ताज़ा खबर
 

सत्ता समर: दो ध्रुवीय मुकाबले की ओर बढ़ा बिहार

नीतीश कुमार की 15 साल की सत्ता के खिलाफ स्वाभाविक प्रतिष्ठान विरोधी माहौल को ताकत देने की योजना पर राजद-वामपंथी दलों ने बखूबी काम किया है। रोजगार का मुद्दा इसमें उत्प्रेरक (कैटलिस्ट) बन पड़ा है।

Bihar Election, vidhan sabha chunaoबिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपने दलों का प्रचार करते जनता दल यू नेता और सीएम नीतीश कुमार तथा राजद अध्यक्ष तेजस्वी यादव।

बिहार विधानसभा के लिए पहले चरण के मतदान की पूर्व संध्या तक सियासी तसवीर लगभग स्पष्ट हो गई है। ऐसा पहली बार हुआ है कि जातीय प्राथमिकता वाली सियासत पर रोजगार और जन-सुविधाओं के बुनियादी सवाल हावी होते दिख रहे हैं। इसका सीधा असर मुकाबले के गणित पर पड़ा है। शुरू में मजबूत दिख रहा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (एकीकृत) का गठबंधन अब कड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और वामपंथी दलों (भाकपा, माकपा और भाकपा-माले) के महागठबंधन की चुनौती मजबूत मानी जाने लगी है। दो ध्रुवीय मुकाबले की इस स्थिति के लिए कई मुद्दे, दावे-प्रतिदावे, विवाद, अंतर्कलह और वादे वजह माने जा रहे हैं।

पहले चरण के मतदान से जो संकेत मिलेंगे, उससे बाकी दो चरणों में दोनों मुख्य प्रतिद्वंद्वी गठबंधनों की दशा-दिशा स्पष्ट होगी। पहले दौर का मतदान जिन विधानसभा क्षेत्रों में हो रहा है, वहां 2015 के विधानसभा चुनाव में जद (एकी)-राजद वाले तत्कालीन महागठबंधन को 48 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इनमें 25 पर राजद और 19 पर जद (एकी) के उम्मीदवार जीते थे।

इस बार जद (एकी) और राजद आमने-सामने हैं। उन सीटों पर मौजूदा महागठबंधन ने काफी उम्मीदें लगा रखी हैं। वजह, वामपंथी दलों का साथ आना है। भाकपा-माले की कई क्षेत्रों में मजबूत पकड़ है। कांग्रेस अंतर्कलह से जूझ रही है, लेकिन चुनाव में उसकी चर्चा कम है। कोरोना संक्रमण के दौर में लोगों के घर लौटने के दौरान मुसीबतें, रोजगार का संकट और अन्य परेशानियां सियासी वादों-प्रतिवादों पर हावी दिख रही हैं। ऐसे में विपक्षी महागठबंधन ने रोजगार को जो मुद्दा उछाला वह एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया। चुनाव का यह एक तरह से मुख्य एजंडा बन गया है।

राजद नेता तेजस्वी यादव ने घोषणा की है कि अगर उनकी सरकार बनी, तो पहली कैबिनेट बैठक में ही राज्य के दस लाख बेरोज़गारों को स्थायी सरकारी नौकरी दी जाएगी। विस्तार से बताया कि यह कैसे संभव है। सत्ताधारी गठबंधन ने इस वादे पर सवाल उठाए, लेकिन विपक्षी दलों की सभाओं में लोगों की भीड़ से चिंतित भाजपा को भी इस मुद्दे को अपने एजंडे में शामिल करना पड़ा। भाजपा ने 19 लाख लोगों को रोजगार का वादा किया, लेकिन रोजगार और सरकारी नौकरी से शब्दों का फर्क जनसभाओं में साफ दिखा है।

तेजस्वी यादव की जनसभाओं में मुस्लिम-यादव समीकरण से जुड़ी भीड़ के अलावा वे तमाम श्रमिक भी जुटे हैं, जो आरंभिक कोरोना पूर्णबंदी के दौर में भारी मुसीबतें उठा कर अन्य प्रदेशों से अपने घर लौटे और बेरोजगारी झेलने को मजबूर हैं। हालांकि, जानकारों की राय में सरकारी योजनाओं के जरिए नकदी और मुफ्त अनाज का लाभ उठाने वाले दलित-पिछड़ा समुदाय के एक हिस्से में जद (एकी)-भाजपा की ओर रुझान दिख रहा है। अति पिछड़ों और महादलित वर्ग से जुड़े मतदाताओं व महिलाओं में भी नीतीश का समर्थन दिख रहा है।

नीतीश कुमार की 15 साल की सत्ता के खिलाफ स्वाभाविक प्रतिष्ठान विरोधी माहौल को ताकत देने की योजना पर राजद-वामपंथी दलों ने बखूबी काम किया है। रोजगार का मुद्दा इसमें उत्प्रेरक (कैटलिस्ट) बन पड़ा है। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने नीतीश कुमार के खिलाफ जो तीखी मुहिम छेड़ी है, उसके बारे में माना जा रहा था कि यह भाजपा प्रेरित अंडरकरेंट राजनीति है। लेकिन जब धरातल पर भाजपा को नुकसान होने लगा तो पार्टी नेताओं को आगे आकर कहना पड़ा कि लोजपा अब बिहार में राजग का अंग नहीं। आपदा प्रबंधन की यह कवायद विपक्षी दलों में नहीं दिख रही, भले ही महागठबंधन में शामिल कांग्रेस में तमाम खामियां हैं।

