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किसानों की आय बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन है बेहतर तरीका, पौधों के बीच ‘परागण’ प्रक्रिया को तेज करती है मधुमक्खियां

मधुमक्खी पालन और उससे जुड़े व्यवसाय के जरिए किसानों की आय को बढ़ाने की एक सम्पूर्ण नीति तैयार करने लिए नीति आयोग में बुधवार को एक विशेष बैठक आयोजित की गयी है। बैठक में उत्पादकों, निर्यातकों, विभागों के अधिकारियों समेत विभिन्न अंशधारकों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य […]

Author नई दिल्ली | April 18, 2017 6:38 PM
मधुमक्खी पालन और उससे जुड़े व्यवसाय के जरिए किसानों की आय को बढ़ाने की एक सम्पूर्ण नीति तैयार करने लिए नीति आयोग में बुधवार को एक विशेष बैठक आयोजित की गयी है।

मधुमक्खी पालन और उससे जुड़े व्यवसाय के जरिए किसानों की आय को बढ़ाने की एक सम्पूर्ण नीति तैयार करने लिए नीति आयोग में बुधवार को एक विशेष बैठक आयोजित की गयी है। बैठक में उत्पादकों, निर्यातकों, विभागों के अधिकारियों समेत विभिन्न अंशधारकों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य देवव्रत शर्मा ने बताया, ‘‘सरकार की प्राथमिकता देश में उत्पादन का स्तर बढ़ाने के साथ साथ किसानों की आय को दो गुना करने की है। सभी अंशधारकों की कल होने वाली बैठक इसी लक्ष्य से प्रेरित है। इस बैठक में सभी निर्यातकों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, उत्पादकों, उन्नत मधुमक्खी पालकों आदि को बुलाया गया है ताकि उनकी तमाम समस्याओं पर गौर कर एक समग्र नीति तैयार की जा सके।

शर्मा ने कहा, किसानों में मधुमक्खीपालन को लेकर काफी भ्रम था लेकिन जब उन्हें व्यवहारिक अनुभव हुआ कि मधुमक्खी पालन के कारण उनको फसलों की उपज बढ़ाने में भी मदद मिलती है तो उनकी रुचि इस दिशा में बढ़ती जा रही है। राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के कार्यकारी निदेशक बी एल सारस्वत ने कहा,  यह बात साबित की जा चुकी है कि वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन के जरिये फसलों का उत्पादन और किसानों की आय को बढ़ाया जा सकता है। मधुमक्खी पालन के जरिये खेतों से पुष्परस बटोरने के दौरान मधुमक्खियां पौधों के बीच ‘परागण’ प्रक्रिया को तेज करती है इससे फसल उत्पादकता में काफी इजाफा होता है।

मधुमक्खी पालन से शहद के साथ साथ मधुमक्खी का डंक, प्रोपोलिस, मधुमक्खी के छत्ते, मोम इत्यादि उत्पाद मिलते है। इनका उपयोग औषधि एवं सौन्दर्य प्रसाधन उद्योगों में होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसका बड़ा बाजार है। नीति आयोग की बैठक में उत्पादकों से सामान की खरीद, उनका विपणन और निर्यात इत्यादि से संबंधित समस्याओं पर विचार कर एक समग्र नीति बनाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाये जाने की संभावना है।

एक अनुमान के अनुसार मधुमक्खी के डंक की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 12 लाख रच्च्पये से डेढ़ करोड़ रच्च्पये किलो है जो डंक की गुणवत्ता के हिसाब से तय होता है जबकि मधुमक्खी के छत्ते से प्राप्त होने वाले प्रोपोलिस की भारतीय बाजार में कीमत लगभग 1,500 रुपए किलो है। खेती की उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही मधुमक्खीपालन से प्राप्त होने वाले इन तत्वों द्वारा किसान अपनी आमदनी में भारी बढ़ोतरी कर सकते है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल में अपनी कुछ सभाओं में किसानों को खेती के साथ साथ मधुमक्खी पालन का सुझाव दिया था। इससे संकेत मिलता है कि सरकार इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करना चाहती है।  देवव्रत शर्मा का मानना है कि मधुमक्खी पालन के जरिये आस पास के क्षेत्रों में बिना अतिरिक्त उर्वरक और किसी कीटनाशक के प्रयोग के फसलों की उत्पादकता में 30 प्रतिशत से लेकर 5,000 :पांच हजार: प्रतिशत तक की वृद्धि की संभावना है। उन्होंने कहा, ै खेती के मौजूदा रकबे से हम अन्य फसलों के साथ साथ तिलहन और दलहनों की पैदावार इतनी बढ़ा सकते हैं कि हम इन फसलों के आयातक की जगह निर्यातक देश बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा हमने मधुमक्खी के डंक का संग्रहण करने, प्रोपोलिस (मोमी गोंद) निकालने आदि की मशीने भारत में विकसित की हैं जो विदेशी मशीनों से काफी सस्ती और प्रभावी हैं। इसके अलावा वह किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ ही उनकी मधुमक्खी कॉलोनी को स्थापित करने और वहां के उत्पादों को खरीदने का भी काम करते हैं।

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