बिहार के भागलपुर जिला स्थित विक्रमशिला पुल का एक हिस्सा बीते हफ्ते गिर गया। द इंडियन एक्सप्रेस ने जब इस घटना की पड़ताल की तो पाया कि यह हादसा बीते दो वर्षों की गई अनदेखी का परिणाम है। विभिन्न निरिक्षण दल और अधिकारियों ने पुल संबंधी खतरे की संकेत को उजागर किया था। हालांकि, इस पर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई।
अधिकारियों के अनुसार पुल दो चरणों में आंशिक रूप से ध्वस्त हुआ। 3 मई की रात करीब 11:55 बजे पिलर संख्या 133 में संरचनात्मक खराबी आने से शुरू हुई यह घटना 4 मई की रात 1:07 बजे पुल का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह ढहने तक पहुंच गई। इसके बाद गंगा नदी पर बना 4.7 किलोमीटर लंबा विक्रमशिला पुल दो हिस्सों में बंट गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ।
हालांकि, पुल के आंशिक रूप से ध्वस्त हो जाने के कारण झारखंड और दक्षिण बिहार को उत्तर एवं पूर्वोत्तर बिहार तथा पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क पूरी तरह प्रभावित हो गया है। दोनों ओर का यातायात अब लंबे वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया गया है। इसके चलते मुंगेर से खगड़िया के बीच की दूरी, जो विक्रमशिला सेतु के जरिए सिर्फ 14 किलोमीटर थी, अब गंगा पुल के रास्ते बढ़कर 161 किलोमीटर हो गई है।
मरम्मत कार्य में लग सकता है तीन महीने का वक्त
हादसे के बाद सीमा सड़क संगठन के अभियंता और विशेषज्ञ, भारतीय सेना और आईआईटी पटना के साथ ही राज्य सड़क निर्माण विभाग व बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (BRPNN) के अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षण किया और मरम्मत कार्य की रणनीति बनाई। इस काम में कम से कम तीन महीने तक लग सकते हैं।
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम पर राज्य के किसी भी पुल की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सड़क निर्माण विभाग (RCD) के साथ समन्वय की जिम्मेदारी है। सूत्रों के मुताबिक पिछले दो महीनों में कई बार बीआरपीएनएन और आरसीडी दोनों को विक्रमशिला पुल की “खतरनाक स्थिति” के बारे में आगाह किया गया था।
पुल गिरने के बाद आरसीडी के एनएच डिवीजन के कार्यपालक अभियंता संकेत कुमार रोशन को काम में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया। 4 मई को जारी निलंबन पत्र में कहा गया, “पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी आरडीसी के एनएच डिवीजन के कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार रोशन के पास थी। प्रथम दृष्टया उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह और उदासीन पाया गया है, इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।”
संरचना लगातार कमजोर होती चली गई
आरसीडी से जुड़े सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अगस्त 2024 से अप्रैल 2026 के बीच साल 2001 में बने इस पुल की खराब हालत को लेकर कम से कम सात आंतरिक पत्राचार किए गए थे। अधिकारियों का कहना है कि वर्षों से ओवरलोड ट्रकों की आवाजाही और जोड़ों पर लगे बेयरिंग के कमजोर होने के कारण पुल की संरचना लगातार कमजोर होती चली गई।
आरसीडी के एक सूत्र ने बताया, “अगस्त 2024 में आरसीडी के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर द्वारा किए गए निरीक्षण में पुल के लगभग 60 एक्सपेंशन जॉइंट्स में से छह में गैप पाए गए थे। जनवरी 2025 में इस निरीक्षण को लेकर आरसीडी मुख्यालय को फिर से याद दिलाया गया। मार्च 2025 में भागलपुर के जिलाधिकारी नवेल किशोर चौधरी ने राज्य सरकार के दौरे पर आए अधिकारियों को पुल में बढ़ती दरारों के बारे में जानकारी दी। हालांकि, उसी महीने आईआईटी पटना और बीआरपीएनएन की संयुक्त टीम ने निरीक्षण के बाद पुल को सुरक्षित बताया था।”
