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फेक न्‍यूज पर BBC की रिपोर्ट: भारत में दक्षिणपंथ का दबदबा, ‘हिन्‍दू शक्ति’ से जुड़ी खबरें खूब होती हैं शेयर

बीबीसी ने पाया कि "भारत में फेक न्‍यूज़ के वामपंथी स्‍त्रोत बमुश्किल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसके उलट फेक न्‍यूज़ के दक्षिणपंथी स्‍त्रोतों का आपस में घनिष्‍ठ संबंध पाया गया। इससे दक्षिणपंथ के झुकाव वाली फेक न्‍यूज़ का प्रसार वामपंथ के मुकाबले तेजी से होता है।''

Author Updated: November 12, 2018 6:39 PM
चित्र का इस्‍तेमाल केवल प्रस्‍तुतिकरण के लिए किया गया है। (Express File Photo by Praveen Khanna)

भारत, केन्‍या और नाइजीरिया में फेक न्‍यूज के प्रसार को लेकर ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (BBC) ने एक शोध किया है। सोमवार को जारी हुए इस शोध में सामने आया कि लोग सोशल मीडिया प्‍लैटफॉर्म्‍स (व्‍हाट्सएप, फेसबुक तथा ट्विटर) की मदद से बिना खबर की सत्‍यता जाने बड़े पैमाने पर उसका प्रसार करते हैं। BBC का दावा है कि यूजर्स ने उसे “अपने फोन्‍स का अभूतपूर्व एक्‍सेस” दिया, जिससे यह शोध संभव हो सका। शोध में BBC ने कहा है कि “फेक न्‍यूज और प्रो-मोदी राजनैतिक गतिविधियों में परस्‍पर व्‍यापकता” देखने को मिली। इस शोध के अनुसार, “ट्विटर के अंदरूनी नेटवर्क्‍स के बड़े डेटा एनालिस‍िस” का उपयोग करते हुए, BBC ने पाया कि “भारत में फेक न्‍यूज़ के वामपंथी स्रोत बमुश्किल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसके उलट फेक न्‍यूज़ के दक्षिणपंथी स्रोतों का आपस में घनिष्‍ठ संबंध पाया गया। इससे दक्षिणपंथ के झुकाव वाली फेक न्‍यूज़ का प्रसार वामपंथ के मुकाबले तेजी से होता है।

शोध में यह भी सामने आया कि नाइजीरिया और केन्‍या में “फेसबुक यूजर्स फर्जी और असली समाचार स्रोतों में भेद नहीं करते और इस बारे में चिंतित भी नहीं हैं।” भारत में, “मामला अलग है, यहां फेसबुक पर लोगों के ध्रुवीकृत समूह या तो असली समाचार स्रोत शेयर करते हैं या फिर जाने-पहचाने फेक न्‍यूज वाले समाचार स्रोत। दोनों स्रोतों का इस्‍तेमाल दुर्लभ है।” शोध में यह भी कहा गया है कि “जो फेक न्‍यूज के स्‍त्रोतों में रुचि रखते हैं, वह राजनीति और राजनैतिक दलों में और ज्‍यादा रुचि लेते हैं।”

BBC के शोध के अनुसार, लोग बिना सोचे-समझे फर्जी खबरें साझा करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, “लोग इस उम्‍मीद में संदेश आगे बढ़ाते हैं कि कोई दूसरा उनके लिए खबर की सत्‍यता जांचेगा।” शोध में कहा गया है, “भारत के विकास, हिन्‍दू शक्ति और लुप्‍त हिन्‍दू गौरव से जुड़े फर्जी समाचारों की सच्‍चाई जाने बिना उन्‍हें बड़े पैमाने पर साझा किया जाता है। इस संदेशों को शेयर कर लोगों को लगता है कि वे राष्‍ट्र-निर्माण कर रहे हैं।

शोध में यह भी पाया गया कि फर्जी खबरें शेयर करने के मामले में केन्‍या और नाइजीरिया के युवा जनजातीय या धार्मिक आधार पर कम बंटे हुए हैं, जबकि भारत में इस आधार पर बंटवारे का अंतर बड़ा है। विजुअल मीडिया (तस्‍वीरें, वीडियो, मीम्‍स) को लेखों की तुलना में फेक न्‍यूज का बड़ा माध्‍यम पाया गया।

इस शोध को “भारत के 10 शहरों, 40 व्‍यक्तियों से 200 घंटों से ज्‍यादा के गहन साक्षात्‍कारों के आधार” पर तैयार किया गया है। इसके अलावा “भारत के 16,000 ट्विटर प्रोफाइल्‍स (3,70,999 संपर्क) और 3,200 फेसबुक पेजेज का भी एनालिसिस” किया गया। इस शोध के लिए ‘डार्क सोशल मीडिया’ का भी एनालिसिस किए जाने का दावा किया गया है जिसके लिए यूजर्स ने BBC को अपने फोन्‍स का पूरा एक्‍सेस दिया।

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