उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को ऐलान किया कि अयोध्या जिले की भदरसा नगरपालिका का नाम बदलकर ‘भरत नगर’ किया जाएगा। योगी ने कहा कि अयोध्या जिले के बीकापुर विधानसभा क्षेत्र में स्थित खिरौनी-सुचितागंज नगर पंचायत अब ‘मां ज्वाला देवी’ के नाम से जानी जाएगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार अयोध्या की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को और मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी क्रम में भदरसा नगरपालिका का नाम बदलकर भरत नगर करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने अयोध्या में 432 करोड़ रुपये की लागत वाली 217 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण और बीकापुर विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री दिवंगत मुन्ना सिंह चौहान की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए यह घोषणा की।
योगी ने नए नाम की घोषणा करते हुए कहा, ”भदरसा अब भदरसा नहीं होगा, अब वह भरत नगर, भरत कुंड होगा। भाई-भाई के बीच में किस प्रकार का संबंध होना चाहिए, यह भरत जी ने प्रभु के प्रति अपना आदर, अपनी श्रद्धा को व्यक्त करते हुए दिखाई है। और 14 वर्ष तक उसी भरत कुंड के पास रहकर उन्होंने भगवान राम की आज्ञा का पालन किया। उनकी चरण पादुकाएं अयोध्या का संचालन कर रहीं हैं।”
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के कई शहरों, कस्बों और सार्वजनिक स्थलों के नाम स्थानीय इतिहास, संस्कृति और धार्मिक महत्व के अनुरूप बदलने की नीति पर काम कर रही है।
‘अयोध्या तीनोंं लोकों से न्यारी’
आपको बता दें कि सीएम योगी शुक्रवार को अयोध्या के बीकापुर पहुंचे थे। यहां उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर हमला बोला। सीएम योगी ने कहा कि सपा के शासनकाल में अयोध्या का ध्यान नहीं दिया गया लेकिन आज अयोध्या तीनों लोकों से न्यारी है। आज अयोध्या की गलियां चमक रही हैं। यह डबल इंजन की समरसता का काम है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले अयोध्या को लेकर पहचान का संकट था। पहले वक्फ के नाम पर कब्जे थे। पहले सरयू गंदी रहती थी लेकिन आज लाखों श्रद्धालु अयोध्या के दर्शन के लिए लगातार आ रहे हैं। अब अयोध्या देश के सभी शहरों से जुड़ी है।
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यूपी चुनाव: लखनऊ की सियासत में किसका पलड़ा भारी? आंकड़ों से समझिए राजधानी की 9 सीटों का गणित
उत्तर प्रदेश की राजनीति में लखनऊ सिर्फ राजधानी, एक जिला, निर्वाचन क्षेत्र ही नहीं बल्कि सत्ता का केंद्र है। यह देश की सबसे हाई-प्रोफाइल और वीआईपी सीटों में से एक है। मुख्यमंत्री आवास, विधानसभा, सचिवालय और प्रमुख सरकारी संस्थानों की मौजूदगी इसे राजनीतिक रूप से सबसे अहम जिलों में शामिल करती है। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की यह कर्मभूमि पिछले तीन दशकों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का अभेद्य किला रही है। ऐसे में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह समझना जरूरी है कि राजधानी की चुनावी तस्वीर क्या कहती है।
लेकिन हालिया आम चुनावों (2024) के आंकड़ों पर गौर करें तो समझ आता है कि लखनऊ की सियासत में ‘कमल’ का दबदबा बरकरार रहने के बावजूद समाजवादी पार्टी (SP) और INDIA गठबंधन ने इस किले की दीवारों में बड़ी सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश की है। आइए आंकड़ों के जरिए लखनऊ के चुनावी समीकरण को विस्तार से समझते हैं…
