बेंगलुरु पुलिस ने तीन जेल वार्डन और चार कैदियों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी परप्पना अग्रहारा स्थित बेंगलुरु सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन रखने, इसका इस्तेमाल करने और इनकी तस्करी से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में की गई है।
ये गिरफ्तारियां उस जांच के बाद हुई हैं, जो हासन के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना और प्रताप राय से फोन और सिम कार्ड जब्त करने के साथ शुरू हुई थी। जांच आगे बढ़ने पर जेल कर्मचारियों और वार्डरों की भूमिका भी सामने आई।
इन पर आरोप था कि वे पैसे लेकर कैदियों के बीच मोबाइल फोन पहुंचाने और उनकी अदला-बदली कराने में शामिल थे।
2024 से जेल की सलाखों के पीछे है रेवन्ना
प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ रेप और यौन उत्पीड़न के चार मामले दर्ज किए गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पोते और कर्नाटक के पूर्व मंत्री एच.डी. रेवन्ना के बेटे प्रज्वल रेवन्ना 31 मई, 2024 से जेल में बंद है।
कहां से शुरू हुआ मामला?
11 अगस्त को वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) पुलिस ने जेल के सिक्योरिटी डिवीजन की बैरक का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान प्रताप राय और प्रज्वल रेवन्ना की सेल से एक मोबाइल फोन, एक सिम कार्ड, एक चार्जर और एक नोटबुक बरामद हुई।
पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की और बाद में अलग-अलग तारीखों पर पांच लोगों को हिरासत में लिया। इन सभी पर जब्त किए गए फोन और सिम कार्ड खरीदने और उन्हें तस्करी करके जेल के अंदर पहुंचाने में मदद करने का आरोप है।
फोन और सिम कार्ड अंदर कैसे पहुंचे?
पूछताछ के दौरान, आरोपी नवीन कुमार ने बताया कि उसने फोन खरीदा था। यह फोन बाद में विचाराधीन कैदी मंजूनाथ को दिया गया। मंजूनाथ पर हत्या का मामला चल रहा है। नवीन कुमार ने यह फोन जेल वार्डन प्रकाश गावड़े को सौंपा था। इस बात का शक है कि गावड़े ने ने इसे बैरक तक पहुंचाने में मदद की थी।
पुलिस ने बताया कि बाहर करीब 10,000 रुपये की कीमत में मिलने वाले ऐसे फोन कैदियों के बीच 75,000 रुपये से 2 लाख रुपये तक में बेचे जाते हैं और यह पूरा लेन-देन जेल के बाहर होता है। कीमत में इस भारी अंतर की वजह से जांच करने वाले अफसरों को शक है कि इसमें तलाशी लेने वाले स्टाफ की भी मिलीभगत हो सकती है।
पुलिस के मुताबिक, विचाराधीन कैदी मोहम्मद तौसीफ के लिए सिम कार्ड का इंतजाम जेल के ही एक दूसरे कैदी के बेटे सादिक ने किया था। सादिक ने इसे बेंगलुरु में खरीदा था। यह सिम आंध्र प्रदेश में रजिस्टर्ड था और कर्नाटक में रोमिंग के दौरान इसका इस्तेमाल किया जा रहा था।
यह फोन तौसीफ को तब सौंपा गया, जब उसे बुखार की शिकायत के बाद इलाज के लिए विक्टोरिया अस्पताल ले जाया गया था।
तौसीफ ने मुंह में छिपा लिया था सिम कार्ड
जांच से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “सिम कार्ड को कार्बन पेपर में लपेटकर सेलोटेप से सील किया गया था और तौसीफ ने उसे अपने मुंह में छिपा लिया था। तलाशी के दौरान इस्तेमाल किया गया हैंडहेल्ड मेटल डिटेक्टर इसे पकड़ नहीं पाया, जिससे वह इसे जेल के अंदर ले जाने में कामयाब रहा।”
7,000 से 8,000 रुपये में पहुंचाए जाते हैं सिम कार्ड
पुलिस ने बताया कि जेल के अंदर ऐसे सिम कार्ड आमतौर पर 7,000 से 8,000 रुपये में एक-दूसरे के पास पहुंचाए जाते हैं। पुलिस के मुताबिक, सेल से बरामद किए गए फोन और सिम का इस्तेमाल प्रताप राय और प्रज्वल रेवन्ना कर रहे थे।
इसके अलावा, पुलिस ने पिछले एक साल में जेल के अंदर करीब 20 मोबाइल फोन पहुंचाने में दो जेल वार्डर की भूमिका की भी जांच की। ये आरोप दो ऐसे मामलों से सामने आए, जिनमें जांचकर्ताओं ने सिम और टेक्निकल डेटा का इस्तेमाल करके फोन का पता लगाया था।
वार्डर श्रीनिवास नाइक ने क्या बताया?
पहले मामले में, 13 जनवरी को सुपरिटेंडेंट की शिकायत के बाद चार मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड और एक चार्जर बरामद किया गया। पुलिस ने सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR) के जरिये दो एयरटेल सिम कार्ड का पता लगाया, जिनसे दो फोन वार्डर श्रीनिवास नाइक से जुड़े हुए मिले। नाइक को 28 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। नाइक ने पुलिस को बताया कि उसने ‘राहुल’ नाम का इस्तेमाल कर फोन खरीदे थे और कैदियों को सप्लाई करने के लिए कुल 12 फोन हासिल किए थे।
दूसरे मामले में, 20 अगस्त को एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किया गया था। बिक्री के रिकॉर्ड के जरिये पता चला कि यह फोन चीफ वार्डर विजय कुमार से जुड़ा है। विजय कुमार को 28 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।
पुलिस ने कहा कि तकनीकी सबूतों और पूछताछ से पता चलता है कि फोन कैदी भरत, उर्फ KTM भरत के कहने पर खरीदा गया था। आरोप है कि विजय कुमार ने इसे जेल के अंदर पहुंचाने में मदद की।
किन लोगों को किया गया गिरफ्तार?
नवीन कुमार, मंजूनाथ, सादिक और मोहम्मद तौसीफ को 24 अगस्त को कोर्ट में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वार्डर गावड़े को 24 अगस्त को गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया, जबकि वार्डर श्रीनिवास नाइक और चीफ वार्डर विजय कुमार को 29 अगस्त को कोर्ट में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
प्रताप राय और प्रज्वल रेवन्ना को पूछताछ के लिए तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया और 10 सितंबर को वापस जेल भेज दिया गया।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या जेल के अन्य कर्मचारी या कैदी इसमें शामिल थे। इसके अलावा उन कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जो जेल में तलाशी का काम करते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रतिबंधित सामान को जेल के अंदर पहुंचाने में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं।
जेल विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल की शुरुआत से कर्नाटक भर की जेलों से लगभग 300 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।
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पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा के पोते प्रज्वल रेवन्ना को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। प्रज्वल रेवन्ना पर यौन शोषण को लेकर चार मामले दर्ज किए गए थे। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