सूत्र के अनुसार, “अप्रैल 2025 में भागलपुर के नेशनल हाईवे डिवीजन ने आरसीडी मुख्यालय को पुल में चार नई दरारों की जानकारी दी। अप्रैल 2026 में दौरे पर आए आरसीडी अधिकारियों को पुल के बेयरिंग्स में हुए नुकसान के बारे में बताया गया। उसी महीने पुल की खराब स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट भी मुख्यालय भेजी गई थी।” हालांकि, इसके एक महीने से भी कम समय बाद पुल का हिस्सा ढह गया।
पुल की पहले भी हो चुकी है मरम्मत
इन चेतावनियों से पहले भी 2020 से 2024 के बीच पुल की दो बड़ी मरम्मत हो चुकी थीं, जिससे स्पष्ट है कि पुल को व्यापक स्तर पर रखरखाव की जरूरत थी। एक आरसीडी अधिकारी ने बताया, “2020 से 2022 के बीच कई एक्सपेंशन जॉइंट्स की मरम्मत की गई थी, जिसके दौरान पुल को आंशिक रूप से बंद करना पड़ा था। 2024 में पिलरों के पास उभर रही दरारों को भरने के लिए सतही और संरचनात्मक मजबूती का काम किया गया और नई बिटुमिनस परत डाली गई, लेकिन इसका असर सीमित रहा।”
हादसे के बाद पुल का निरीक्षण करने पहुंचे एक विशेषज्ञ ने कहा, “पुल की मरम्मत का बजट जो पहले 26 करोड़ रुपये था, अब बढ़कर 75 करोड़ रुपये हो गया है, क्योंकि 13 नई दरारें सामने आई हैं।” चंद्रशेखर सिंह ने कहा, “हमारी प्राथमिकता पुल की मरम्मत कर यातायात बहाल करना है। साथ ही यह पता लगाने के लिए आंतरिक जांच भी चल रही है कि पुल के आंशिक रूप से ढहने की स्थिति क्यों बनी।”
उन्होंने बताया कि बीआरओ के विशेषज्ञ और आईआईटी के स्ट्रक्चरल विशेषज्ञ पुराने पिलरों और स्लैब को स्थिर करने के काम में जुटे हैं। वहीं, क्षेत्र की यातायात समस्या के स्थायी समाधान के रूप में समानांतर चार लेन का नया पुल बनाया जा रहा है, जिसे दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य है। इससे विक्रमशिला सेतु पर भारी ट्रैफिक का दबाव कम होगा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनेगी।
एक वरिष्ठ आरसीडी अधिकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस हादसे के बाद राज्य के सभी बड़े पुलों का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। अधिकारी ने बताया, “मुख्यमंत्री ने 5 मई को पुल का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद यह आदेश दिया।”
पुल गिरने की कई घटनाएं सामने आई
गौरतलब है कि बिहार में हाल के वर्षों में पुल गिरने की कई घटनाएं सामने आई हैं। 2022 से 2024 के बीच ही कम से कम 15 पुल हादसे हुए। गंगा पर बन रहा अगुवानी-सुल्तानगंज पुल, जिसका निर्माण 2014 में शुरू हुआ था, 2022, 2023 और 2024 में तीन बार गिर चुका है। जांच में आईआईटी रुड़की और एनआईटी पटना के विशेषज्ञों ने इसके सुपर-स्ट्रक्चर में डिजाइन खामियां पाई थीं।
रिपोर्ट में कहा गया कि पुल कुछ हिस्सों में हवा और पानी के दबाव को झेलने में सक्षम नहीं था। जांच समिति ने लापरवाही के लिए दो कार्यपालक अभियंताओं और एक डिप्टी चीफ इंजीनियर को दोषी ठहराते हुए निलंबित कर दिया था। अप्रैल 2025 में राज्य सरकार ने इस पुल के निर्माण को फिर से शुरू करने की मंजूरी दी थी।
वहीं, साल 2024 में 10 पुल हादसों के बाद राज्य सरकार ने कई सुधारात्मक कदम उठाए थे। एक दर्जन से अधिक इंजीनियरों को निलंबित किया गया था और कई ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। साथ ही पुलों की नियमित हेल्थ ऑडिट सुनिश्चित करने के लिए नई “ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी” लागू की गई थी। क्वालिटी मैनेजमेंट के लिए नए एसओपी भी बनाए गए थे।
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बिहार में गंगा नदी पर बना विक्रमशिला सेतु, भागलुर और नवगछिया को जोड़ता है। बिहार के सीमांचल और कोसी क्षेत्र के बीच यह पुल एक महत्वपूर्ण कड़ी है। रविवार रात यह पुल अचानक बीच में से टूट गया। जी हां, पुल का एक हिस्सा पूरी तरह से ध्वस्त होकर गिर गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। इसके बाद प्रशासन ने यातायात को दोनों ओर से डायवर्ट कर दिया। पूरी खबर पढ़ें…
