President Protocol Row: तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा ताकि वे उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी पहलों के बारे में जानकारी दे सकें। हालांकि राष्ट्रपति भवन ने समय की कमी का हवाला देते हुए उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। इस बात की जानाकारी सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दी है।
पिछले हफ्ते सिलीगुड़ी में आदिवासी समुदायों के कल्याण पर आयोजित एक सम्मेलन में प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन को लेकर राष्ट्रपति और बंगाल सरकार के बीच हुए टकराव के बाद इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया गया। टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने 9 मार्च को राष्ट्रपति मुर्मू को पत्र लिखकर बताया कि तृणमूल कांग्रेस का एक डेलीगेशन, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य और पश्चिम बंगाल के मंत्री शामिल हैं, उनसे मिलना चाहता है ताकि उन्हें राज्य सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों के समावेशी विकास के लिए की गई कई पहलों और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के समुदायों के उत्थान और जीवन स्तर में सुधार के लिए उठाए गए विशेष उपायों के बारे में जानकारी दी जा सके।
टीएमसी ने लिखा था पत्र
पत्र में टीएमसी नेता ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया था कि वे इसी हफ्ते 12-15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को उनसे मिलने के लिए समय दें। हालांकि, राष्ट्रपति भवन ने टीएमसी को एक पत्र भेजकर सूचित किया कि उनके अनुरोध पर विचार किया गया था, लेकिन समय की कमी के कारण इसे स्वीकार नहीं किया जा सका। सूत्रों ने टॉइम्स ऑफ इंडिया को आगे बताया कि टीएमसी ने अगले हफ्ते के लिए समय मांगते हुए राष्ट्रपति भवन को फिर से पत्र लिखा है।
क्या था पूरा विवाद?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बागडोगरा एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने वाले दल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या उनके मंत्रिमंडल के किसी भी मंत्री की अनुपस्थिति पर सवाल उठाया था। उन्होंने कार्यक्रम स्थल में बदलाव पर भी तीखी टिप्पणी की और सुझाव दिया कि राज्य सरकार सक्रिय रूप से आदिवासियों को केंद्र द्वारा दी जा रही कल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित कर रही है। उन्होंने कार्यक्रम में कहा, “क्या यहां संथाल और आदिवासी समुदायों का विकास हो रहा है? मुझे नहीं लगता। क्या केंद्र सरकार की सुविधाएं आप तक पहुंच रही हैं? मुझे नहीं लगता। मुझे लगता है कि कुछ लोगों को यहां आने से रोका जा रहा है। शायद कुछ लोग संथालों की प्रगति नहीं देखना चाहते।”
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने इसे पूरी तरह से राजनीतिक बताया। टीएमसी सुप्रीमो ने कहा, “मैं राष्ट्रपति से विनम्रतापूर्वक निवेदन करती हूं कि वे ऐसे बयान न दें जो आपके पद की छवि खराब करें। आपने आज एक समुदाय के बारे में बात की। आपने बंगाल के बाकी समुदायों के बारे में बात नहीं की। चुनाव से पहले बीजेपी की सलाह पर राजनीति न करें।”
प्रोटोकॉल को लेकर क्या है नियम?
असल में यह जरूरी नहीं है कि राष्ट्रपति के आगमन पर मुख्यमंत्री स्वयं ही उनका स्वागत करें। हालांकि प्रोटोकॉल यह जरूर कहता है कि यदि मुख्यमंत्री उपस्थित न हों, तो उन्हें अपनी अनुपस्थिति में किसी मंत्री को यह जिम्मेदारी देनी चाहिए कि वह राष्ट्रपति का स्वागत और अभिवादन करे। पढ़ें पूरी खबर…
