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बंगाल: चुनाव बाद हिंसा में 40 परिवारों को करना पड़ा पलायन, 2 माह में 8 बार हमले

अत्रि मित्रा- एनएचआरसी की तरफ से जारी रिपोर्ट में ममता बनर्जी सरकार पर हिंसा पर आंखें मूंदने का आरोप लगाया है।

बीजेपी समर्थक माना अधिकारी का घर जो अब मलबा बन गया है (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस- पार्थ पॉल)

पश्चिम बंगाल में 2 मई को आए चुनाव परिणाम के बाद हुए हिंसा में बीजेपी सर्मथकों को जमकर निशाना बनाया गया। कई जगहों पर आज भी वो अपने घर को छोड़कर दूसरी जगह रह रहे हैं। उनके घरों को तोड़ दिया गया। पिछले दो महीने में कई बार उनके घरों को निशाना बनाया गया।

हाल ही में, जब कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा की जांच कर रहे NHRC की एक टीम ने उस क्षेत्र का दौरा किया, तो कथित तौर पर TMC समर्थकों द्वारा टीम का पीछा किया गया था। एनएचआरसी की तरफ से जारी रिपोर्ट में ममता बनर्जी सरकार पर हिंसा पर आंखें मूंदने का आरोप लगाया गया है। लोगों में अब भी डर का माहौल है। पीड़ित परिवार अभी भी किसी से मिलने से बच रहे हैं। 40 परिवारों में से केवल आठ ने नए स्थानों पर इंडियन एक्सप्रेस से मिलने के लिए सहमति व्यक्त की, जबकि दो अन्य ने फोन पर बात की। दो परिवार सड़क के किनारे मिले। पीड़ित परिवारों के कई लोगों ने दावा किया कि उन्होंने पुलिस से संपर्क किया था लेकिन उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गयी। अंत में, कुछ ने NHRC को शिकायत भेजी थी।

हालांकि पुलिस का दावा है कि उन्होंने कॉलोनी के डोमपारा इलाके में हिंसा की एक घटना के लिए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। लेकिन किसकी गिरफ्तारी हुई पुलिस ने ये बताने से इनकार कर दिया। पूरे मामले को लेकर टीएमसी का कहना है कि इस हिंसा में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। पलायन करने वाले परिवारों में से होने का दावा करते हुए मेघा और अमित डे ने कहा कि वे अपने 3 साल के बेटे के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान पर भटकते रहे हैं। अंत में उन्हें किराए पर एक कमरा मिला है।

जहां उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।केपीसी मेडिकल कॉलेज कॉलोनी में रहने वाले अमित एक निजी डॉक्टर के साथ सहायक के रूप में काम करते हैं ने बताया कि वो दो महीने से काम पर नहीं जा रहे हैं। मेघा ने कहा कि घटना के एक महीने बाद उसने कुछ स्थानीय टीएमसी नेताओं से निवेदन किया कि उन्हें टूटी हुई अलमारी और बिस्तर जैसे सामान इकट्ठा करने दिया जाए। लेकिन टीएमसी नेताओं ने उन्हें ये भी करने से रोक दिया।

केपीसी मेडिकल कॉलेज के एक संविदा कर्मचारी शानू का कहना है कि “टीएमसी के गुंडे” हर जगह उनका पीछा करते हैं, वे काम पर नहीं जा सकते, और उनके पास जो पैसा था वो भी अब खत्म हो रहा है। “भाजपा नेता समय-समय पर 1,000-1,500 रुपये या राशन के साथ हमारी मदद करते हैं। लेकिन इससे हम केवल चावल, आलू, दाल ही खरीद सकते हैं। कम से कम दो महीने हमने मछली नहीं खाई है।”शानू मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब जूनियर टीम के पूर्व में गोलकीपर रह चुके हैं।

केपीसी मेडिकल कॉलेज कॉलोनी के एक कोने में स्थित भाजपा कार्यालय अब मलबा बन चुका है। उसके साथ ही एक लाइन से कई घर जिसे आंशिक रूप से या पूर्ण रूप ध्वस्त कर दिया गया है।  50 वर्षीय व्यक्ति ने कहा कि उन्हें बाहरी लोगों से बात न करने की धमकी दी गई है। उन्होंने हमारे सामने माना अधिकारी के घर को लूट लिया।

वहीं इस मामले पर टीएमसी नेता आलोक देब  का कहना है कि  “शानू नस्कर, सूरज मलिक, माना, छोटका और कुछ अन्य भाजपा कार्यकर्ता मूल रूप से अपराधी हैं”, चुनाव परिणामों के बाद, उन्होंने खुद अपने घरों में तोड़फोड़ की और चले गए। वे लोगों पर अत्याचार करते थे, शराब पीते थे और महिलाओं को परेशान करते थे। लोग उनसे परेशान थे, चुनाव हारने के बाद उन्हें डर लगा इस कारण वो यहां से भाग गए।

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