चिराग पासवान का दांव ऐसा है कि न तो भाजपा को उगलते बन रहा है और न निगलते। चिराग ने प्रधानमंत्री के प्रति अपना अटूट समर्थन जताया है और नीतीश कुमार के खिलाफ अपनी जिद कायम रखी है। चिराग शुरू से कह रहे हैं कि अगर मुख्यमंत्री भाजपा का होगा तो चुनाव बाद लोजपा सहयोग करेगी। चिराग की कवायद में अहम तथ्य यह भी है कि वे विपक्षी महागठबंधन के खिलाफ कुछ नहीं बोल रहे हैं।

सत्ताधारी गठबंधन तेजस्वी के सियासी वार की काट में उनके पिता लालू यादव के 15 साल के शासन की बात उठाते हुए नीतीश के 15 साल से तुलना कर रहा है। भाजपा के नेता और नीतीश कुमार व उनकी पार्टी के नेता अपनी चुनावी सभाओं में लालू यादव के जंगल राज की अक्सर याद दिला रहे हैं। नीतीश कुमार कानून व्यवस्था, सामूहिक नसंहार, अपहरण के मुद्दे उठा रहे हैं।

अहम सवाल है कि 1990 से 2005 के उस दौर की चर्चा से नीतीश कुमार किन मतदाताओं को संबोधित कर रहे हैं। 18-35 आयु वर्ग वाले मतदाताओं की संख्या इस बार के चुनाव में लगभग 50 फीसद है, यानी लगभग आधे वोटर 36 साल से कम उम्र के हैं। इस आयुवर्ग के सामने नीतीश कुमार के मौजूदा दौर के सृजन घोटाला, टॉपर घोटाला, मुजफ्फर बालिका गृह कांड जैसे कांड हैं। सृजन घोटाले में पर्दाफाश हुआ कि कैसे सरकारी पैसे संस्था के खाते में जाते रह। मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में आरोपी मंजू वर्मा को जद (एकी) ने टिकट दे दिया है।

गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोजगारी के पैमाने पर 2005 और 2020 के बिहार में फर्क नहीं है। रोजगार को लेकर नीतीश कुमार के द्वारा चुनावी रैली में यह कहा जाना बूमरैंग कर गया कि समुद्र के किनारे न होने के कारण राज्य में बड़े उद्योग नहीं लगे। इस कारण स्थानीय स्तर पर नौकरियां नहीं दी जा सकीं। विपक्ष उनकी इसी बात को भुनाता दिख रहा है।

जनता दल (एकी)-राजग गठबंधन को 2010 में 39.1 फीसद वोट मिले थे। कइयों ने इस जीत को महिलाओं के बड़े पैमाने पर समर्थन से जोड़कर देखा था, लेकिन लोकनीति-सीएसडीसी के आंकड़ों के मुताबिक 2010 के चुनाव में राजग को 39 फीसद महिलाओं का वोट मिला था, जो उनके औसत वोट जितना ही था। 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने जब लालू प्रसाद यादव के राजद से हाथ मिलाया तब 41.8 फीसद मतों के साथ वे सत्ता में आए।

वार…
आठ-नौ बच्चे पैदा करने वाले बिहार का विकास करने चले हैं। बेटे की चाह में कई बेटियां हो गईं। मतलब बेटियों पर भरोसा ही नहीं है। इस तरह के लोग बिहार का क्या भला करेंगे। यदि यही लोगों के आदर्श हैं तो समझ लीजिए बिहार का क्या बुरा हाल होगा, कोई पूछने वाला नहीं रहेगा, सब बर्बाद हो जाएगा।
– नीतीश कुमार, चुनावी जनसभा में

पलटवार….
हमारे बहाने नीतीश जी प्रधानमंत्री जी को निशाना बना रहे हैं, प्रधानमंत्री जी छह-सात भाई-बहन हैं। हमने पहले भी कहा है कि नीतीश जी थक चुके हैं वो हमें कितना भी गाली दें लेकिन वो बेरोजगारी, गरीबी पर बात नहीं करना चाहते। अगर ऐसी बोली वे बोलते हैं तो वे महिलाओं की मर्यादा को ठेस पहुंचा रहें।
– तेजस्वी यादव, ट्विटर पर

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 भ्रष्टाचार का वंशवाद बड़ी चुनौती, कई राज्यों में राजनीतिक परंपरा का हिस्सा बना, बोले पीएम नरेंद्र मोदी
2 लव जिहाद स्वार्थी नेताओं की ईजाद- क़ादरी ने कहा तो एंकर बोलीं- पर यहां तो पीड़ित का परिवार बोल रहा है
3 कैसे दफ़्न हुई वीडी सावरकर को भारत रत्न देने की अटल बिहारी वाजपेयी की सिफ़ारिश, जानिए कहानी
यह पढ़ा क्या?
X