ताज़ा खबर
 

बरखा दत्त ने बताया कि वो मुसलमान होतीं तो आज कैसा महसूस करतीं

बरखा दत्ता ने पूछा है, "जुनैद की खून से लथपथ तस्वीर देखने के बाद क्या मैं ईद मना पाती?"
एनडटीवी की पूर्व पत्रकार टीवी पत्रकार बरखा दत्‍त। (फाइल फोटो)

पत्रकार बरखा दत्त ने अंग्रेजी पत्रिका द वीक में एक लेख लिखकर बताया है कि अगर वो मुसलमान होती तो कैसा महसूस करतीं? बरखा ने लेख की शुरुआत में ही स्पष्ट किया है कि वो अज्ञेयवादी हैं और पूरी तरह अधार्मिक हैं। बरखा ने लिखा है कि वो खुद को किसी भी धर्म से नहीं जोड़तीं और जहां भी धर्म के बारे में बताना होता है वो उसकी जगह खाली छोड़ देती हैं।  बरखा अगर मुसलमान होतीं तो उन्हें कैसा लगता ये बताने से पहले हम आपको बता दें कि अज्ञेयवादी उन्हें कहते हैं जो मानते हैं कि ईश्वर है या नहीं है, ये दोनों बातें जानना संभव नहीं है।

बरखा ने लिखा है कि अधार्मिक होने के नाते वो किसी भी धर्म के दृष्टिकोण से कुछ कहने के लिए खुद को बहुत सक्षम नहीं पातीं लेकिन पिछले हफ्ते उनसे पूछा गया था कि अगर वो मुस्लिम होती तो कैसा लगता? बरखा के अनुसार ये सवाल उनकी आत्मा को कुरेदता रहा और उन्हें बेचैन करता रहा। बरखा ने अपने लेख में “अगर मैं मुसलमान होती” सवाल का जवाब देने से पहले कई सवालों पूछे हैं। बरखा ने पूछा है, “अगर देश के मौजूदा राजनीतिक विमर्श में मेरी आवाज नहीं सुनी जाती तो मुझे कैसा लगता क्योंकि अब मेरे बिना चुनाव जीतना संभव हो गया है?”  या “जिस प्रदेश में मुसलमानों की भारी तादाद है वहां सत्ताधारी पार्टी के एक भी विधायक उम्मीदवार मुस्लिम नहीं था?”

barkha dutt tweet बरखा दत्त ने अपने लेख को ट्वीट किया है।

बरखा ने लिखा है, “जुनैद की खून से लथपथ तस्वीर देखने के बाद क्या मैं ईद मना पाती?” ” पशु व्यापारी पहलू खान को भीड़ ने जिस तरह फुटपाथ के किनारे मार डाला उसे देखकर मैं खुद से क्या कहती?” “क्या मैं वायुसेना के जवाब मोहम्मद सरताज के उस उत्साह को साझा कर पाती जब उन्होंने कहा था कि सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा?” सरताज का भारतीय न्यायव्यवस्था पर यकीन तब भी बना रहा जब उनके पिता अखलाक अहमद की भीड़ ने बीफ की अफवाह पर हत्या कर दी।

बरखा ने अपने लेख में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कट्टरपंथी मुसलमानों और आतंकवादी संगठनों के बारे में सवाल पूछा है। बरखा ने लिखा है, “अगर मैं मुस्लिम होती तो मैं खुद को कितना असहाय महसूस करती जब कट्टरपंथी इस्लामिक और आतंकवादी मेरे मजहब का नाम खराब करते और मुझे उनके कृत्यों की निंदा करने को मजबूर होना पड़ता जैसे उनके जघन्य कृत्यों के लिए मैं ही जिम्मेदार हूं?” बरखा ने हाल ही में कश्मीर में भीड़ द्वारा मस्जिद में पीट-पीट कर मार दिए पुलिस डीएसपी अयूब पंडित का मुद्दा भी उठाया है। बरखा ने लिखा है, “मैं बहादुर पुलिस अफसर अयूब पंडित के परिवार से क्या कहती जिन्हें शब-ए-क़द्र की पाक रात को एक मस्जिद के बाहर पीटकर मार डाला गया है। या मैं खूबसूरत नौजवान उमर फयाज की हत्या पर उनके परिवार से क्या कहती?” बरखा ने तीन तलाक को पुरातनपंथी और दकियानूसी बताया है। बरका ने पूछा है,  “…मैं अपने धर्म के स्वयंभू ठेकेदारों से कैसे निपटती?”

बरखा ने तमाम सवालों के बाद बताया है कि वो मुसलमान होने पर कैसा महसूस करतीं। बरखा ने लिखा है कि अगर वो मुसलमान होतीं तो उन सभी राजनीतिक दलों को देखकर हैरान होतीं जो उनका रहुनमा होने का दावा करत रहे हैं लेकिन उनका इस्तेमाल करके उन्हें अलग-थलग छोड़ दिया है। बरखा ने लिखा है कि अगर वो मुसलमान होतीं तो वो शाह बानो के बारे में सोचती जो अपने शौहर से गुजाराभत्ता पाने के लिए अदालत गईं लेकिन राजीव गांधी सरकार ने अदालत के फैसले को पलट दिया।

बरखा ने लिखा है कि अगर वो मुसलमान होतीं तो खुद को अपने देश से प्यार करने के लाखों कारण याद दिलातीं। बरखा ने लेख के अंत में लिखा है, “लेकिन जैसे मुझे हर बार याद दिलाया जाता कि मॉडरेट होने के कारण मुझे बोलना चाहिए, मैं पूछती कि क्या भारत की बहुत बड़ी मॉडरेट हिंदू आबादी मेरे लिए बोलेगी?”

वीडियो- हिंसाग्रस्त कश्मीर में आपसी भाईचारे की मिसाल

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. Arun Kottur
    Jul 3, 2017 at 10:14 am
    बरखा बहार आई.
    (0)(0)
    Reply
    1. O
      O.P.Agarwal
      Jul 3, 2017 at 10:03 am
      बरखा दत्त को यो सोचने के लिए मेहनत करने की ज़रुरत नहीं है कि अगर में मुस्लमान होती तो क्या सोचती | सारा हिंदुस्तान उनकी सोच आधारित पत्रकारिता और मुखर विश्लेषण से परिचित है | वे छम्वादी धर्मनिरपेक्ष लेफ्ट लिबरल और हिन्दू संस्कृति एवं भजपा की घोर विरोधी विचारधारा की प्रतिनिधि हैं और राजनितिक औद्योगिक पत्रकारिता जुगलबंदी का अविस्मरणीय प्रतीक रहीं है |
      (0)(0)
      Reply
      1. K
        kishore
        Jul 3, 2017 at 9:38 am
        भाई लोगो,ये महोदया सिर्फ और सिर्फ चीप पब्लिसिटी चाहती हैं इनके भीतर छिपे शैतान को पहचान लो एक मुस्लमान की मृत्यु पर इनके भीतर का घड़ियाल आंसू बहा रहा है...जबकि देश में हज़ारो दलित मारे जाते हैं तो इनके अंदर का जौर्नालिस्ट कभी नहीं बोलता क्यों बरखा महोदय,मई सच बोल रहा हूँ न? आर एस एस जरा ध्यान दे इस नौटंकी पर
        (0)(0)
        Reply
        1. S
          suresh k
          Jul 3, 2017 at 9:07 am
          बड़ी ग़लतफ़हमी है कि आप मुस्लिम नहीं है .
          (0)(0)
          Reply