक ड्राइवर है और ऑफिस में दो लोग। मुझे बाकी कुछ नहीं पता। फिर भी मैं जांच करूंगी।’ मध्य प्रदेश की सेंट्रल जेल में कुल 250 गार्ड्स की जगह है। इसमें से 139 ड्यूडी पर हैं। 70 ट्रेनिंग पर हैं और बाकी 31 स्थान फिलहाल खाली हैं।

वीडियो: भोपाल एनकाउंटर: सामने आए नए ऑडियो क्लिप में कहा गया- “घेर के कर दो काम तमाम”

गौरतलब है कि सोमवार (31 अक्टूबर) को आठ अंडरट्रायल कैदी भोपाल की सेंट्रल जेल से एक सुरक्षागार्ड की हत्या करके भाग गए थे। आरोप था कि उन लोगों ने जीभ साफ करने वाले से गेट की चाबी बनाई थी। पुलिस ने कहा था कि स्टील की प्लेट को पैना करके उन लोगों ने गार्ड की हत्या की थी और फिर बेडशीट की मदद से 30 फिट की दीवार कूदकर भाग गए थे। उन सभी लोगों पर मर्डर, देशद्रोह और दंगे करवाने के आरोप थे। विपक्षी पार्टियों द्वारा एनकाउंटर पर सवाल उठाए गए थे। विपक्ष ने इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की भी मांग की थी। यह जांच घटनास्थल की तीन वीडियो सामने आने के बाद उनको बेस बनाकर हो सकती है।

हालांकि, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवपाल सिंह चौहान समेत पूरी सरकार का कहना है कि विपक्ष बिना किसी तथ्य के उनपर आरोप लगा रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने मामले की जांच एनआईए को भी सौंपने की बात कही है।

 

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  1. S
    sanjay
    Nov 4, 2016 at 8:21 am
    आतंकवादियो को मानवता के दुश्मन को पुलिस ने मार है,यह सत्य है इसको कोई भी राजनीतिक पार्टी या संस्था नकार नहीं सकती है!अब इसके हर पहलु की बाल की खाल निकालना ी नहीं होगा,यदि ऐसा होता है तो फिर आप आतंकवाद से नहीं लड़ पावोगे!पुलिस या सेना हमारी रक्षा के लिए खड़ी है,यदि पुलिस/सेना का जवान मरता है तो उसके लिए कितने लोग खड़े होते और जाँच की मांग करते है धरना देते है,लेकिन जब उनके हाथ से कोई अपराधी मरता है तो उसे पुरूस्कार की जगह जांच से गुजरना पड़ता है,इन्ही कारणों से अपराध में कमी नहीं आ रही है!
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