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RSS के कार्यक्रम में जाएंगे सीताराम येचुरी, राहुल गांधी? जानिए माकपा, कांग्रेस का जवाब

संघ सितंबर में भविष्य का भारत नाम के कार्यक्रम का आयोजन करेगा। नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में यह कार्यक्रम 17 से 19 सितंबर के बीच चलेगा। संघ इसी की तैयारियों में इन दिनों जुटा है।

आरएसएस सूत्रों के अनुसार, इन दोनों ही राजनेताओं को ‘भविष्य का भारत’ में बुलाया जाएगा। (एक्सप्रेस फोटोः पार्था पॉल/AICC)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आएसएस) के कार्यक्रम में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी और कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी जाएंगे या नहीं? सोमवार (27 अगस्त) को इस सवाल के जवाब में माकपा और कांग्रेस ने अपनी-अपनी बात रखी। दोनों ही दलों ने साफ किया कि उन्हें संघ की तरफ से अभी तक कोई निमंत्रण नहीं मिला है। निमंत्रण मिलने के बाद ही कार्यक्रम में जाने को लेकर दल अंतिम फैसला लेंगे।

बता दें कि संघ सितंबर में भविष्य का भारत नाम के कार्यक्रम का आयोजन करेगा। नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में यह कार्यक्रम 17 से 19 सितंबर के बीच चलेगा। संघ इसी की तैयारियों में इन दिनों जुटा है। जोर-शोर के साथ कहा जा रहा है कि संघ इसमें सीताराम येचुरी और राहुल गांधी को भी बुलाएगा। उसी को लेकर माकपा और कांग्रेस ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।


‘सीएनएन न्यूज 18’ से बातचीत में माकपा नेता सुनीत चोपड़ा बोले, “यह मामला तब सामने आएगा, जब आरएसएस न्यौता भेजेगा। हमारी पार्टी उस पर फैसला लेगी कि वह ठीक है या नहीं। अभी तक न्यौते की कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में पूरे देश में इस बात पर क्यों चर्चा हो रही है?”

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बकौल चोपड़ा, “देश के राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सब आरएसएस से हैं। क्या वे स्वीकार किए जाएंगे या फिर उन्हें ‘सभ्य गोरक्ष’ से अधिक कुछ नहीं समझा जाएगा?”

वहीं, कांग्रेस ने भी सोमवार को पुष्टि की कि आरएसएस की ओर से अभी तक पार्टी अध्यक्ष के लिए निमंत्रण नहीं आया है। कांग्रेस प्रवक्त अभिषेक सिंघवी ने पत्रकारों से कहा, “मैं काल्पनिक सवालों के जवाब नहीं दे सकता हूं। यह इस वक्त पूरी तरह से ख्याली बात है। आरएसएस से निमंत्रण मिलने के बाद ही उस पर जवाब दिया जाएगा और मीडिया को उस बारे में सूचना दी जाएगी।”

संघ के कार्यक्रम में राहुल को बुलाने की खबर आने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष ने विदेशी दौरे पर आरएसएस की जमकर आलोचना की थी। उन्होंने लंदन के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैटेजिक स्टडीज में कहा था, “आरएसएस की सोच मुस्लिम ब्रदरहुड जैसी है। यह संस्था भारत की प्रकृति को बदलने की कोशिश कर रही है।”

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