ताज़ा खबर
 

आपातकाल को राहुल ने बताया था ‘गलती’, पर पूर्व कांग्रेस चीफ से पहले सोनिया, मनमोहन और प्रणब भी कर चुके हैं जिक्र; जानिए- क्या कहा था?

सोनिया का कहना था कि जब इंदिरा जी ने चुनाव की घोषणा की तभी यह चीज सामने आ गई थी कि उन्हें अपने फैसले पर पछतावा है। सोनिया का कहना था कि उन्हें लगता है कि इंदिरा जी को खुद भी लगता था कि आपातकाल लगाने का फैसला गलत था।

sonia & rahul gandhiकांग्रेस चीफ सोनिया गांधी और पूर्व चीफ राहुल गांधी (फोटो INDIAN EXPRESS)

इंदिरा गांधी के शासनकाल में लगी इमरजेंसी को राहुल गांधी ने गलती करार दिया तो लोगों को ज्यादा हैरत नहीं हुई। दरअसल, उनसे पहले खुद कांग्रेस चीफ सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और देश के राष्ट्रपति रहे दिवंगत प्रणब मुखर्जी अपने-अपने तरीके से आपातकाल का जिक्र कर चुके हैं। खास बात है कि सभी ने इसकी जमकर आलोचना ही की है।

सोनिया गांधी ने इमरजेंसी पर पहली बार मई 2014 में कोई बात कही। उस दौरान वह एनडीटीवी को एक साक्षात्कार दे रही थीं। तब उन्होंने कहा था कि इंदिरा जी को उस समय अपनी गलती का एहसास हो गया था जब वह चुनाव हार गईं। सोनिया का कहना था कि जब इंदिरा जी ने चुनाव की घोषणा की तभी यह चीज सामने आ गई थी कि उन्हें अपने फैसले पर पछतावा है। एक सवाल के जवाब में सोनिया का कहना था कि उन्हें लगता है कि इंदिरा जी को खुद भी लगता था कि आपातकाल लगाने का फैसला गलत था। उनका कहना है कि इंदिरा जी लोकतंत्र में गहरी आस्था थी। बकौल सोनिया, उन्हें लगता है कि उस समय के हालातों ने उन्हें इस तरह का कड़ा फैसला लेने को मजबूर किया, लेकिन इसे लेकर वह कभी भी सहज नहीं रही थीं।

2014 में ही आपातकाल को लेकर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के भी विचार उस समय सामने आए जब उनकी बेटी दमन सिंह ने अपनी किताब को जारी किया। स्ट्रिक्टली पर्सनलः मनमोहन, गुरुशरण में उन्होंने लिखा कि उनके पिता के लिए यह फैसला हैरत में डालने वाला था। मनमोहन सिंह के हवाले से उन्होंने लिखा कि किसी को नहीं लगता था कि इंदिरा जी ऐसा करेंगी। हालांकि, आपातकाल के दौरान कई चीजें अच्छी भी हुईं। लेकिन कुल मिलाकर देश में एक डर का माहौल था। लोगों को गिरफ्तार करके कैद किया जा रहा था। उनका कहना था कि उस दौरान देश में सबसे ज्यादा विरोध फैमिली प्लानिंग के ऑपरेशन को लेकर था। संजय गांधी उस दौरान एक पैरेलल गवर्नमेंट की तरह से काम कर रहे थे। वह उस समय सबसे अहम व्यक्ति थे।

2014 में ही प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब द ड्रामाटिक डिकेडः द इंदिरा गांधी इयर्स में लिखा, इमरजेंसी का फैसला एक गलत कदम था। उनका कहना था कि इससे बचा जा सकता था। हालांकि उन्होंने खुद भी इसके कई पहलुओं को अच्छा माना था। इस दौरान अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ तो करप्शन पर भी अंकुश लगा। लोगों की जिंदगी में अनुशासन आ गया था। टैक्स चोरी और तस्करी पर पूरी तरह से लगाम कस चुकी थी। अलबत्ता उनका मानना था कि राजनीतिक गतिविधियों पर रोक, गिरफ्तारियों, प्रैस सेंसरशिप और चुनाव को टालने का फैसला सरासर गलत थे। कांग्रेस और इंदिरा गांधी को इसके लिए खामियाजा भी भुगतना पड़ा। उनका मानना है कि सिद्धार्थ शंकर रॉय के कहने पर इंदिरा जी ने यह फैसला लिया था। मुखर्जी का कहना है कि इंदिरा जी ने खुद उनसे कहा था कि उन्हें नहीं पता कि संविधान के किस प्रावधान के तहत इमरजेंसी की घोषणा की जाती है।

दिग्गज नेताओं के अलावा कुछ और मौके भी आए जब कांग्रेस की तरफ से आपातकाल को गलत ठहराया गया। 2015 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी राहुल की लाइन पर चलते हुए इसे गलत करार दिया था। तब सिंधिया कांग्रेस में ही थे। उनका कहना था कि इमरजेंसी में जो कुछ हुआ वह गलत था। लेकिन अब पीछे मुड़कर देखना लगत है। उन्होंने सिख दंगों को भी गलत बताया था। 2011 में कांग्रेस हिस्ट्री के 5वें वॉल्यूम में भी इमरजेंसी को लेकर काफी कुछ कहा गया था। प्रणब खुद उस टीम के प्रमुख थे, जिसने पार्टी की 125वीं जयंती के मौके पर इसका विमोचन किया था। किताब में आपातकाल को लेकर कई बातें कही गईं। इंदर मल्होत्रा ने अपने आर्टिकल में लिखा, संजय गांधी और उनकी टीम ने एक गोपनीय तरीके से इमरजेंसी लगाने की तैयारी की थी।

Next Stories
1 TMC की शिकायत पर चुनाव आयोग सख्त- वैक्सीन सर्टिफिकेट से पीएम मोदी की तस्वीर हटाने के निर्देश
2 Social Media Regulation Case: शीर्ष अदालत ने कहा- केंद्र के निर्देशों में डिजिटल मंचों पर कार्रवाई का प्रावधान नहीं
3 अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती पर मादक पदार्थ खरीदने, रखने और पैसे देने के आरोप
ये पढ़ा क्या?
X