तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं के बीच हलचल मची हुई है। करीब 20 सांसद पार्टी से बगावत कर चुके हैं। इस बीच बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को संकेत दिया कि दो और सांसद (अभिनेत्री से नेता बनीं सायोनी घोष और वरिष्ठ नेता माला रॉय) उनके खेमे में शामिल हो गई हैं। हालांकि अभी तक सायोनी घोष और माला रॉय ने इसको लेकर पुष्टि नहीं की है।

ममता और अभिषेक की करीबी हैं सायोनी

33 साल की सायोनी घोष टीएमसी चीफ ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी दोनों की करीबी हैं। वहीं 68 वर्षीय माला रॉय लोकसभा में दस्तीदार के बागी ग्रुप में शामिल हो गई हैं। इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस द्वारा पूछे जाने पर काकोली दस्तीदार ने एक टेक्स्ट मैसेज में अजीब तरह से जवाब दिया, “हाँ।”

हालांकि ममता बनर्जी के साथ जुड़े एक सीनियर टीएमसी नेता ने हैरानी जताई। ऋतब्रत बनर्जी के विधानसभा में 80 नए चुने गए TMC विधायकों में से 60 से ज़्यादा के साथ अलग होने का ज़िक्र करते हुए नेता ने कहा, “पार्टी में विधायकों की बगावत के बाद भी ममता बनर्जी ने सायोनी घोष को TMC की यूथ विंग का अध्यक्ष बनाए रखा। माला रॉय कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) की चेयरपर्सन थीं। उन्हें ममता ने पार्टी की महिला विंग का अध्यक्ष बनाया था। अगर ये नेता बागी ग्रुप में शामिल हो जाते हैं तो यह हैरानी की बात होगी।”

टीएमसी के 20 सांसद हो चुके हैं बागी

सोमवार को काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने स्पीकर ओम बिरला से कहा कि वे टीएमसी पार्लियामेंट्री पार्टी से रिश्ता तोड़ने के बाद बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA में शामिल होना चाहते हैं। हालांकि अभी यह साफ़ नहीं है कि 20 सांसदों की लिस्ट में कौन-कौन हैं।

2 राज्यसभा सांसदों ने दिया इस्तीफा

TMC के 13 राज्यसभा सांसदों में से दो (सुखेंदु शेखर रे और सुष्मिता देव) ने आधिकारिक इस्तीफ़ा दे दिया है। इस साल विधानसभा चुनाव से पहले एक्टर से नेता बनीं सायोनी घोष ने अपने जोशीले भाषणों कविताओं और बीजेपी पर तीखे हमलों से ज़मीनी और ऑनलाइन, दोनों जगह लोकप्रियता हासिल की।

सायोनी घोष ने 2021 से पहले खुद को ‘फुल-टाइम एक्टर’ और बाद में ‘फुल-टाइम पॉलिटिशियन’ बताया था। उन्हें राजकहानी (2015), ब्योमकेश ओ चिड़ियाखाना (2016), और अस्तेय लेडीज़ (2019) जैसी फ़िल्मों में अपनी एक्टिंग के लिए बहुत तारीफ मिली है। अपने एक्टिंग करियर के पीक पर भी उन्होंने राजनीतिक विषय पर पब्लिक डिस्कशन में हिस्सा लिया था।

विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं सायोनी

2021 के विधानसभा चुनाव में सायोनी ने आसनसोल साउथ सीट से टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल से हार गईं। लेकिन TMC नेतृत्व ने उन पर भरोसा किया और उन्हें अभिषेक बनर्जी की जगह टीएमसी की यूथ विंग का अध्यक्ष बना दिया। सायोनी घोष शायद ही कोई कम बोलने वाली नेता हैं। उन्होंने अपनी राय ज़ोरदार तरीके से रखने का फैसला किया और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखने और पार्टी लाइन को असरदार तरीके से बताने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया। 2024 के लोकसभा चुनावों में सायोनी घोष को कोलकाता की हाई-प्रोफाइल जादवपुर सीट से मैदान में उतारा गया। ये वही सीट है जिसने 1984 में ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। सायोनी घोष जीतीं और लोकसभा में एंट्री की।

अभी-अभी खत्म हुए विधानसभा चुनावों में सायोनी TMC की स्टार कैंपेनर बनकर उभरीं और पूरे राज्य में पार्टी के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार किया। सयोनी घोष के भाषणों पर गृह मंत्री अमित शाह के बड़े नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

कौन हैं माला रॉय?

वहीं माला रॉय ने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। वह कांग्रेस की शुरुआती नेताओं में से एक थीं, जो 1998 में ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस बनाने के समय उनके साथ जुड़ गई थीं। कभी ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली माला रॉय 2005 में पार्टी छोड़कर कांग्रेस में वापस आने पर उनकी कड़ी आलोचना करने लगीं। दस साल बाद वह TMC में वापस आ गईं और कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की चेयरपर्सन बन गईं। 2019 के लोकसभा चुनाव में माला रॉय को कोलकाता दक्षिण सीट से TMC उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा गया और उन्होंने जीत हासिल की।

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राजनीति में कहा जाता है कि वक्त बहुत ताकतवर होता है, जब आपका वक्त अच्छा होता है तो नेता, भीड़, कार्यकर्ता आपके साथ होते हैं लेकिन जब वक्त कमजोर होता है तो आप अकेले होने लगते हैं। ऐसा ही कुछ पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी की प्रमुख ममता बनर्जी के साथ हो रहा है। पढ़िए पूरी खबर…