Bengal Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार सत्ताधारी पार्टी और बीजेपी के बीच कांटे का मुकाबला माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ यानी कोलकाता में सेंधमारी के लिए बीजेपी इस बार पूरी ताकत झोंक रही है। खास बात यह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कोलकाता की 11 विधानसभा सीटों इस बार चुनाव आयोग द्वारा कराए गया एसआईआर एक अहम फैक्टर हो सकता है।

आंकड़ों की बात करें तो कोलकाता की सभी 11 विधानसभा सीटों में वोटर लिस्ट से हटाए गए मतदाताओं की संख्या उस अंतर से काफी ज्यादा है, जो कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान इन सीटों पर बीजेपी और टीएमसी के बीच था। मतलब ये जितने अंतर से बीजेपी और टीएमसी यहां के विधानसभा क्षेत्रों में आगे थीं, उससे ज्यादा नाम तो इस बार एसआईआर में कट गए हैं।

TMC के कई गढ़ असुरक्षित

बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी का मुख्य वोट बैंक, मुस्लिम, महिला और गरीब वर्ग से आता है लेकिन इस चुनाव में SIR की वजह से टीएमसी के गढ़ों पर राजनीतिक खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि एसआईआर के तहत 91 लाख से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इन्हीं में से एक कोलकाता है, जहां की 11 सीटें टीएमसी के लिहाज से काफी अहम हैं।

कोलकाता के अंतर्गत आने वाली विधानसभा की 11 सीटों की बात करें तो सबसे हाईप्रोफाइल सीट नंदीग्राम है। इसके अलावा अन्य सीटों में कोलकाता पोर्ट, रासबिहारी, बालीगंज, चौरंगी, बेलियाघाटा, जोड़ासांको, श्यामपुकुर, माणिकतला, काशीपुर-बेलगछिया और एंटाली शामिल हैं।

SIR में खूब कटे नाम

2021 के विधानसभा चुनाव को छोड़ भी दें, तो 2024 के लोकसभा चुनाव में इन 11 सीटों में से 9 पर टीएमसी और 2 पर बीजेपी आगे थी। टेलीग्राफ अखबार द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट बताती है कि कोलकाता के ही अंतर्गत आने वाली चौरंगी सीट पर 80,000 से ज्यादा नाम कट गए हैं।

विधानसभा सीटें2024 में बढ़तSIR में कटे नाम
श्यामपुकुर1,59944,693
कोलकाता पोर्ट42,89377,125
बेलेघाटा46,11266,019
जोरासांको7,40176,524
भवानीपुर8,29748,680

इसके अलावा तीन अन्य सीटों की बात करें तो एक पर 60,000 से अधिक और अन्य दो सीटों पर करीब 50,000 से ज्यादा नाम कट गए हैं। अन्य चार सीटों पर भी 40,000 से ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। सबसे कम नाम कटने वाली सीट की बात करें तो वो मणिकतला है। हालांकि इस सीट पर भी 42,603 वोटर्स के नाम काटे गए हैं।

भवानीपुर में भी कितने नाम कटे?

साल 2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ यानी भबानीपुर सीट पर टीएमसी महज 8,297 वोटों से आगे थी। एसआईआर के तहत इस सीट की वोटर लिस्ट से 48,680 नाम हटा दिए गए हैं। खास बात यह है कि ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सुवेंदु अधिकारी को इसी सीट से चुनावी मैदान में उतार दिया है।

TMC की बढ़त से ज्यादा कटे SIR में नाम

टीएमसी ने कोलकाता पोर्ट, राशबिहारी, बालीगंज, चौरंगी, एंटली, बेलेघाटा, मानिकतला और काशीपुर-बेलगछिया में बढ़त बनाई थी। इनमें से चार सीटों पर तृणमूल की बढ़त 10,000 से भी कम थी। इनमें से राशबेहारी पर 1,691, भाबानीपुर 8,297, मानिकतला 3,575, और काशीपुर-बेलगाछिया पर टीएमसी की लीड 7,268 वोटों की थी। इसके अलावा चौरंगी सीट पर टीएमसी की बढ़त14,645 वोट की थी।

TMC के लिए बड़ी चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एसआईआर के बाद ये पांचों ही सीटें टीएमसी के लिए असुरक्षित हो गई है। खास बात यह है कि हटाए गए मतदाताओं में से अधिकांश मुस्लिम वर्ग हैं, जिन्होंने पिछले कुछ चुनावों में मुख्य रूप से तृणमूल को ही वोट दिया था। हालांकि अन्य चार सीटों पर भी टीएमसी सुरक्षित नहीं है, जहां उसने 25,000 से अधिक वोटों की बढ़त हासिल की थी क्योंकि इन सीटों पर भी वोटर्स के नाम 40 हजार से ज्यादा हटे हैं।

कोलकाता पोर्ट पर टीएमसी की लीड 42,893 वोटों की थी। यहां पर एसआईआर के तहत 77,125 नाम हटा दिए गए हैं। इनमें से 70 प्रतिशत नाम मुस्लिम समाज के हैं। बेलेघाटा सीट पर टीएमसी की बढ़त 46,112 वोटों की थी, जबकि एसआईआर में 66,019 वोट हटा दिए गए थे। हालांकि एसआईआर के बाद परिणाम कुछ भी हो सकते हैं, और बीजेपी को इस मामले में ज्यादा निश्चिंत नहीं होना चाहिए।

बीजेपी की बढ़त वाली सीटों का क्या हाल है?

साल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने श्यामपुकुर से 1,599 वोटों से बढ़त बनाई थी। यहां इस बार 44,693 नाम कट गए हैं। इसके अलावा बीजेपी की बढ़त वाली दूसरी सीट जोरासांको है। बीजेपी यहां 7,401 वोटों से आगे थी। यहां भी 76,524 वोटों के नाम हट गए हैं।

कोलकाता की इन 11 विधानसभा सीटों में सभी पर जितने अंतर से टीएमसी बीजेपी से 2024 के लोकसभा चुनाव में आगे थी, उससे ज्यादा नाम वोटर लिस्ट के रिवीजन यानी एसआईआर में हट गए हैं। इसीलिए, एसआईआर की वजह से ये सभी सीटें जहां टीएमसी के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित बन गई हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी के लिए आसान होती नजर आ रही हैं।

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