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दलाई लामा को भारत रत्‍न दिलाने को लेकर आरएसएस ने शुरू किया अभियान, पीएम मोदी से करेंगे अपील

इस अभियान से अलग दलाई लामा को भारत रत्‍न दिए जाने को लेकर ऑनलाइन कैंपेन भी चल रहा है।

दलाईलामा बोले- 80 साल से ऊपर का होकर भी मैं 70 का दिखता हूं। (Image Source : PTI)

राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ ने देश के सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान, भारत रत्‍न के लिए नोबेल विजेता और तिब्‍बत के धर्मगुरु दलाई लामा के पक्ष में अभियान शुरु किया है। 6 अप्रैल को शुरू किए गए अभियान के तहत अब तक ‘5,000 हस्‍ताक्षर’ इकट्ठा किए जा चुके हैं। 5 अप्रैल को दलाई लामा चीन के कड़े विरोध के बावजूद अरुणाचल प्रदेश के तवांग पहुंचे थे। अभियान के प्रमुख और पश्चिमी कामेंग जिले के आरएसएस नेता ल्‍हुंदुप चोसांग ने यह अभियान शुरू किया है। उन्‍होंने कहा, ”हमने अब तक 5000 हस्‍ताक्षर इकट्ठा किए हैं। 25,000 हस्‍ताक्षर हो जाने के बाद हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाएंगे।” चोसांग ने कहा कि हालांकि भारत रत्‍न, नोबेल शांति पुरस्‍कार से अलग है मगर इस कदम से अंतर्राष्‍ट्रीय मंच पर सही संदेश जाएगा। उन्‍होंने कहा, ”इसके अलावा दलाई लामा भारत रत्‍न के योग्‍य हैं क्‍योंकि उन्‍होंने कहा है कि वह भारत के पुत्र हैं और इस महान देश के सबसे लंबे समय पर मेहमान रहकर सम्‍मानित महसूस करते हैं।” इस अभियान से अलग दलाई लामा को भारत रत्‍न दिए जाने को लेकर ऑनलाइन कैंपेन भी चल रहा है।

दलाई लामा चीन की नाराजगी को नजरअंदाज कर शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश तवांग मठ पहुंचे। मठ में बौद्ध भिक्षुओं तथा श्रद्धालुओं ने उनका बेहद गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित दलाई लामा तवांग मठ में ठहरेंगे। यह मठ भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू तिब्बती धर्मगुरु के साथ थे। दलाई लामा के दौरे के मद्देनजर पूरे तवांग को भारत तथा तिब्बत के झंडों तथा फूलों के अलावा, रंगीन प्रार्थना झंडों से सजाया गया। सड़कों को रंगा गया और नालों की सफाई की गई।

चीन व भारत की सीमा को विभाजित करने वाले मैकमोहन लाइन (वास्तविक नियंत्रण रेखा) से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तवांग में सुरक्षाबलों को चौकस रखा गया है। दलाई लामा तवांग से अरुणाचल प्रदेश का एक सप्ताह लंबा धार्मिक दौरा चार अप्रैल को ही शुरू करने वाले थे। लेकिन, खराब मौसम के कारण उन्हें सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ा, क्योंकि उनका हेलीकॉप्टर असम के डिब्रूगढ़ से उड़ान नहीं भर सका।

तवांग मठ गेलुग्पा स्कूल ऑफ महायान बुद्धिज्म से जुड़ा है और इसका संबंध ल्हासा के द्रेपुंग मठ से है, जो ब्रिटिश काल से ही बरकरार है। सन् 1959 में तिब्बत से निर्वासित होने के बाद असम पहुंचने से पहले दलाई लामा कुछ दिनों के लिए तवांग मठ में ठहरे थे। दलाई लामा सबसे पहले बोमडिला पहुंचे, जो अरुणाचल प्रदेश में पश्चिमी कामेंग का जिला मुख्यालय है, जहां उन्होंने धार्मिक प्रवचन दिया और लोगों से बातचीत की। उसके बाद वह तवांग से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित दिरांग घाटी पहुंचे, जहां उन्होंने थूपसंग धारगेलिंग मठ में गुरुवार को प्रवचन दिया।

यह आठ वर्षो के बाद दलाई लामा का पहला अरुणाचल दौरा है। दलाई लामा ने इस पहाड़ी राज्य का पहला दौरा सन् 1983 में किया था और अंतिम दौरा सन् 2009 में किया था। दलाई लामा सन् 1959 से ही भारत में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे हैं साथ ही करीब 100,000 निर्वासित तिब्बती भी भारत में रह रहे हैं। चीन ने दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश दौरे का विरोध किया है। वह अरुणाचल को तिब्बत का हिस्सा मानता है। भारत, चीन के इस विरोध को खारिज कर चुका है।

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