पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनावों में बीजेपी और टीएमसी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बंगाल की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता प्रेसिडेंसी डिवीजन से होकर गुजरता है। इस बार के चुनाव में अगर टीएमसी तो सत्ता में आना है तो उसे प्रेसीडेंसी डिवीज़न इलाके के किले को बचाना है, जिसमें 111 विधानसभा सीटें आती हैं। विपक्षी बीजेपी राज्य में अपनी पहली सरकार बनाने की कोशिश कर रही है।
प्रेसीडेंसी डिवीज़न में कितने जिले आते हैं?
प्रेसीडेंसी डिवीज़न बंगाल के पांच ऐसे प्रशासनिक इलाकों में से एक है और इसमें कोलकाता नॉर्थ, कोलकाता साउथ, हावड़ा, नादिया, नॉर्थ 24 परगना और साउथ 24 परगना के चुनावी जिले आते हैं। यहां टीएमसी ने 2011 में पहली बार सत्ता में आने के बाद से अपनी मौजूदगी मजबूत की है। प्रेसीडेंसी डिवीज़न में हुगली और पूर्वी बर्धमान जिलों के साथ दूसरे फेज़ में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी।
कभी सीपीएम का गढ़ था प्रेसीडेंसी डिवीज़न
कोलकाता नॉर्थ और साउथ में मिलाकर 14 विधानसभा सीटें हैं। हावड़ा में 16 सीटें, नादिया में 17 सीटें, नॉर्थ 24 परगना में 33 सीटें और साउथ 24 परगना में 31 सीटें हैं। 2006 के विधानसभा चुनावों में CPIM के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट ने इन 111 सीटों में से 72 सीटें जीती थीं। लेकिन 2011 में टीएमसी और कांग्रेस ने मिलकर इन इलाकों में 89 सीटें जीतकर पासा पलट दिया। 2016 में, TMC ने 91 सीटें जीतकर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली।
2021 में बीजेपी के ज़ोर लगाने के बावजूद खासकर 2019 के लोकसभा चुनावों में अपने मज़बूत प्रदर्शन के बाद टीएमसी ने 96 सीटों के साथ प्रेसिडेंसी डिवीज़न में अपना बेस और मज़बूत किया। हालांकि बीजेपी 2021 में 77 सीटें जीतकर राज्य की मुख्य विपक्ष बन गई, लेकिन वह प्रेसिडेंसी डिवीज़न में सिर्फ़ 14 सीटें ही जीत सकी। इस इलाके की बाकी सीट लेफ्ट की सहयोगी इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) ने जीती।
2021 में बीजेपी ने उत्तर बंगाल में अच्छा प्रदर्शन किया, वह दक्षिण बंगाल में लड़खड़ा गई और प्रेसिडेंसी डिवीज़न में उसकी पहुंच रुक गई। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इन ज़िलों में अपना वोट शेयर बढ़ाया और 21 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाई, जबकि टीएमसी 90 सीटों पर आगे थी। उस साल BJP ने बंगाल में 12 लोकसभा सीटें जीती थीं, जो 2019 के चुनावों में 18 थीं।
पांच मुख्यमंत्रियों ने प्रेसीडेंसी डिवीज़न से लड़ा है चुनाव
प्रेसीडेंसी डिवीज़न की अहमियत इस बात से पता चलती है कि इस इलाके से पांच मुख्यमंत्रियों ने चुनाव लड़ा है। CPIM के ज्योति बसु ने शुरू में नॉर्थ 24 परगना के बारानगर से चुनाव लड़ा था, लेकिन बाद में वे सतगछिया चले गए, जहां से वे लगातार पांच बार CM बने। CPIM के बुद्धदेव भट्टाचार्य ने पहले कोलकाता के काशीपुर-बेलगछिया से चुनाव लड़ा और बाद में जादवपुर चले गए, जहां से वे लगातार छह बार जीते और अपने दो टर्म में सीएम रहे।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2011, 2016 और 2021 उपचुनाव में कोलकाता के भवानीपुर से जीत हासिल की। प्रेसिडेंसी डिवीज़न, खासकर हावड़ा, नॉर्थ और साउथ 24 परगना ज़िलों में मुस्लिमों की अच्छी-खासी आबादी है, जिसे टीएमसी का सबसे मज़बूत वोटर बेस माना जाता है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “ये 111 सीटें हमारी पक्की हैं। इतने सालों में हमने इन इलाकों और बंगाल के दूसरे इलाकों में अपनी जगह मजबूत की है। यह हमारे सबसे मज़बूत बेस में से एक है। बीजेपी बंगाल में हमें हराने के बारे में कैसे सोच सकती है?”
