बंगाल विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और इस बार भवानीपुर बंगाल चुनाव का मुख्य केंद्र बन चुका है। यहां से टीएमसी सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं तो वहीं भाजपा ने अपने कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी को भवानीपुर से मैदान में उतारा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हरा दिया था। ऐसे में इस बार सुवेंदु अधिकारी बनाम ममता बनर्जी की फाइट काफी दिलचस्प हो गई है। टीएमसी ममता बनर्जी की बड़ी जीत का दावा कर रही है तो वहीं सुवेंदु भी कह चुके हैं पिछली बार नंदीग्राम से हराया था, इस बार भवानीपुर से हराएंगे।
ममता का गढ़ है भवानीपुर
सुवेंदु अधिकारी ने नामांकन के दौरान शक्ति प्रदर्शन किया और गृह मंत्री अमित शाह भी इसमें शामिल हुए। नामांकन के दौरान काफी दिलचस्प दृश्य सामने आया, जब गृह मंत्री अमित शाह का रोड शो कालीघाट के उस इलाके से गुजरा, जहां ममता बनर्जी रहती हैं। भवानीपुर टीएमसी का गढ़ है। 2011 से यहां टीएमसी हारी नहीं है। 2011 और 2016 में ममता बनर्जी खुद यहां से चुनाव जीत गईं। 2021 में जब नंदीग्राम से उन्हें हार नसीब हुई, उसके बाद उपचुनाव में उन्होंने 58 हजार वोटों से जीत हासिल की।
वहीं 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने भवानीपुर को 28 हजार से अधिक वोटों से जीता था। हालांकि टीएमसी के लिए मुश्किल इसके बाद शुरू हुई। 2024 के लोकसभा चुनाव में भवानीपुर विधानसभा में टीएमसी को लीड तो मिली लेकिन अंतर काफी कम हो गया था। भवानीपुर विधानसभा साउथ कोलकाता के अंतर्गत आती है। यहां से टीएमसी की माला रॉय ने 1.87 लाख वोटों से जीत दर्ज की। 1991 से ये लोकसभा ममता बनर्जी का गढ़ रही है।
लोकसभा में घटी टीएमसी की लीड
भवानीपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत 269 बूथ आते हैं। लोकसभा 2024 में बीजेपी आधे से अधिक यानी 149 बूथों पर आगे रही। वहीं भवानीपुर में कोलकाता नगर निगम के आठ वार्ड आते हैं, जिनमें से पांच पर बीजेपी आगे रही। लेकिन जिन तीन में वह पीछे रही, वहां पर बड़े अंतर से पीछे हुई और इसी वजह से इस सीट पर बीजेपी 8297 वोट से टीएमसी से पिछड़ गई थी। हालांकि जब 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही थीं, तब वह सभी आठ वार्ड से आगे थीं।
यानी 2021 के चुनाव में टीएमसी 28 हजार वोट और 2021 के उपचुनाव में 58 हजार वोट से आगे रहने के बाद भी 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी भवानीपुर में लीड केवल 8297 वोटों की थी। टीएमसी के लिए यह किसी झटके से कम नहीं था। 2024 में टीएमसी की सांसद माला रॉय को भवानीपुर विधानसभा सीट पर 62,461 वोट मिले जबकि बीजेपी की देबाश्री चौधरी को 54,164 वोट हासिल हुए।
SIR में कटे 47 हजार नाम वोटर
चुनाव आयोग द्वारा किए गए SIR प्रक्रिया में भवानीपुर से करीब 47 हजार नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं और यहीं से बीजेपी के लिए उम्मीदें और बढ़ी हैं। 14 हजार नाम अभी भी जांच के अधीन हैं। भवानीपुर के अगर हम जातीय समीकरण की बात करें तो यहां पर 42 फ़ीसदी मतदाता बंगाली हिंदू जबकि 34 फ़ीसदी गैर बंगाली हिंदू और 24 फ़ीसदी मुस्लिम हैं। लेकिन गैर बंगाली हिंदुओं में अधिक संख्या गुजराती मतदाताओं की है, जिनको लेकर टीएमसी घिरी हुई है।
महुआ की गुजरातियों पर विवादित टिप्पणी
हाल ही में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने गुजरातियों पर एक टिप्पणी कर दी, जिसके बाद बवाल बढ़ गया। टीएमसी को भी इससे नुकसान का अंदाजा हुआ तो उसने तुरंत अपने पार्षद के माध्यम से माफी मांग ली। महुआ मोइत्रा ने कहा था, “बंगालियों ने स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। गुजराती कौन थे? कालापानी में मारे गए? कैद किए गए लोगों में 68 फ़ीसदी बंगाली थे, उसके बाद पंजाबी थे। क्या आप मुझे महान नायक वीर सावरकर के अलावा, जो जेल में बैठकर माफीनामा लिखते थे, वहां मौजूद किसी गुजराती का नाम बता सकते हैं?”
