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भाभा कवच: भारत की सबसे हल्की बुलेटप्रूफ जैकेट! झेल सकती है एके-47 और इंसास की बुलेट

इस जैकेट को ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड और पब्लिक सेक्टर कंपनी मिधानी ने मिलकर विकसित किया है। मिधानी धातुओं और मिश्रित धातुओं के निर्माण से जुड़ी है।

Author नई दिल्ली | July 23, 2019 9:23 AM
भारतीय सुरक्षाबल बुलेटप्रूफ जैकेट की कमियों से जूझ रहे हैं। जानकार मानते हैं कि यह नई जैकेट सरकार को खरीद के लिए एक नया विकल्प उपलब्ध करा सकती है।

बीते हफ्ते इंटरनैशनल पुलिस एक्सपो 2019 में लॉन्च भाभा कवच को ‘भारत का सबसे हल्का बुलेट प्रूफ जैकेट’ बताया जा रहा है। इस जैकेट को ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड और पब्लिक सेक्टर कंपनी मिधानी ने मिलकर विकसित किया है। मिधानी धातुओं और मिश्रित धातुओं के निर्माण से जुड़ी है। एक्सपो की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह बुलेट प्रूफ जैकेट 7.62 mm ठोस स्टील कोर वाली AK-47 राइफल की बुलेट से लेकर 5.56 mm इंसास की गोली तक झेल सकती है।

कवच का वजन 9.2 किलोग्राम है। रिलीज के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित बुलेट प्रूफ जैकेट के मुकाबले इसका वजन करीब आधा किलो कम है। प्रेस रिलीज में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है, ‘जैकेट भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर के नैनो टेक्नोलॉजी से तैयार की गई है।’ इसकी वॉरंटी पांच साल है। दावा किया गया है कि पंजाब, चंडीगढ़, कर्नाटक और गुजरात प्रदेश के पुलिस विभाग इस जैकेट के बारे में जानकारी ले रहे हैं।

बता दें कि भारतीय सुरक्षाबल बुलेटप्रूफ जैकेट की कमियों से जूझ रहे हैं। जानकार मानते हैं कि यह नई जैकेट सरकार को खरीद के लिए एक नया विकल्प उपलब्ध करा सकती है। हाल ही में खबर आई थी कि सरकार 639 करोड़ रुपये की रकम खर्च करके अप्रैल 2020 तक 1.86 लाख जैकेट खरीदेगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह जानकारी संसद में दी थी।

राजनाथ के मुताबिक, ‘2009 में देश में 3,53,755 बुलेट प्रूफ जैकेटों की कमी थी, लेकिन लंबे वक्त से खरीद नहीं हुई। अप्रैल 2016 में 1,86,138 जैकेटों की खरीद के लिए आरएफपी यानी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी हुआ। इस संबंध में 9 अप्रैल 2018 को टेंडर अलॉट किया गया। इस कॉन्ट्रैक्ट की पूरी लागत 638.97 करोड़ रुपये है, जिसके जरिए 1,86,138 जैकेट खरीदे जाएंगे। इनकी सप्लाई 36 महीनों में होगी जो 8 अप्रैल 2020 को पूरी होगी।’ राजनाथ ने यह भी आश्वासन दिया था कि सैन्यबलों के लिए खरीदे जाने वाले जैकेट में क्वॉलिटी के स्तर पर कोई समझौता नहीं किया गया है।

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