Bengal Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले SIR के तहत वोटर लिस्ट से नाम कटने वाले उन मतदाताओं को बड़ा झटका लगा है, जिनकी अपीलें ट्रिब्यूनलों के सामने पेंडिंग हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिनका नाम वोटर लिस्ट हट गया है, वो विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बंगाल चुनाव में एसआईआर विवाद को लेकर राजनीतिक टकराव काफी बढ़ गया है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कल्याण बंदोपाध्याय ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग कोर्ट से उम्मीद रखते हैं और यह धारणा बन रही है कि सभी मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि ऐसा नहीं है।
पूरी व्यवस्था बिगड़ जाएगी – CJI
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के मामले में कहा है कि जब तक संबंधित अपीलों पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक ऐसे व्यक्तियों को वोट देने की इजाजत देना कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ होगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। इस पर सीजेआई ने कहा कि अगर ऐसे लोगों को वोट देने की अनुमति दी जाती है, तो यह व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी।
लाखों लोग नहीं डाल पाएंगे वोट
बता दें कि एसआईआर के तहत लंबित मामले से जुड़ी सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है कि उसकी वजह से राज्य में करीब 34 लाख वोटर विधानसभा चुनाव में मतदान करने से वंचित हो सकते हैं। यह पूरा मामला राज्य में चल रही वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) से जुड़ा है। जिन लोगों के नाम लिस्ट से हटाए गए, उन्होंने इसके खिलाफ अपील की है।
NIA ने पेश की मालदा की घटना पर रिपोर्ट
बता दें कि इसी सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मालदा जिले की घटना पर स्टेटस रिपोर्ट पेश की। जहां 1 अप्रैल को वोटर लिस्ट से नाम हटने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने कई न्यायिक अधिकारियों का घंटों घेराव किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने NIA से यह भी पूछा कि गिरफ्तार लोगों का कोई राजनीतिक संबंध है या नहीं।
कल्याण बनर्जी ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में TMC नेता कल्याण बनर्जी ने कहा कि कम से कम 16 लाख अपीलें दायर की गई हैं और उन्हें इस महीने के आखिर में होने वाले दो चरणों वाले विधानसभा चुनाव में वोट डालने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके जवाब में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘यह तो बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है। अगर हम इसकी अनुमति देते हें, तो इसमें शामिल लोगों के वोट देने के अधिकार को निलंबित करना पड़ेगा।’
चुनाव आयोग का क्या रहा रुख?
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि SIR प्रक्रिया में 34 लाख अपीलें हैं। उन्होंने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस द्वारा सौंपी गई रिपोर्टों में यह डेटा साफ तौर पर बताया गया है। चुनाव आयोग ने बंगाल की मतदाता सूची को पहले ही फ्रीज कर दिया है और चुनाव से पहले कोई भी नया नाम इसमें शामिल नहीं किया जा सकता, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में कोई निर्देश न दे, जो आज नहीं हुआ।
यह भी पढ़ें: बंगाल चुनाव 2026: ‘बीजेपी से पैसे मत लेना’, ममता बनर्जी ने क्यों दी वोटरों को चेतावनी? जानें 3 बड़े कारण
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी चुनावों के दौरान कभी झूठे वादे नहीं करती। उन्होंने यह तंज भारतीय जनता पार्टी पर कसा था। बीजेपी ने हाल ही में अपने घोषणापत्र में ऐलान किया था कि अगर उसकी सरकार बनी, तो वह ‘अन्नपूर्णा भंडार’ नाम की एक योजना के तहत बंगाल की महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये देगी। इस योजना को बड़े पैमाने पर बनर्जी की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की काट के तौर पर देखा जा रहा है। पढ़िए पूरी खबर…
