ताज़ा खबर
 

भीमा कोरेगांव केस: गौतम नवलखा मामले का रिकार्ड पेश करने से जुड़ा दिल्ली HC का आदेश निरस्त

मेहता ने कहा कि इस वारंट के आधार पर नवलखा को मुंबई की अदालत में पेश किया गया और दिल्ली उच्च न्यायालय को इसकी जानकारी भी दी गयी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लॉकडाउन खत्म होने के बाद नवलखा को मुंबई ले जाया गया ।

Author नई दिल्ली | Updated: July 6, 2020 8:35 PM
Bhima Koregaon Case, Gautam Navlakha, Delhi HCमानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

उच्चतम न्यायालय ने भीमा कोरेगांव मामले के संबंध में मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा को दिल्ली से मुंबई स्थानांतरित करने से संबंधित न्यायिक रिकार्ड पेश करने का एनआईए को निर्देश देने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश सोमवार को निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय को नवलखा की जमानत याचिका पर विचार करने का अधिकार नहीं था। पीठ ने कहा कि यह मामला मुंबई की अदालतों के अधिकार क्षेत्र का था।

पीठ ने नवलखा की जमानत याचिका पर उच्च न्यायालय के 27 मई के आदेश में राष्ट्रीय जांच एजेन्सी के बारे में की गयी प्रतिकूल टिप्पणियों को रिकार्ड से निकाल दिया। शीर्ष अदालत ने इससे पहले 27 मई के उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में गौतम नवलखा को तिहाड़ जेल से मुंबई ले जाने में दिखाई गयी जल्दबाजी के लिये राष्ट्रीय जांच एजेन्सी को आड़े हाथ लिया था।

सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को न्यायालय में सुनवाई के दौरान कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश पर जब नवलखा ने समर्पण किया तो उस वक्त दिल्ली में लॉकडाउन था। उन्होंने कहा कि एनआईए ने बाद में मुंबई की विशेष अदालत में आवेदन करके दिल्ली की तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में बंद गौतम नवलखा को पेश करने के लिये आवश्यक वारंट जारी करने का अनुरोध किया।

मेहता ने कहा कि इस वारंट के आधार पर नवलखा को मुंबई की अदालत में पेश किया गया और दिल्ली उच्च न्यायालय को इसकी जानकारी भी दी गयी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लॉकडाउन खत्म होने के बाद नवलखा को मुंबई ले जाया गया । उहोंने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेन्सी के बारे में उच्च न्यायालय की टिप्पणियां अनावश्यक थीं।

नवलखा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि उच्च न्यायालय ने क्या किया था। उसने न तो कोई जमानत दी और न ही किसी तरह की राहत दी। उच्च न्यायालय ने तो सिर्फ संबंधित अधिकारी को हलफनामा दाखिल करने के लिये कहा था। हालांकि, पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय को इस याचिका पर विचार ही नहीं करना चाहिए था।

बेंच ने सिब्बल से कहा, ‘‘इस तरह के मामले में कोई उच्च न्यायालय हस्तक्षेप कैसे कर सकता है? आप हमारे पास आ सकते थे या फिर मुंबई में एनआईए की संबंधित अदालत में जा सकते थे।’’ शीर्ष अदालत ने 19 जून को अप्रसन्नता व्यक्त करते हुये उच्च न्यायालय द्वारा नवलखा की जमानत याचिका पर विचार करने पर सवाल उठाये थे जबकि इस तरह की राहत के लिये उसकी याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी थी और उसे निश्चित तारीख के भीतर समर्पण करने का निर्देश दिया गया था।

शीर्ष अदालत ने 16 मार्च को नवलखा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुये उसे तीन सप्ताह के भीतर समर्पण करने का आदेश दिया था। इस आदेश का पालन करते हुये नवलखा ने 14 अप्रैल को समर्पण कर दिया था और इसके बाद से वह तिहाड़ जेल में बंद थे। नवलखा को 26 मई को ट्रेन से मुंबई ले जाया गया था। गौतम नवलखा को कोरेगांव भीमा गांव में एक जनवरी, 2018 को हुयी हिंसा के सिलसिले में पुणे पुलिस ने अगस्त, 2018 को गिरफ्तार किया था।

पुणे पुलिस का आरोप था कि 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एलगार परिषद में भड़काने वाले बयान दिये गये थे जिसकी वजह से अगले दिन कोरेगांव भीमा में हिंसा भड़क उठी थी। पुलिस का आरोप था कि इस समागम को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 उधर संकट में ओली सरकार, फिर भी बॉर्डर पर बाज़ नहीं आ रहा नेपाल! पीलीभीत के पास कर रहा था निर्माण, भारत ने यूं दिया जवाब
2 Coronavirus in India HIGHLIGHTS: कोरोनावायरस से निपटने पर स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में मंत्री समूह की बैठक, विदेश मंत्री जयशंकर और नागर विमानन मंत्री भी बैठक में शामिल
3 COVID-19: संक्रमण में भारत तीसरे नंबर पर, स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा- 6.73% है पॉजिटिविटी रेट
ये पढ़ा क्या?
X