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भीमा कोरेगांव इन्‍क्‍वायरी कमीशन ने शरद पवार को भेजा समन, 5 मई को होगी पूछताछ

मुंबईः पवार ने 2018 में भी आयोग के समक्ष अपना हलफनामा दाखिल किया था। भीमा कोरेगांव हिंसा को लेकर उनका कहना था कि हिंदुत्व ग्रुप की इसमें भूमिका संदिग्ध है।

भीमा कोरेगांवः शरद पवार ने लगाया था हिंदुत्ववादी नेताओँ पर हिंसा का आरोप
एनसीटी चीफ शरद पवार। (एक्सप्रेस फोटो)

भीमा कोरेगांव इन्‍क्‍वायरी कमीशन ने राष्ट्रवादी कांग्रेस के सर्वेसर्वा शरद पवार को बतौर गवाह फिर से समन भेजा है। उन्हें 5 और 6 मई को पेश होने का आदेश दिया गया है। हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस जेएन पटेल की अगुवाई वाला दो सदस्यीय कमीशन 1 जनवरी 2018 को कोरेगांव भीमा इलाके में हुई हिंसा की जांच कर रहा है। घटना में 1 शख्स की मौत हुई थी जबकि कई लोग जख्मी हो गए थे।

कमीशन ने इससे पहले 23 व 24 फरवरी को शरद पवार को पूछताछ के लिए बुलाया था। लेकिन पवार ने 21 फरवरी को कमीशन के दफ्तर जाकर सुनवाई को स्थगित करने की मांग की थी। उनका कहना था कि अपना जवाब दाखिल करने के लिए उन्हें कुछ और वक्त की जरूरत है। कमीशन के सचिव ने कहा कि पवार ने कुछ दिनों पहले अपना अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर दिया था। फिलहाल हमने उन्हें लैटर ऑफ रिक्वेस्ट भेजा है। उनसे कहा गया है कि वो 5 और 6 मई को कमीशन के सामने उपस्थित होकर अपना जवाब दाखिल करें।

पवार ने 2018 में भी आयोग के समक्ष अपना हलफनामा दाखिल किया था। भीमा कोरेगांव हिंसा को लेकर उनका कहना था कि हिंदुत्व ग्रुप की इसमें भूमिका संदिग्ध है। लेकिन अपने हलफनामे में उनका कहना था कि वो इस स्थिति में नहीं हैं कि दावे के साथ कह सकें कि कौन से संगठन का हिंसा में हाथ था। पवार का कहना था कि ये दुख की बात है कि सरकार आम आदमी के हितों की रक्षा नहीं कर सकी। दक्षिण पंथी ताकतों का इसमें हाथ होने से इन्कार नहीं किया जा सकता। लेकिन इसके बारे में जांच एजेंसी पुख्ता तौर पर कह सकती हैं।

उधर, बुधवार को कमीशन ने उस पुलिस अधिकारी गणेश मोरे को क्रास एग्जामिन किया जिसने हिंदुत्ववादी नेता मिलिंद एकबोते औक संभाजी भिंडे के मामले की जांच की थी। गणेश मोरे पुणे ग्रामीण पुलिस में तैनात थे। घटना के समय वो धौड में बतौर सब डिवीजनल अफसर नियुक्त थे। वो दिसंबर 2018 में रिटायर हुए थे। उन्हें एडवोकेट बीजी बानसोदे ने क्रास एग्जामिन किया। वो दलित गवाहों की पैरवी कर रहे हैं।

ध्यान रहे कि दलित कार्यकर्ता अनिता ने भिडें और एकबोते के खिलाफ केस दर्ज कराया था। उन पर हिंसा का आरोप है। एकबोते को पुलिस ने अरेस्ट किया था। अभी वो जमानत पर है। जबकि भिंडे को न तो गिरफ्तार किया गया और न ही पुलिस ने उसके खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल की।

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