पश्चिम बंगाल के चुनाव दो कारणों से खास रहे। पहला- ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ (डेटा में गड़बड़ी या शक होने पर नाम हटाना) नाम के नए मानदंड के तहत मतदाता सूची से 27.16 लाख नाम हटाए गए। दूसरा- रिकॉर्ड 92.95% मतदान हुआ जिसमें 2021 की तुलना में 31 लाख से ज्यादा वोट डाले गए।

इन दोनों आंकड़ों के विश्लेषण से पश्चिम बंगाल 96 ऐसी सीटें सामने आती हैं जो एक स्पष्ट पैटर्न दिखाती हैं। इनमें से 48 सीटों पर इस बार मतदाताओं की संख्या 2021 की तुलना में कम थी। ये 48 सीटें कुल 27.16 लाख हटाए गए नामों में से लगभग 28% का हिस्सा हैं। इससे संकेत मिले हैं कि SIR की वजह से वोट डालने वाले लोगों की संख्या प्रभावित हुई हो।

बीजेपी ने 2021 में इन 48 में से 15 सीटों पर जीत हासिल की थी।

बाकी 246 सीटों पर 2021 के मुकाबले मतदाताओं की संख्या बढ़ी लेकिन उनमें से 48 सीटों पर कम से कम 20,000 ज्यादा वोट पड़े। इन 48 सीटों पर ज्यादा वोट पड़े (कुल बढ़े वोटों का 42%), लेकिन यहां करीब 2.66 लाख लोगों के नाम हटाए गए यानी हर सीट पर करीब 5,500 वोट कम हुए।

इन 48 सीटों में से 14 सीटें भारतीय जनता पार्टी ने 2021 में जीती थीं।

SIR in bengal
SIR में इन 10 सीटों पर हटे सबसे ज्यादा नाम

हटाए गए वोटों में भी काफी अंतर दिखता है। कहीं बहुत ज्यादा नाम हटे तो कहीं बहुत कम। समसेरगंज में 74,775 नाम हटाए गए जबकि मनबाज़ार में सिर्फ 71 नाम हटे। दोनों जगह 90% से ज्यादा मतदान हुआ फिर भी इनका असर अलग-अलग दिखा।

समसेरगंज (96.04%) में कुल वोट 33,536 कम हो गए। 2021 के मुकाबले 17.8% गिरावट रही।

मनबाज़ार (91.73%) में 20,605 वोट बढ़ गए यानी 2021 के मुकाबले 9.6% बढ़ोतरी दर्ज की गई। यानी नाम हटाने की संख्या में फर्क की वजह से दोनों जगह नतीजे बिल्कुल अलग दिखे।

यह भी पढ़ें: बंगाल में मुस्लिम बहुल के मुकाबले हिंदू बहुल सीटों पर ज्यादा वोटिंग

बंगाल में हिंदू और मुस्लिम बहुल सीटों के वोटिंग पैटर्न को समझने का प्रयास है। पिछले चुनाव से उन सीटों पर कितना मतदान हुआ, इस बार कितना इजाफा हुआ, यहां हर सवाल का जवाब जानते हैं। पढ़ें पूरी खबर…