पश्चिम एशिया संघर्ष से पैदा हुए हालात के बीच वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएनजी, सीबीजी के बाद परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। कलपक्कम में परमाणु संयंत्र (फास्ट ब्रीडर रिएक्टर) में ऊर्जा उत्पादन के लिहाज से मिली सफलता के बाद विशेषज्ञों की निगाहें तीसरे चरण पर टिकी है। आगामी चरण में बिजली उत्पादन के लिए थोरियम का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसका भारत में पर्याप्त भंडार है। खास बात यह है कि इस चरण में ईंधन के उत्पादन के लिए जितनी ऊर्जा का इस्तेमाल होगा, उससे अधिक उत्पादन बढ़ेगा। इससे देश में ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलने के साथ ही आत्मनिर्भरता की तरफ और तेजी से कदम बढ़ेंगे।
भारत ने इस दिशा में एक मुकाम हासिल किया है
फिलहाल भारत में 8.18 गीगावाट परमाणु ऊर्जा की उत्पादन क्षमता को 2047 तक 12 गुना बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है। परमाणु ऊर्जा के लिए सरकार ने ‘शांति’ विधेयक में निजी क्षेत्रों को इस क्षेत्र के लिए प्रोत्साहित किया है। दुनिया में रणनीतिक तौर पर परमाणु ऊर्जा की क्षमता के लिए रूस के बाद भारत ने इस दिशा में एक मुकाम हासिल किया है। परमाणु ऊर्जा के लिए प्रौद्योगिकी को वैज्ञानिक तौर पर सत्यापित करने के बाद इसे वाणिज्यिक तौर पर अपनाने का लक्ष्य है। तमिलनाडु के कलपक्कम में 500 मेगावट के स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने 2026 में सतत नाभिकीय शृंखला अभिक्रिया (क्रिटिकैलिटी) हासिल कर ली है जो भारत के 3-चरण परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण है।
यह उपलब्धि भारत को आत्मनिर्भर बनाकर, यूरेनियम पर निर्भरता कम करने के साथ ही थोरियम आधारित ऊर्जा भविष्य की तरफ ले जाने में अहम भूमिका होगी। इस नाभिकीय संयंत्रों में ईंधन (यूरेनियम या प्लूटोनियम) का जितना उपयोग किया जाता है, उससे अधिक पैदा करने में सक्षम है। इससे परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भरता आएगी। वर्तमान में देश में परमाणु ऊर्जा का योगदान देश के कुल बिजली उत्पादन में करीब तीन फीसद है।
सरकार का लक्ष्य 2047 तक इसे 100 गीगावाट(8.18 गीगावाट) तक बढ़ाते हुए शून्य उत्सर्जन ( नेट जीरो) के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इस सफलता से भारत में थोरियम के पर्याप्त भंडार के इस्तेमाल करने का रास्ता साफ हो गया है जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकता है। दिसंबर 2025 में शांति विधेयक के जरिए सरकार ने निजी कंपनियों को परमाणु संयंत्रों के निर्माण और संचालन में शामिल होने की इजाजत दे दी है।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ देबोजित पालित ने बताया कि शांति विधेयक के जरिए कई प्रावधान किए गए हैं। इससे भारतीय निजी कंपनियों को परमाणु रिएक्टर स्थापित करने की इजाजत होगी।
इससे निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अब मिलकर काम करेंगी और ऊर्जा के लिए कोयला पर निर्भरता कम होगी। परमाणु संयंत्रों से स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होने की वजह से इससे ऊर्जा क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ेगी। देश में करीब 17000 करोड़ किलोवाट आवर( करीब 550 लाख मेगावाट) ऊर्जा की खपत होती है, जिसमें परमाणु ऊर्जा की भूमिका 8-11 हजार मेगावाट(करीब 3 फीसद) है। इसे बढ़ाकर एक लाख मेगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
भारत में अभी तक पहले चरण के रिएक्टर हैं जबकि कलपक्कम में दूसरे चरण का रिएक्टर बनाया गया जो एक बड़ी उपलब्धि है। तीसरे चरण में थोरियम चाहिए जो भारत के पास सर्वाधिक है जो भारत में प्रचुर मात्रा में है। थोरियम आधारित रिएक्टर से लागत से काफी अधिक ऊर्जा उत्पादन होगा, जिससे घरेलू मांग को आसानी से पूरा किया जा सकेगा। दूसरे चरण की मौजूदा उपलब्धि पहले और तीसरे चरण के बीच सेतू के तौर पर काम करेगा। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में जितना ईंधन डालते हैं, उससे अधिक ऊर्जा का उत्पादन होता है। प्रतिक्रिया के दौरान प्लूटोनियम से थोरियम बनने के क्रम में ऊर्जा की बढ़ोतरी होती है।
भाविनी से जुड़े विशेषज्ञ अलु अनंत ने बताया कि 20 साल से भी अधिक समय तक की मेहनत के बाद यह एतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने बताया कि स्वच्छ ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह एतिहासिक कदम है। अगले चरण में थोरियम के इस्तेमाल से काफी फायदा होगा और यह ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी अहम होगा।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार (7 अप्रैल 2026) को भारत के असैन्य परमाणु कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का ऐलान किया। पीएम ने कहा कि तमिलनाडु के कल्पक्कम स्थित स्वदेशी रूप से विकसित ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ (पीएफबीआर) ने ‘क्रिटिकल’ अवस्था हासिल कर ली है। उन्होंने इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई देते हुए इसे भारत के लिए गर्व का क्षण बताया। गृह मंत्री अमित शाह ने इस उपलब्धि को देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिये एक ‘नए युग की शुरुआत’ बताया। आखिर यह PFBR है क्या और इसमें किस खास टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि क्यों देश के लिए यह PFBR महत्वपूर्ण है… । पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक।
