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जब 16 साल के भगत सिंह ने पिता को याद दिलाया कि यज्ञोपवीत के समय ही मुझे देश को समर्पित कर दिया गया था…

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में फांसी दी गयी थी। फांसी के समय भगत सिंह की उम्र महज 23 साल थी।

Shaheed Bhagat Singh, bhagat singh, bhagat singh birthday, bhagat singh birth date, bhagat singh birth anniversary, Bhagat Singh love story, Bhagat Singh love letter, Bhagat Singh love, Bhagat Singh college life, indian freedom fighterभगत सिंह का जन्म सितंबर 1907 में हुआ था। (शहीद भगत सिंह की वास्तविक तस्वीरें।)

28 सितंबर 1907 को जन्मे भगत सिंह महज 23 साल की उम्र में शहीद हो गये। ब्रिटिश शासकों ने उन्हें सुखदेव और राजगुरु के साथ 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में फांसी दे दी थी। ब्रिटिश ने तीनों भारतीय क्रांतिकारियों के शवों को गुपचुप तरीके से करके उनकी अस्थियां सतलज नहीं में बहा दीं। अंग्रेजों की लाख कोशिशों के बावजूद भगत सिंह अपने विचारों के रूप में आज भी हमारे बीच में मौजूद हैं। खुद भगत सिंह ने लिखा है, “व्‍यक्तियों को कुचलकर भी आप उनके विचार नहीं मार सकते हैं।” पुरानी कहावत है कि पूत के पाँव पालने में ही दिखने लगते हैं। भगत सिंह पर ये कहावत पूरी तरह चरितार्थ होती है। आपको ये जानकर शायद हैरत होगी कि महज 12 साल की उम्र में बगैर किसी को बताए भगत सिंह जलियांवाला बाग चले गए थे और वहां की मिट्टी लेकर घर लौटे थे। 16 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को लिखे पत्र में साफ कह दिया था कि उनका जीवन देश सेवा को समर्पित है।

भगत सिंह का जन्म ब्रिटिशकालीन पंजाब के लायलपुर में हुआ था। उनके पिता किशन सिंह, चाचा अजीत सिंह और स्वर्ण सिंह स्वतंत्रतासेनानी थे। उनके पिता और चाचा करतार सिंह सराभा और हरदयाल की गदर पार्टी के सदस्य थे। खुद भगत सिंह भी करतार सिंह सराभा को अपना आदर्श मानते थे। भगत सिंह के मन में क्रांतिकारी विचारों के बीच बचपन में ही पड़ गये थे। बड़ी मशहूर कहानी है कि जब भगत सिंह छोटे थे और उनके पिता और चाचा गन्ने बो रहे थे तो नन्हें भगत सिंह भी जमीन में कुछ बो रहे थे। जब उनके पिता ने पूछा कि तुम क्या कर रहो भगत तो उनका जवाब था, “बंदूके बो रहा हूं!”

Bhagat singh, bhagat singh thought, bhagat singh quotes, bhagat singh quotes in hindiइतिहासकारों की मानें तो भगत सिंह के जीवन में पहला निर्णायक मोड़ 1919 में आया जब उनकी उम्र करीब 12 साल थी। 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में इकट्ठी हुए भारतवासियों पर रेगीनाल्ड डायर ने बगैर चेतावनी गोलियां चलवा दी थीं। डायर ने बाग से निकलने से सभी रास्ते बंद करवा दिए थे। इस नृशंस गोलीबारी में सैकड़ों लोग मारे गए थे। उस समय भगत सिंह स्कूली छात्र थे। एक दिन घर में किसी को बताए बगैर वो वहां से 35-40 किलोमीटर दूर स्थित जलियांवाला बाग चले गए और बाग की मिट्टी को एक बोतल में भरकर घर वापस लौटे।

Bhagat singh, bhagat singh thought, bhagat singh quotes, bhagat singh quotes in hindi1923 में भगत सिंह ने नेशनल कॉलेज लाहौर में बीए में प्रवेश लिया। यहीं उनकी सुखदेव इत्यादि क्रांतिकारियों सो दोस्ती हुई थी। कॉलेज में भगत सिंह भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी बहसों और चर्चाओं में भाग लेने लगे। पढ़ाई के अलावा उन्हें नाटकों का भी शौक था। यही वो वक्त था जब भगत सिंह की दादी ने उनकी शादी की बात चलायी। भगत सिंह के संपूर्ण दस्तावेज के संपादक चमन लाल के अनुसार संभवत: लड़की उन्हें देखने भी आए थे। भले ही भगत सिंह की उम्र उस समय कम थी लेकिन अपने भावी जीवन की रूपरेखा उनके जहन में साफ थी। जबरदस्ती शादी कराए जाने की कोशिशों से नाराज भगत सिंह घर छोड़कर चले गए। जाते हुए उन्होंने अपने पता को पत्र लिखकर इसीक वजह भी बतायी। हम 1923 में लिखे उनके पत्र को नीचे हूबहू दे रहे हैं-

भगत सिंह का पिता के नाम पत्र- 

पूज्य पिता जी,

नमस्ते

मेरी ज़िन्दगी मक़सदे-आला यानी आज़ादी-ए-हिन्द के असूल के लिए वक्फ़ हो चुकी है। इसलिए मेरी ज़िन्दगी में आराम और दुनियावी ख़ाहशात बायसे कशिश नहीं हैं।

आपको याद होगा कि जब मैं छोटा था, तो बापू जी ने मेरे यज्ञोपवीत के वक़्त एलान किया था कि मुझे खि़दमते-वतन के लिए वक्फ़ दिया गया है। लिहाज़ा मैं उस वक़्त की प्रतिज्ञा पूरी कर रहा हूँ।

उम्मीद है आप मुझे माफ़ फ़रमायेंगे।

आपका ताबेदार

भगतसिंह

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