पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति और ज्यादा गरमा गई है। पिछले एक हफ्ते में ऐसी घटनाएं हुईं जिनसे राज्यपाल और यहां तक कि राष्ट्रपति के पद भी सियासी बहस के केंद्र में आ गए। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता जा रहा है।

सबसे पहले 5 मार्च को उस समय बड़ा घटनाक्रम हुआ जब बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने अचानक इस्तीफा दे दिया। यह फैसला इतना अचानक था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी चौंक गईं। इसके बाद तमिलनाडु के राज्यपाल और पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आर.एन.रवि को बंगाल का नया राज्यपाल बनाया गया।

राज्यपाल के इस्तीफे के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें इसके कारणों की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से राज्यपाल पर दबाव डाला गया हो सकता है। बाद में एक धरना कार्यक्रम में ममता बनर्जी ने आर.एन. रवि को “बीजेपी का कार्यकर्ता” तक बता दिया और कहा कि बोस को मजबूर होकर पद छोड़ना पड़ा।

इसी बीच एक और विवाद तब खड़ा हो गया जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में एक संथाली सम्मेलन में शामिल हुईं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उनके कार्यक्रम में मुख्यमंत्री या राज्य सरकार का कोई मंत्री मौजूद नहीं था और कार्यक्रम स्थल भी बदला गया था। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ आदिवासी लोगों को कार्यक्रम में आने से रोका गया। राष्ट्रपति ने कहा, “मैं भी बंगाल की बेटी हूं और ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन हैं। शायद वह मुझसे नाराज हों, लेकिन मैं उन्हें शुभकामनाएं देती हूं।”

पूरे विवाद को टीएमसी ने राजनीतिक साजिश बताया

राष्ट्रपति के इस बयान के बाद राजनीति और गरमा गई। बीजेपी नेताओं, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं, ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने राष्ट्रपति पद का अपमान किया है। दूसरी ओर टीएमसी ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि चुनाव के समय राष्ट्रपति के पद को राजनीति में घसीटा जा रहा है।

यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब टीएमसी चुनाव आयोग से भी नाराज है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष संशोधन के कारण करीब 60 लाख लोगों के नाम अनिश्चित स्थिति में हैं। इस मुद्दे पर वाम दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय धर्मनिरपेक्ष मोर्चा (Indian Secular Front) ने मांग की है कि विधानसभा चुनाव तब कराए जाएं जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाए। बताया जा रहा है कि अब तक करीब 6.5 लाख मामलों का ही निपटारा हुआ है और पूरी प्रक्रिया खत्म होने में कम से कम एक महीना और लग सकता है।

इस बीच बीजेपी सांसद राजू बिस्टा (Raju Bista) ने बयान दिया कि राज्य में निष्पक्ष चुनाव तभी संभव हैं जब राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। इस पर टीएमसी ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीजेपी किसी भी तरह से बंगाल की सत्ता हासिल करना चाहती है।

हालांकि राजनीतिक बयानबाजी के बावजूद फिलहाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना कम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए कानून-व्यवस्था पूरी तरह टूटने का ठोस आधार दिखाना पड़ता है, जबकि चुनाव भी नजदीक हैं। फिलहाल बंगाल की राजनीति में माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है और हर छोटी घटना भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है। खासकर उत्तर बंगाल में आदिवासी वोट बैंक को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला और तेज होता दिख रहा है।

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की हालिया पश्चिम बंगाल यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच टकराव और तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने पीएम मोदी की एक पुरानी तस्वीर शेयर की है। इसमें प्रधानमंत्री बैठे हुए हैं और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू खड़ी हुई हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक