राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि अगर स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है, तो भारत रत्न की प्रतिष्ठा बढ़ेगी। उनके इस बयान पर अब वीर सावरकर के पोते रणजीत सावकर की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए किसी पुरस्कार की जरूरत नहीं है, उनकी प्रतिष्ठा पहले से ही अपार है।

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में रणजीत सावरकर ने कहा, “मैं मोहन भगवत जी की बात से पूरी तरह सहमत हूं, क्योंकि अगर वीर सावरकर को भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है, तो इससे इस पुरस्कार की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। वीर सावरकर की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए किसी पुरस्कार की जरूरत नहीं है, उनकी प्रतिष्ठा पहले से ही अपार है। हमारा मानना ​​है कि जनता द्वारा उन्हें दी गई उपाधि ही सबसे बड़ा सम्मान है और अगर सरकार उन्हें सम्मानित करना चाहती है, तो मुझे लगता है कि उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘स्वतंत्र वीर’ की उपाधि को मान्यता देनी चाहिए। ठीक उसी तरह जैसे महात्मा गांधी की ‘महात्मा’ उपाधि को ब्रिटिश काल में आधिकारिक रूप से मान्यता दी गई थी।”

मोहन भागवत ने क्या कहा?

आरएसएस चीफ मोहन भागवत ‘संघ की 100 साल की यात्रा’ के दौरान सावरकर को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान में हुई देरी से संबंधित सवाल का जवाब दे रहे थे। मोहन भागवत ने कहा, “मैं उस समिति का सदस्य नहीं हूं, लेकिन अगर मेरी मुलाकात किसी ऐसे व्यक्ति से होती है जो उस समिति का सदस्य है, तो मैं उनसे इस बारे में पूछूंगा। अगर स्वतंत्र वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाता है, तो भारत रत्न का गौरव और बढ़ जाएगा। इस गौरव के बिना भी, वे लाखों दिलों के बादशाह बन चुके हैं।”

आरएसएस और उससे संबंधित सगठनों की बार-बार मांग के बावजूद सावरकर को भारत रत्न से सम्मानित करने के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बीजेपी ने 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले सावरकर को यह सम्मान देने का वादा किया था, लेकिन सरकार ने तब से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है।

सावरकर को भारत रत्न से सम्मानित करने का पहला औपचारिक प्रस्ताव पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौरान उठाया गया था। 2015 में, शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर एनडीए सरकार से सावरकर को सम्मानित करने और उनके हिंदुत्ववादी विचारों के कारण जानबूझकर उनकी उपेक्षा करने वाली पिछली सरकारों की गलतियों को सुधारने का आग्रह किया था।

कांग्रेस पार्टी ने किया विरोध

सावकर को भारत रत्न की मांग का कांग्रेस पार्टी ने कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, “सावरकर को भारत रत्न किस आधार पर दिया जाना चाहिए? यह एक बड़ा सम्मान है। सावरकर ही पहले व्यक्ति थे जिन्होंने दो-राष्ट्र सिद्धांत का प्रचार किया, जिसे बाद में मुस्लिम लीग ने अपनाया। उन्होंने इसी आधार पर अपनी सरकार बनाई और संयुक्त भारत को टुकड़ों में तोड़ दिया।”

वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “भारत रत्न पहले चुनिंदा व्यक्तियों को दिया जाता था, लेकिन भाजपा ने इसे राजनीतिक हथियार बना लिया है। जहां भी चुनाव होते हैं, सूची निकाल कर देख लीजिए, पद्म पुरस्कार सभी को मिलते हैं। तो, एक तरह से इसका राजनीतिकरण हो गया है। यह सही नहीं है। जहां तक ​​वीर सावरकर साहब की बात है, हो सकता है कि आरएसएस के लोग जो उन्हें जानते और मानते हैं, वे भी उनकी आलोचना करते हों। ये उनके विचार हैं, हमारे नहीं।” बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत (RSS Chief Mohan Bhagwat) ने रविवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर बड़ा बयान दिया। पढ़ें पूरी खबर…