पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बड़ी जीत मिली। टीएमसी की चुनाव में केवल करारी हार ही नहीं हुई बल्कि उसके बड़े नेता अपना बूथ तक नहीं बचा पाए। टीएमसी के 36 बड़े नेताओं में से केवल 14 ही अपनी सीटों पर जीत हासिल कर पाए। वहीं 9 नेता अपना ही बूथ हार गए। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) द्वारा जारी बूथ-लेवल डेटा से पता चलता है कि बीजेपी के हाथों टीएमसी को कितनी बड़ी हार मिली। ममता बनर्जी समेत ज़्यादातर मौजूदा मंत्री उन सीटों से हार गए जिन्हें कभी टीएमसी का गढ़ माना जाता था। वहीं 16 वरिष्ठ टीएमसी नेता अपनी सीटों के सिर्फ़ 33 फीसदी या उससे भी कम पोलिंग बूथ पर जीत पाए।
भवानीपुर में बहुत आगे रही बीजेपी
उदाहरण के लिए भवानीपुर में जहां ममता ने 2021 के उपचुनाव में जीत हासिल की थी, वह इस बार बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी के ख़िलाफ 270 पोलिंग बूथ में से सिर्फ़ 62 (22.96%) पर ही बढ़त बना पाईं। ममता बनर्जी के खुद के पोलिंग स्टेशन नंबर 207 पर उन्होंने 63.33% वोट शेयर के साथ जीत हासिल की। लेकिन शुभेंदु अधिकारी कम से कम 50% वोट शेयर वाले 197 बूथ जीतने में कामयाब रहे, जिसमें 80% से ज़्यादा वोट शेयर वाले 44 बूथ शामिल थे। इस तरह उन्होंने टीएमसी सुप्रीमो को लगातार दूसरे विधानसभा चुनाव में हराया। दूसरी ओर ममता को सिर्फ़ 54 बूथ पर 50% से ज़्यादा वोट शेयर मिला, जिसमें 80% से ज़्यादा वोट शेयर वाले 43 बूथ शामिल थे।
टीएमसी के चार मंत्री (सुजीत बोस, ब्रत्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य, और प्रदीप मजूमदार) अपनी सीटों पर कुल पोलिंग बूथ के 15% से भी कम पर जीते। चारों अपनी सीटें भी बीजेपी से हार गए। हेमताबाद में सत्यजीत बर्मन सभी पोलिंग बूथों में से 45.2% जीतने के बावजूद बीजेपी से हार गए। इसमें 50% से ज़्यादा वोट शेयर वाले 39.15% बूथ शामिल थे।
अपना बूथ नहीं बचा पाए टीएमसी के 9 बड़े नेता
सिर्फ़ तीन TMC मंत्री (मोहम्मद गुलाम रब्बानी, अखरुज़्जमां और सबीना यास्मिन) अपनी सीटों पर 80% से ज़्यादा पोलिंग स्टेशन जीते। 36 टीएमसी नेताओं में से 25 उन चुनाव क्षेत्रों में वोटर के तौर पर रजिस्टर्ड हैं जहां से उन्होंने चुनाव लड़ा था। जबकि बाकी 11 नेता दूसरी विधानसभा में रजिस्टर्ड हैं। इन 25 में से सिर्फ़ 9 नेताओं ने अपने घरेलू पोलिंग स्टेशन पर जीत हासिल की, जिनमें से 6 आखिर में अपनी सीटें हार गए और 3 जीते। अपने घरेलू पोलिंग बूथ जीतने वाले 16 वरिष्ठ टीएमसी नेताओं में से सिर्फ़ 6 ही अपनी सीटें जीत पाए।
अपनी सीटें जीतने वाले 14 टीएमसी नेताओं में से सिर्फ़ 4 को अपनी सीटों पर 50% या उससे अधिक वोट शेयर मिला। गोलपोखर में गुलाम रब्बानी ने अपने क्षेत्र के 83.88% बूथ जीते। लेकिन मध्यमग्राम में रथिन घोष ने कुल बूथों के सिर्फ़ 17.65% में आधे से ज़्यादा वोट शेयर हासिल करके अपनी सीट जीती। जिन 22 सीटों पर TMC नेताओं की हार हुई, उनमें से 15 सीटें ऐसी थीं जहां बीजेपी ने कुल 30% से भी कम बूथों पर करीब 50% या उससे अधिक वोट शेयर हासिल करने के बावजूद जीत हासिल की। उदाहरण के लिए दमदम उत्तर में बीजेपी के सौरव सिकदर ने पूर्व वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को हराया, जबकि उन्होंने सभी पोलिंग बूथों के सिर्फ़ 3.78% में 50% से ज़्यादा वोट शेयर हासिल किया था।
जिन 22 सीटों पर टीएमसी के वरिष्ठ नेता हारे, उनमें से 16 सीटों के आधे से ज़्यादा पोलिंग बूथ पर बीजेपी उम्मीदवार को टीएमसी से 10 फीसदी अधिक वोट मिला था। टीएमसी के 14 जीतने वाले नेताओं में बोलपुर में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चंद्रनाथ सिन्हा शामिल हैं, जो सभी पोलिंग बूथों के 54.98% पर बीजेपी उम्मीदवार से 10 फीसदी से ज़्यादा वोट शेयर से पीछे थे हालांकि फिर भी सीट जीत गए। उलुबेरिया दक्षिण में भी टीएमसी के पुलक रॉय सीट के आधे पोलिंग बूथों पर बीजेपी उम्मीदवार से 10 फीसदी से ज़्यादा वोट शेयर से पीछे थे, लेकिन फिर भी चुनाव जीतने में कामयाब रहे।
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विधानसभा चुनावों में हार के बाद टीएमसी में राजनीतिक उथल-पुथल मची है। अब ममता बनर्जी ने उन्होंने अपनी पार्टी के दलबदलुओं पर निशाना साधते हुए ‘गिरगिट’ शीर्षक से एक व्यंग्यात्मक कविता लिखी है। पढ़ें पूरी खबर