सुवेंदु ने ममता को घेरा
महुआ मोइत्रा की टिप्पणी के तुरंत बाद सुवेंदु अधिकारी को मौका मिल गया और उन्होंने टीएमसी को घेरा। महुआ मोइत्रा के वीडियो को पोस्ट करते हुए सुवेंदु ने X पर लिखा, “बेशर्मी की हद! टीएमसी की समुदायों के बीच रणनीतिक विभाजन और नफरत भड़काने की संस्कृति ने एक नया निम्न स्तर है। ममता बनर्जी की चहेती टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने न केवल गुजराती समुदाय का अपमान किया है, बल्कि भारत की आत्मा का भी अपमान किया है। हमारे स्वतंत्रता संग्राम में गुजरातियों के योगदान पर सवाल उठाना न केवल एक राज्य और उसके सम्मानित समुदाय के सदस्यों का अपमान है, बल्कि यह महात्मा गांधी और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत पर सीधा हमला है। क्या महुआ मोइत्रा भूल गई हैं कि सरदार पटेल के साहस, बुद्धिमत्ता और दूरदृष्टि के बिना 562 रियासतें कभी भी उस भारत के रूप में एकजुट नहीं हो पातीं जिसे हम आज अपनी मातृभूमि कहते हैं?”
सुवेंदु अधिकारी ने आगे लिखा, “जहां भाजपा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ में विश्वास करती है, वहीं टीएमसी ‘बांटो और राज करो’ के सिद्धांत पर चलती है। चाहे वे बंगाली हों या गुजराती, अंग्रेजों के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने वाला हर व्यक्ति क्षेत्रीय पहचान से परे, सबसे पहले एक भारतीय था। एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़काकर, टीएमसी अपने पैरों तले ज़मीन खिसकने से उपजे हताशा और निराशा का बीज बो रही है। पश्चिम बंगाल को भ्रष्टाचार और ‘सिंडिकेट राज’ की भूमि में बदलने वालों को दूसरों को देशभक्ति का प्रमाण पत्र देने का कोई अधिकार नहीं है। टीएमसी के इस ‘भारत-विरोधी’ डीएनए को पश्चिम बंगाल की जनता मुंहतोड़ जवाब देगी। मैं भवानीपुर में रहने वाले गुजराती समुदाय के सम्मानित सदस्यों से टीएमसी के इस घृणित और अपमानजनक रवैये पर ध्यान देने की अपील करता हूं। साथ ही मैं गुजराती समुदाय को आश्वस्त करना चाहता हूं कि बंगाली हर भारतीय समुदाय – मारवाड़ी, बिहारी, पंजाबी और अन्य – को अपना मानते हैं। टीएमसी सांसद द्वारा की गई ऐसी बेतुकी और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां इसे बदलने वाली नहीं हैं।”
हर बूथ की मैपिंग कर रही बीजेपी
भाजपा भवानीपुर में बूथ तक की मैपिंग कर रही है। भाजपा सूत्रों के अनुसार भवानीपुर में 24.5 फ़ीसदी मुस्लिम, 10 फीसदी मारवाड़ी, 8 फीसदी ब्राह्मण और करीब 26 फीसदी कायस्थ मतदाता रहते हैं। भवानीपुर विधानसभा में करीब 15 से 17 हजार गुजराती वोटर हैं, जो इस बार के विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। वहीं क्षेत्र में गैर बंगाली वोटरों में बिहारी, मराठी, ओड़िया, मारवाड़ी और उत्तर भारतीय वोटर भी शामिल हैं।
