डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने हाल ही में खत्म हुए विधानसभा चुनावों को टीम दिल्ली और टीम तमिलनाडु के बीच की लड़ाई बताया है। वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि उनका मुकाबला बाहरी लोगों से है। वे बंगाली पहचान और भाषा की रक्षा के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।
दक्षिण और पूर्व से विपक्ष के दो सबसे बड़े नेता, स्टालिन और बनर्जी, दोनों ने भारतीय जनता पार्टी, केंद्र और उसके तंत्र के खिलाफ मोर्चाबंदी कर ली है। इसे दिल्ली में केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के साथ एक टकराव का माहौल बन गया है।
इसी कारण 4 मई का दिन दो शक्तिशाली क्षेत्रीय दलों के लिए बेहद अहम है। इनमें से एक लगातार दूसरी बार और दूसरा चौथी बार सत्ता में आना चाहता है। उनका चुनावी भविष्य काफी हद तक कमजोर हो चुके इंडिया ब्लॉक और बीजेपी विरोधी खेमे से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनकी जीत या हार विपक्ष के भीतर उथल-पुथल मचा सकती है। इसका अनौपचारिक नेतृत्व अब कांग्रेस कर रही है, जो संसद में ब्लॉक की सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है। सोमवार का दिन कांग्रेस के लिए भी अहम है क्योंकि इस चुनाव परिणाम से राष्ट्रीय राजनीति में आगे चलकर विपक्ष की व्यापक रणनीति को आकार मिलने की उम्मीद है।
एग्जिट पोल में केरल में कांग्रेस के लिए बढ़त और असम में करारी हार
लगभग सभी एग्जिट पोल ने केरल में कांग्रेस के लिए बढ़त और असम में करारी हार का अनुमान लगाया है। ये दोनों राज्य ऐसे हैं जहां कांग्रेस मौजूदा सरकार के लिए मुख्य चुनौती थी। 2014 से अब तक कांग्रेस ने सिर्फ आठ विधानसभा चुनाव अपने दम पर जीते हैं और उसे एक जीत की सख्त जरूरत है।
हालांकि, विपक्ष का ध्यान केरल या असम पर नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु पर है , जहां दो मुख्यमंत्रियों ने केंद्र के सामने चुनौतियां खड़ी की हैं। वे संघवाद के उल्लंघन से लेकर वित्तीय स्वायत्तता तक के ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं, जो आज की राजनीति में केंद्र-राज्य के बीच सत्ता संघर्ष को लगातार परिभाषित कर रहे हैं और देश भर में चुनावी चर्चा का स्वरूप तय कर रहे हैं।
बनर्जी, स्टालिन और केरल के पिनाराई विजयन ऐसे गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री हैं, जो अक्सर भाजपा की केंद्र सरकार के फैसलों का विरोध करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि ये फैसले राज्यों को सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। अगर ये तीनों चुनाव हार जाते हैं, तो देश की राजनीति में विपक्ष की मजबूत आवाज काफी कमजोर हो जाएगी। लेकिन अगर ये जीत जाते हैं, तो राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष की ताकत बढ़ सकती है।
एनसीपी (SP) प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (UBT) के उद्धव ठाकरे, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं को अपने-अपने राज्यों में चुनावी हार का सामना करना पड़ा है, ऐसे में बनर्जी और स्टालिन इंडिया ब्लॉक के भीतर कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण संतुलन बने हुए हैं।
बंगाल में बीजेपी की जीत विपक्ष के लिए और भी सीमित जगह छोड़ देगी
2014 से बीजेपी का विस्तार असम, त्रिपुरा, हरियाणा और ओडिशा सहित नए क्षेत्रों में हुआ है। यहां तक कि तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस भी चाहेगी कि बंगाल बीजेपी की पहुंच से बाहर रहे, ताकि सत्तारूढ़ दल के विभिन्न राजनीतिक क्षेत्रों में बढ़ते प्रभाव के बीच विपक्ष के एक महत्वपूर्ण गढ़ को सुरक्षित रखा जा सके। संक्षेप में, बंगाल में बीजेपी की जीत विपक्ष के लिए और भी सीमित जगह छोड़ देगी। पार्टी देश भर में 16 मुख्यमंत्रियों सहित 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रत्यक्ष या गठबंधन में सत्ता में है।
ममता बनर्जी की लगातार चौथी जीत विपक्षी खेमे में नेतृत्व को लेकर उथल-पुथल मचा सकती है। बनर्जी के कांग्रेस से संबंध अच्छे नहीं रहे हैं। पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा किए गए व्यक्तिगत हमलों के बाद यह तनाव और गहरा गया। उनकी टिप्पणियां टीएमसी और तेजस्वी, जेएमएम के हेमंत सोरेन और केजरीवाल सहित कई नेताओं को पसंद नहीं आईं।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टीएमसी को समर्थन दिया। यह विपक्षी खेमे में महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलावों से पहले इंडिया ब्लॉक के अंदर बढ़ती दरारों को दिखाता है।
तेजस्वी और केजरीवाल ने स्टालिन के लिए किया प्रचार
कांग्रेस और डीएमके के बीच पहले जो संबंध सौहार्दपूर्ण थे, अब उनमें भी तनाव आ गया है। तेजस्वी और केजरीवाल ने स्टालिन के साथ चुनाव प्रचार किया, लेकिन मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के साथ मंच साझा नहीं किया। हालांकि, केरल और तमिलनाडु में बीजेपी एक मजबूत पार्टी नहीं है, फिर भी विपक्ष इन राज्यों में उसके प्रदर्शन पर कड़ी नजर रखेगा। बंगाल और तमिलनाडु के नतीजों को लेकर एग्जिट पोल के अनुमान काफी अलग-अलग हैं। कुछ ने बंगाल में बीजेपी की जीत की भविष्यवाणी की है, जबकि अन्य ने बनर्जी के चौथे कार्यकाल का अनुमान लगाया है।
स्टालिन के सामने भी एक अहम परीक्षा है। जो जीत पहले आसान लग रही थी, एक्टर विजय की टीवीके पार्टी के मैदान में उतरने से उसमें मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। कुल मिलाकर, विपक्ष के लिए चुनौतियां अभी भी बहुत बड़ी हैं, हालांकि केरल और बंगाल में एक-दूसरे के खिलाफ चल रही ये प्रतिस्पर्धाएं एक राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा हैं जो क्षेत्रीय राजनीति के बदलते स्वरूप और आने वाले सालों में राष्ट्रीय विपक्ष के समीकरण पर इसके प्रभाव को रेखांकित करती हैं।
विधानसभा चुनाव नतीजों के लिए मतगणना की तैयारियां पूरी
सोमवार 4 मई को देश के 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। इनमें असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और तमिलनाडु शामिल हैं। सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी, उसके बाद रुझान सामने आने लगेंगे। पश्चिम बंगाल में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, असम में बीजेपी के हिमंता बिस्वा सरमा, तमिलनाडु में एमके स्टालिन, केरल में लेफ्ट के पिनराई विजयन और पुडुचेरी में एन रंगास्वामी की राजनीतिक भविष्य दांव पर है। पढ़ें लाइव ब्लॉग…
