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भीम आर्मी चीफ ‘आजाद’ लेकिन दिल्ली से रहना होगा दूर, टैगोर की कविता पढ़ जज ने कहा- ‘‘व्हेयर द माइंड इज विदाउट फियर ’’

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाउ ने कहा कि 1900 की शुरुआत में जब अंग्रेज फूट डालो, राज करो की नीति अपना रहे थे तब टैगोर ने ऐसे राष्ट्र की कल्पना की जहां लोगों के मन में कोई डर न हो, सभी को शिक्षा मिले और भेदभाव की दीवारें ना बनाई जाए।

(फाइल फोटो)

तीस हजारी कोर्ट ने पुरानी दिल्ली में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएए) के खिलाफ हालिया रैली के दौरान गिरफ्तार भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद को जमानत दे दी है। कोर्ट ने रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कविता ‘‘व्हेयर द माइंड इज विदाउट फियर ’’ का पढते हुए भीम आर्मी के प्रमुख को जमानत दी। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, जिसमें सरकार कटौती नहीं कर सकती है।

 टैगोर आज सबसे अधिक प्रासंगिक: अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाउ ने कहा कि 1900 की शुरुआत में जब अंग्रेज फूट डालो, राज करो की नीति अपना रहे थे तब टैगोर ने ऐसे राष्ट्र की कल्पना की जहां लोगों के मन में कोई डर न हो, सभी को शिक्षा मिले और भेदभाव की दीवारें ना बनाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करते हुए यह हमारा कर्तव्य है कि हम यह सुनिश्चित करें कि किसी दूसरे के अधिकार का हनन न हो और किसी को कोई असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि टैगोर आज सबसे अधिक प्रासंगिक हैं।

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गिरफ्तारी अवैध थी: बता दें कि न्यायाधीश ने आजाद को कुछ शर्तों पर राहत दी है जिसमें 25,000 रुपये के रुप में जमानत बॉड भी शामिल है। आजाद पर 20 दिसंबर को जामा मस्जिद में एक सीएए के विरोध के दौरान लोगों को उकसाने का आरोप लगाया गया है। जमानत याचिका में दावा किया गया कि एफआईआर में आजाद पर लगाए गए आरोपों के खिलाफ कोई सबूत नहीं था और उनकी गिरफ्तारी अवैध थी।

 दिल्ली में नहीं करेंगे विरोध प्रदर्शन: चंद्रशेखर आजाद को इस शर्त पर जमानत दी गई थी कि वह दिल्ली में आगामी चार चुनावों के लिए अगले चार सप्ताह तक दिल्ली में विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि चंद्रशेखर आज़ाद शाहीन बाग विरोध स्थल पर नहीं जा सकते। अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह आज़ाद को उसकी रिहाई के 24 घंटे के भीतर सहारनपुर में उसके घर ले जाए। अदालत ने यह भी कहा कि सहारनपुर जाने से पहले अगर आज़ाद दिल्ली में जामा मस्जिद सहित कहीं भी जाना चाहते हैं तो 24 घंटे तक पुलिस उन्हें वहां ले जाएगी।

एस्कॉर्ट मुहैया कराया जाएगा: दिल्ली की अदालत ने कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद को अपने गृहनगर सहारनपुर में हर शनिवार को एसएचओ के सामने पेश होना होगा, इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की जाएगी। अदालत ने कहा कि अगर चंद्रशेखर को अपनी चिकित्सीय स्थिति के लिए एम्स जाना है, तो वह पहले डीसीपी क्राइम को सूचित करेंगे जो उसे एक एस्कॉर्ट मुहैया कराएगा। फैसला सुनाते वक्त आजाद की ओर से पेश वकील ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भीम आर्मी प्रमुख को खतरा है।

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