बीजेपी की क्या है कोशिश?
इस बीच बीजेपी टीएमसी के गढ़ में सेंध लगाने की पूरी कोशिश कर रही है। उसने नॉर्थ 24 परगना और नादिया में मतुआ-बहुल सीटों पर कुछ सफलता हासिल की है। 2021 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने प्रेसिडेंसी डिवीज़न में 14 सीटें जीती थीं, जिनमें से 9 नादिया में थीं, जहां टीएमसी ने 8 सीटें जीती थीं। प्रेसिडेंसी डिवीज़न में बीजेपी की बाकी सीटें नॉर्थ 24 परगना में थीं।
लेकिन प्रेसिडेंसी डिवीज़न के बाकी ज़िलों में बीजेपी 2021 में कोई भी सीट नहीं जीत पाई। 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP ने नादिया के 11 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल की, जबकि टीएमसी सिर्फ़ 6 में आगे रही। नॉर्थ 24 परगना में भी बीजेपी ने अपना वोट शेयर बढ़ाया और 8 क्षेत्रों में बढ़त हासिल की। हालांकि टीएमसी 25 क्षेत्रों में आगे रही। कोलकाता नॉर्थ में बीजेपी ने 2 क्षेत्रों में बढ़त हासिल की। हालांकि साउथ 24 परगना, हावड़ा और कोलकाता साउथ ज़िलों में बीजेपी कोई भी सीट नहीं जीत पाई।
इस इलाके में पार्टी की मुश्किलों के बारे में बताते हुए बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “हम प्रेसिडेंसी डिवीज़न में टीएमसी के मुकाबले संगठन बहुत कमज़ोर हैं। टीएमसी ने इन इलाकों में अपनी मशीनरी का इस्तेमाल किया और धांधली और गलत पोलिंग की। लेकिन इस बार, वे ऐसा नहीं कर पाएंगे। अगर इलेक्शन कमीशन अपना काम ठीक से करे, तो लोग इस डिवीज़न में हैरान करने वाले नतीजे देंगे। हम न सिर्फ़ साउथ 24 परगना और हावड़ा में अपना अकाउंट खोलेंगे, बल्कि इनमें से लगभग आधी सीटें भी जीतेंगे।”
बीजेपी के राज्यसभा सांसद राहुल सिन्हा ने कहा, “इस बार का चुनाव बिल्कुल अलग है। आप नतीजे देखकर हैरान रह जाएंगे। जिसे आप अभी TMC का गढ़ मानते हैं, चुनाव के बाद, आप देखेंगे कि इन इलाकों का क्या हाल होगा। लोग बदलाव के लिए वोट करेंगे। नतीजे सभी कैलकुलेशन को गलत साबित कर देंगे।”
टीएमसी का पलड़ा भारी
हालांकि टीएमसी को अब भी लगता है कि प्रेसिडेंसी डिवीज़न में उसका पलड़ा भारी है। टीएमसी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की वजह से हम न सिर्फ अपने गढ़ की रक्षा करेंगे बल्कि अपनी संख्या भी बढ़ाएंगे क्योंकि इन इलाकों में मतुआ लोगों ने पिछले चुनावों में बीजेपी को वोट दिया था, लेकिन एसआईआर की वजह से उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।”
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