बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की ओर से नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों को लेकर जारी किए गए आदेश पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब बॉम्बे बार एसोसिएशन (BBA) ने NALSAR के छात्रों का खुलकर समर्थन किया है। एसोसिएशन ने BCI चेयरमैन की माफी को ‘देर से उठाया गया कदम’ बताते हुए कहा कि यह केवल स्थिति को शांत करने की कोशिश लगती है।
BBA ने अपने बयान में कहा कि 13 अगस्त को मनन कुमार मिश्रा की ओर से जारी आदेश, जिसमें राज्य बार काउंसिलों को NALSAR के 2026 स्नातकों का नामांकन नहीं करने का निर्देश दिया गया था, BCI चेयरमैन के पद का ‘दुरुपयोग’ था। बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया।
पहले नामांकन पर रोक, फिर कार्रवाई वापस लेने की घोषणा
बॉम्बे बार एसोसिएशन के मुताबिक, 13 अगस्त को जारी संचार में पहले NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाई गई। इसके बाद छात्रों के खिलाफ कार्रवाई हटाने की बात कही गई, लेकिन NALSAR को मामले की जांच करने का निर्देश बरकरार रखा गया।
14 अगस्त को मनन कुमार मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि BCI ने कार्यवाही बंद कर दी है और अब आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। इसके अगले दिन, 15 अगस्त को उन्होंने एक पत्र जारी किया, जिसे BBA ने ‘माफी की प्रकृति’ वाला पत्र बताया।
‘माफी में सच्चे पश्चाताप की भावना नहीं’
BBA ने मनन कुमार मिश्रा की 15 अगस्त की माफी पर भी सवाल उठाए। एसोसिएशन ने कहा कि इसे ‘सच्चे पश्चाताप की अभिव्यक्ति’ नहीं माना जा सकता, क्योंकि अपने आचरण के बावजूद मिश्रा अभी भी BCI चेयरमैन के पद पर बने हुए हैं।
एसोसिएशन ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था। BBA के अनुसार, अपने आचरण के जरिए मिश्रा ने कानूनी पेशे की गरिमा, संवैधानिक स्वतंत्रता, निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखने में विफलता दिखाई है।
NALSAR छात्रों के करियर को पहुंच सकता था नुकसान
बार एसोसिएशन ने 13 अगस्त के आदेश को NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के पेशेवर करियर को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया। BBA ने कहा कि छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने का फैसला ‘अनुचित’ था और इसमें विरोध करने के अधिकार तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सिद्धांतों को नजरअंदाज किया गया।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में छात्रों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिए बिना ही उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। BBA ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया।
BCI चेयरमैन के आदेश पर क्यों उठा विवाद?
मनन कुमार मिश्रा के 13 अगस्त के आदेश के बाद NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के राज्य बार काउंसिलों में नामांकन को लेकर चिंता पैदा हो गई थी। कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वकालत के पेशे में प्रवेश के लिए बार काउंसिल में नामांकन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। ऐसे में नामांकन पर रोक से छात्रों के पेशेवर करियर पर सीधा असर पड़ सकता था।
हालांकि, बाद में BCI की ओर से कार्यवाही बंद करने और आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं होने की बात कही गई। इसके बाद मिश्रा ने छात्रों से माफी भी मांगी। लेकिन अब BBA के बयान से यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
बॉम्बे बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वह NALSAR के छात्रों के साथ खड़ी है और BCI चेयरमैन के इस पूरे प्रकरण को केवल आदेश वापस लेने और माफी मांगने से समाप्त हुआ मामला नहीं मानती। एसोसिएशन ने इसे कानून के पेशे की गरिमा, छात्रों के अधिकारों और प्राकृतिक न्याय के व्यापक सवाल से जोड़ते हुए मनन कुमार मिश्रा के पद पर बने रहने पर भी गंभीर आपत्ति जताई है।
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