बैकफुट पर आई टीएमसी ने मांगी माफी
महुआ मोइत्रा की टिप्पणी के बाद जैसे ही सुवेंदु अधिकारी ने हमला बोला, तुरंत टीएमसी बैकफुट पर आ गई। इसके बाद टीएमसी ने अपने पार्षद के माध्यम से माफी मंगवा दी। वार्ड नंबर 70 से टीएमसी पार्षद आशिम बसु ने एक वीडियो बयान जारी किया। दरअसल इसी वार्ड में करीब 70 फ़ीसदी वोटर गुजराती हैं। आशीष बसु ने दावा किया कि वह जो बयान पढ़ रहे हैं, वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का व्हाट्सएप मैसेज है। उन्होंने अपने बयान में कहा, “मैं अपने गुजराती भाइयों और बहनों से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगता हूं और मुझे आप पर गर्व है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और हमने संबंधित सांसद को इसके बारे में बता दिया है। हम इस टिप्पणी का समर्थन नहीं करते हैं और इसके लिए माफी मांगते हैं। दीदी (ममता बनर्जी) और मैं आपको अपने परिवार का अभिन्न अंग मानते हैं। हमें भी टिप्पणी से निराशा हुई है। सांसद ने बयान देते समय पार्टी से सलाह नहीं ली और यह हमारी पार्टी का रुख नहीं है। इस बयान के बाद मेरी पार्टी प्रमुख काफी नाराज हैं और उन्होंने गुजराती समुदाय से माफी मांगने का फैसला किया। उन्होंने मुझे खुद स्पष्ट संदेश भेजा कि पार्टी उनकी भावनाओं का सम्मान करती है और उनके साथ खड़ी रहेगी।”
बता दें कि टीएमसी ने सिर्फ पार्षद के माध्यम से माफी ही नहीं मांगी, बल्कि इलाके में माफी के बड़े-बड़े पोस्टर भी लगाए गए हैं। टीएमसी दावा कर रही कि पोस्टर गुजरातियों द्वारा उनके समर्थन में लगाए गए हैं और समाज उनके साथ है। इन पर ममता की बड़ी-बड़ी तस्वीर है।
घर में घिर गईं ममता
टीएमसी के बयान के बाद स्पष्ट है कि गुजरातियों पर महुआ मोइत्रा की टिप्पणी उसे रास नहीं आई और उसने तुरंत इसके नुकसान को भांप लिया। जिस तरह से लोकसभा चुनाव में टीएमसी केवल 8297 वोटों की लीड ले पाई और फिर उसके बाद SIR में 40 हजार से अधिक नाम कटे, उसके बाद टीएमसी मुश्किल में है। टीएमसी इस सीट को पहले की तरह आसानी से नहीं ले रही। वहीं भाजपा के नेता भवानीपुर में इस बार जीत की पूरी कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी की स्ट्रैटेजी है कि भवानीपुर में जितना ममता को घेरेंगे, उतना उनका ध्यान बंगाल की अन्य विधानसभा सीटों से हटेगा और इसका फायदा उसे मिल सकता है।
(यह भी पढ़ें- क्यों अहम है बंगाल की भवानीपुर विधानसभा सीट)
पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर विधानसभा सीट का महत्त्व काफी अधिक है। यह केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि वह राजनीतिक सफर है जो राज्य में कांग्रेस के लंबे प्रभुत्व से लेकर तृणमूल कांग्रेस के गढ़ बनने तक के बदलाव को साफ तौर पर दर्शाता है। पढ़ें पूरी खबर
