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भोजपुरी को 8वीं अनुसूची में शामल कराने की मांग तेज

भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल करवाने का अभियान संसद के मौजूदा सत्र में तेज हो गया है। इस अभियान में लगे विश्व भोजपुरी सम्मेलन..

Author July 26, 2015 12:33 PM

भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल करवाने का अभियान संसद के मौजूदा सत्र में तेज हो गया है। इस अभियान में लगे विश्व भोजपुरी सम्मेलन के कार्यकारी अध्यक्ष और दिल्ली भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दुबे उन्हें 16वीं लोक सभा के अनेक सदस्यों से भरपूर आश्वासन मिल रहा है। खुद प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के बनारस से सांसद बनने के बाद 20 करोड़ भोजपुरी भाषी लोगों की उम्मीदें बढ़ गई है।

दुबे कहते हैं कि देश के अलावा विदेसों में बोली जाने वाली भोजपुरी के साथ-साथ राजस्थानी और फोटी भाषा को भी 22 भाषाओं की तरह संविधान की आठवी अनुसूची में स्थान मिलने का भरोसा बढ़ा है। भोजपुरी को तो मारिशस ने जून 2011 में ही सेवैधानिक मान्यता दे दी है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत देश -विदेश के करीब 20 करोड़ लोगों की मातृभाषा भोजपुरी के साल शुरू से हो रहे अन्याय का अंत होने की उम्मीद बढ़ गई है।

1969 से संसद में उठ रही आवाज पर अलग-अलग समय में सरकारों से आश्वासन मिलता रहा लेकिन 17 मई 2012 को तो तब के केन्द्राय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने भोजपुरी में बोलकर इस भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने का भरोसा दिया था। अनेक सांसदों ने उन्हें इस आश्वासन के लिए धन्यवाद दिया लेकिन 15वी लोक सभा भंग होने तक इस दिशा में कोईकाम नहीं हो पाया।

जगदंबिका पाल, मनोज तिवारी, ओम प्रकाश यादव समेत बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत अनेक इलाकों के दो दर्जन से ज्यादा सांसदों से मिलकर अजीत दुबे इस मांग को सिरे चढ़ाने में लगे हुए हैं। उन्होंने पिछले साल नरेन्द्र मोदी के बनारस से चुनाव लड़ने पर एक खुला पत्र लिख कर कहा ता कि देश की इस सांस्कृकित राजधानी से चुनाव जीतकर वे बीस करोड़ भोजपुरी भाषी लोगों की मांगों को पूरा करने का संकल्प लें। मादी ने पटना में अपनी चुनावी रैली की शुरुआत भोजपुरी से की थी।

दुबे ने कहा कि वे भाजपा समेत अनेक दलों के सांसदों के साथ केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से इस मुद्दे पर मिलने का समय लेने वाले हैं। वे बार-बार दोहराते हैं कि भोजपुरी को संवैधानिक दर्जा इसको बोलने वालों के सीधे सम्मान से जुड़ी हुई है। वे यह मानने को वे तैयार नहीं हैं कि इससे कहीं हिंदी को राष्ट्र भाषा बने रहने में कोई परेशानी आने वाली है। हिंदी तो राष्ट्रभाषा है ही भोजपुरी मातृभाषा है वह प्रसिद्ध कवि केदार नाथ सिंह के हवाले से कहते हैं कि भोजपुरी मेरा घर है और हिंदी मेरा देश, न घर छोड़ सकता हूं, न देश को।

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