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एलगार परिषद मीटिंग: पीएम की हत्या की साजिश में सामाजिक कार्यकर्ता शामिल! पुलिस चार्जशीट में सनसनीखेज दावे

चार्जशीट के अनुसार, आरोपी रोना विल्सन और किशन उर्फ प्रशांतो बोस, जो कि सीपीआई (माओवादी) संगठन सचिव है, ने कुछ अंडरग्राउंड कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर भारत के प्रधानमंत्री को मारने की साजिश रची।

Author November 16, 2018 8:11 AM
एलगार परिषद के एक कार्यक्रम की तस्वीर।

 Chandan Haygunde , Sushant Kulkarni 

पुणे पुलिस ने गुरुवार को प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के 10 सदस्यों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट बीते साल 31 दिसंबर को एलगार परिषद की एक बैठक आयोजित करने और उस बैठक में भीमा कोरेगांव में हिंसा करने के लिए लोगों को भड़काने के आरोप में दाखिल की गई है। खास बात ये है कि चार्जशीट में आरोपी बनाए गए 10 लोगों में से 5 सामाजिक कार्यकर्ता हैं। 5000 पेज की इस चार्जशीट में मुंबई के लेखक- सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, नागपुर के वकील सुरेंद्र गाडलिंग, नागपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर शोमा सेन, दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता रोना विल्सन और प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास योजना से पूर्व में जुड़े महेश राउत का नाम शामिल है। अन्य पांच आरोपियों में मिलिंद तेलतुंबडे, प्रकाश उर्फ रितुपन गोस्वामी, मंगलू, दीपू और किशन उर्फ प्रशांतो बोस का नाम शामिल है। हालांकि ये पांचों अभी तक फरार हैं।

चार्जशीट के अनुसार, आरोपी रोना विल्सन और किशन उर्फ प्रशांतो बोस, जो कि सीपीआई (माओवादी) संगठन सचिव है, ने कुछ अंडरग्राउंड कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर भारत के प्रधानमंत्री को मारने की साजिश रची और साथ ही भारतीय नागरिकों और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए हथियारों की खरीद प्रक्रिया में शामिल रहे। पुणे पुलिस ने रोना विल्सन और रितुपन गोस्वामी के बीच लिखा गया एक पत्र भी सीज किया है, जिसमें इस बात का खुलासा है कि अन्य आरोपी महेश राउत ने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के 2 छात्रों को प्रतिबंधित माओवादी संगठन में शामिल किया और फिर उन्हें ट्रेनिंग के लिए जंगलों में गुरिल्ला जोन में भेजा।

चार्जशीट के अनुसार, “यह दिखाता है कि महेश राउत सीपीआई (माओवादी) का एक सक्रिय सदस्य है और वह संगठन के लिए युवाओं की भर्ती करने का काम करता है।” पुलिस की चार्जशीट में इस बात का भी जिक्र है कि माओवादी संगठन ने धावले, गाडलिंग और रितुपन सेन को भीमा कोरेगांव मुद्दे पर आंदोलन करने के लिए 5 लाख रुपए दिए थे। बता दें कि अब तक पुणे पुलिस इस मामले में कुल 22 लोगों को नामजद कर चुकी है, जिनमें 5 सामाजिक कार्यकर्ता और वकील पी.वारवरा राव, वेरनोन गोंजालवेस, अरुण फरेरा और गौतम नवलखा को बीते 28 अगस्त को ही हिरासत में लिया जा चुका है। पुलिस का दावा है कि ये लोग माओवादियों की उस बड़ी साजिश का हिस्सा हैं, जिसके तहत एक एंटी फासिस्ट फ्रंट बनाने और सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रची गई। चार्जशीट में कहा गया है कि भीमा कोरेगांव हिंसा में सीपीआई (माओवादी) संगठन का बहुत बड़ा हाथ है। वहीं इस मामले में जांच अधिकारी एसीपी शिवाजी पवार का कहना है कि ‘जांच में खुलासा हुआ है कि एलगार परिषद और पूर्व में हुए कई प्रचार कार्यक्रम भीमा कोरेगांव हिंसा को भड़काने के लिए किए गए थे और इसकी फंडिंग सीपीआई (माओवादी) संगठन ने की।’

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