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‘भोपाल गैस पीड़ितों के जन्मजात विकृत बच्चों का इलाज कराए सरकार’

1984 में हुए भोपाल गैस हादसे की 31वीं बरसी के एक दिन पहले गैस पीड़ितों के इलाज के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन संभावना ट्रस्ट के अध्ययन..

Author भोपाल | Published on: December 3, 2015 12:13 AM
भोपाल गैस त्रासदी में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते लोग। (पीटीआई फोटो)

1984 में हुए भोपाल गैस हादसे की 31वीं बरसी के एक दिन पहले गैस पीड़ितों के इलाज के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन संभावना ट्रस्ट के अध्ययन में गैस पीड़ित या बंद पड़े यूनियन कार्बाइड कारखाने के आसपास के इलाकों के प्रदूषित भूजल से पीड़ित माता-पिता के जन्मजात विकृत 2500 बच्चों की पहचान करने का दावा करते हुए संगठन ने सरकार से ऐसे और बच्चों का पता लगाने और उनका समुचित इलाज कराने की मांग की है।

स्वयंसेवी संगठन संभावना के प्रबंध न्यासी सतीनाथ सारंगी ने बुधवार को कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को यूनियन कार्बाइड के जहर से पीड़ित माता-पिता के जन्मजात विकृत बच्चों की पहचान कर उनके इलाज की पूरी व्यवस्था करनी चाहिए। भोपाल गैस पीड़ितों और प्रदूषित भूजल प्रभावितों को मुफ्त इलाज देने वाली संभावना क्लीनिक ने हाल में बंद पडेÞ यूनियन कार्बाइड के कारखाने के आसपास रहने वाले 20 हजार से ज्यादा परिवारों के एक लाख से अधिक लोगों पर अध्ययन पूरा किया है।

सारंगी ने कहा कि पिछले तीन साल में क्लीनिक के अनुसंधानकर्मियों ने चिकित्सक से प्रमाणित टीबी, कैंसर, लकवा, महिलाओं का प्रजनन स्वास्थ्य और शिशुओं व बच्चों के शारीरिक, मानसिक व सामाजिक विकास की जानकारी इकट्ठा की है। संभावना के कर्मियों ने इस आबादी में 2500 से ज्यादा ऐसे बच्चों की पहचान की है जो जन्मजात विकृत हैं। जबकि देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 30 चिकित्सकों ने 1700 से अधिक बच्चों को जन्मजात विकृत बताया है।

संभावना ट्रस्ट के इस अध्ययन के क्षेत्रीय समन्वयक रितेश पाल के अनुसार अनुसंधान के आंकड़ों का विश्लेषण जारी है। प्राथमिक अवलोकन से यह तथ्य सामने आया है कि अपीड़ित आबादी के मुकाबले जहरीली गैस या प्रदूषित भूजल से प्रभावित आबादी में जन्मजात विकृतियों की दर कहीं ज्यादा है। पाल की सहयोगी आफरीन ने कहा कि वे सिर्फ बच्चों की विकृति के बारे में ही जानकारी नहीं जुटा रहे हैं बल्कि ऐसे बच्चों के इलाज में भी मदद कर रहे हैं। अब तक मंदबुद्धि, सेरेब्रल पॉल्सी, अंडकोष की विकृति, सिंडेक्टिली-पॉलिटेक्टिली (उंगलियों की विकृति) और अन्य जन्मजात विकृतियों वाले 164 बच्चों को इलाज के लिए सरकारी और गैर सरकारी चिकित्सा केंद्रों में भेजा जा चुका है। इनमें से 43 बच्चों का इलाज पूरा हो चुका है।

सारंगी ने बताया कि संभावना ट्रस्ट क्लीनिक में गैस पीड़ित व कारखाने के पास रहने वाले प्रदूषित भूजल पीड़ित 31 हजार से ज्यादा लोग पंजीकृत हैं। इस क्लीनिक की विशेषता है कि इसमें अंग्रेजी, आयुर्वेद व योग तीनों विधियों से इलाज किया जाता है। क्लीनिक को चलाने के लिए आर्थिक मदद भारत और ब्रिटेन में 15,000 से अधिक लोगों के दान से आता है। अंतरराष्ट्रीय लेखक डॉमिनिक लेपियर संभावना से संचालित स्त्री रोग क्लीनिक व अनौपचारिक विद्यालय के लिए पैसे जुटाते हैं।

द्वारका नगर की 42 साल की शांतिबाई ने बताया कि उसने भोपाल गैस त्रासदी में जहरीली गैस में सांस ली थी। संभावना के डाक्टरों के उसके 12 साल के लड़के अभिषेक को जन्मजात हृदय रोगी बताने के बाद भोपाल मेमोरियल अस्पताल में उसका सफल ऑपरेशन हो गया। न्यू आरिफ नगर की आयशा (40) ने अपने आठ साल के बेटे अमन का हमीदिया अस्पताल में अंडकोष की विकृति के लिए किए गए ऑपरेशन की सफलता पर खुशी जाहिर की। आयशा ने कहा कि जब वह 20 साल की थी और काजी कैंप इलाके में रहती थी तब हुई गैस त्रासदी की रात उसने जहरीली गैस सांस में ली थी। उसके बेटे का केवल एक अंडकोष था। दो साल पहले उसका ऑपरेशन किया गया। उसने बताया कि अमन पढ़ नहीं सका क्योंकि वह विद्यालय में बैठ तक नहीं सकता था।

भोपाल में 1984 में हुई गैस हादसे में जहरीली गैस से लगभग तीन हजार लोगों की मौत उसी दौरान हो गई थी। जबकि स्वतंत्र संगठन के एक अनुमान के मुताबिक इस हादसे के बाद पर्यावरण पर पड़े दुष्परिणामों के कारण कई साल तक कई हजार लोगों की इससे मौत होती रही।

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