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”गुजरात में फेल हो गया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा”, बढ़ती भ्रूण हत्याओं पर कांग्रेस सरकार ने बीजेपी पर साधा निशाना

कांग्रेस सदस्य अमी याज्ञिक ने कहा, “रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2017 में, सबसे अधिक संख्या में कन्या भ्रूण हत्याएं गुजरात में हुई थीं। क्या बेटी बचाओ, बेटी पढाओ योजना गुजरात में विफल रही है? जो एक तथाकथित मॉडल और विकसित राज्य है।"

Author नई दिल्ली | Updated: December 11, 2019 1:11 PM
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (file)

सरकार ने मंगलवार को गुजरात में कन्या भ्रूण हत्या की उच्च घटनाओं की चिंताओं को खारिज करने की मांग की। लेकिन इस मामले में कांग्रेस नेता ने आपत्ति जताई और पुरानी रिपोर्ट्स का हवाला दिया है। राज्यसभा में एक पूरक के बारे में पूछने पर, कांग्रेस सदस्य अमी याज्ञिक ने कहा, “रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2017 में, सबसे अधिक संख्या में कन्या भ्रूण हत्याएं गुजरात में हुई थीं। क्या बेटी बचाओ, बेटी पढाओ योजना गुजरात में विफल रही है? जो एक तथाकथित मॉडल और विकसित राज्य है।”

याज्ञिक द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा, “जहां तक ​बेटी बचाओ, बेटी पढाओ योजना का संबंध है, हम इसे 600 जिलों में बहुत प्रभावी ढंग से लागू कर रहे हैं। डेटा योजना के कार्यान्वयन के बारे में ऐसा कुछ नहीं दरसाता और गुजरात की राज्य सरकार की दक्षता के बारे में नहीं बोलता है।” उन्होंने आगे कहा कि यह बात ऑन रेकॉर्ड भी है कि गुजरात ने लगभग हर क्षेत्र में रिकॉर्ड बनाया है। ”

वहीं एक सदस्य ने आईवीएफ आईवीएफ को लेकर सदन में चिंता व्यक्त की। आईवीएफ आईवीएफ के माध्यम से गर्भ धारण करने से पहले बच्चे का लिंग चुना जा सकता है, इसपर हर्षवर्धन ने सदन को बताया, “आईवीएफ जैसी नई तकनीकों के माध्यम से भी गर्भधारण करने से पहले बच्चे के लिंग को चुना जा रहा है. लेकिन इसके लिए भी हम सावधानी बरत रहे हैं और निरीक्षण टीम को नियमित रूप से प्रशिक्षित कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि इस काम को निरीक्षण के माध्यम से ही किया जा सकता है।

कन्या भ्रूण हत्या और बाल लिंगानुपात में गिरावट के मामलों में अपराधियों को सजा मिलने की दर के बारे में उन्होंने कहा, “मैंने आपको नवीनतम आंकड़े दिए हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढाओ को 600 जिलों में लागू किया जा रहा है। कार्यान्वयन राज्य द्वारा किया जाता है और हम नियमित रूप से राज्यों के साथ इसे करते हैं।” केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दुर्भाग्य से, मैं इस बात से सहमत हूं कि इस मामले में न्यायालय से अपराधियों को सजा मिलने की दर काफी कम है। हम उन आकड़ों पर गौर कर रहे हैं कि अब तक कितनी एफआईआर दर्ज की गई हैं। कहीं यह संख्या अधिक तो नहीं।

इस मामले में शिरोमणी अकाली दल के नेता नरेश गुजराल ने कहा, ‘2015 से 2107 तक कन्या भ्रूण हत्या के राज्य-वार आकड़ों में स्वास्थ्य मंत्री का उत्तर काफी आश्चर्यजनक है। रिपोर्ट में बिहार, केरल, ओडिशा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में शून्य मामले दिए गए हैं। क्या इस बारे में सरकार गंभीर हैं?’ इसके जवाब में, वर्धन ने कहा, “हम नियमित रूप से राज्यों के साथ इस मामले का पालन करते हैं। एक तंत्र है जहां केंद्रीय पर्यवेक्षी बोर्ड, राज्यों के सलाहकार बोर्ड और जिला स्तर पर अधिकारी हैं। दुर्भाग्य से, यह समस्या थोड़ी मुश्किल है। ऐसा नहीं है कि हम राज्यों के सात मिलकर काम नहीं कर रहे हैं।”

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