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ट्रॉल के खिलाफ बरखा दत्त का सख्त रुख, बोलीं- मेरे शादी, तलाक, चरित्र की बात करने वालों केवल औरतों को ही क्यों बनाते हो निशाना

बरखा ने लिखा है कि सोशल मीडिया पर उनकी शादी अक्सर ऐसे लोगो से करा दी जाती है जो या तो होते ही नहीं या फिर जिनसे मेरा कोई भी रूमानी संबंध नहीं होता।

Barkha Dutt, Journalist Barkha Duttवरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त इंटरनेट पर कई बार ट्रॉल का शिकार बन चुकी हैं। (फाइल फोटो)

ऑनलाइन ट्रॉल के खिलाफ कैंपेन की शुरुआत करते हुए पत्रकार बरखा दत्त ने कहा है कि वो उनकी वजह से कभी सोशल मीडिया नहीं छोड़ेंगी और उन्हें औरत होने की वजह से ही इंटरनेट पर निशाना बनाया जाता है। ये कैंपेन हिंदुस्तान टाइम्स अखबार के साथ मिलकर पत्रकार बरखा दत्त, पत्रकार राणा अय्यूब और दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा गुरमेहर कौर ने शुरू किया है। बरखा ने एक लेख के अलावा एक प्रमोशनल वीडियो भी बनाया है। बरखा ने लिखा है, “मुझे ट्विटर और दूसरे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर इतनी बार होर, रंडी, बिच, प्रेस्टिट्यूट लिखा गया कि मैं इस पर ध्यान ही नहीं देती।” बरखा ने लिखा है कि सोशल मीडिया पर उन पर अश्लील टिप्पणियां अक्सर की जाती हैं।

बरखा ने लिखा है कि सोशल मीडिया पर उनकी शादी अक्सर ऐसे लोगो से करा दी जाती है जो या तो होते ही नहीं या फिर जिनसे मेरा कोई भी रूमानी संबंध नहीं होता। बरखा ने लिखा है, “आधिकारिक शिकायत करने के बावजूद मेरी विकीपीडिया प्रोफाइल भी अक्सर बदल दी जाती है और मुझे इन पुरुषों की पत्नी बता दिया जाता है।” बरखा के अनुसार जब उन्होंने उनके खिलाफ दुष्प्रचार करने वालों का कभी गुस्से और कभी व्यंग्य से जवाब दिया तो इंटरनेट पर उन्हें “दो बार तलाकशुदा” बताया जाने लगा।

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बरखा ने इंटरनेट पर उनके खिलाफ फैलाए जाने वाले झूठ के अलावा इस बात पर भी सवाल उठाया है कि उनके पुरुष साथियों की शादी, तलाक या प्रेमसंबंधों को मुद्दा क्यों नहीं बनाया जाता? बरका ने सवाल पछा है, “मेरी निजी जिंदगी से ऐसी लगाव क्यों?” बरखा ने बताया है कि व्हाट्सऐप और प्राक्सी सर्वर से फोन करके दी जाने वाली रेप की धमकियां और गालीगलौज के खिलाफ उन्होंने एफआईआर दर्ज करायी और मजिस्ट्रेट के सामने जाकर बयान भी दिया लेकिन आज तक ये केस हल नहीं हो सका है। बरखा के अनुसार इंटरनेट पर मिलने वाली रेप की धमकियां और ट्रालिंग पितृसत्ता का आधुनिक हथियार है जिसका मकसद आजाद ख्याल आधुनिक महिलाओं को डराना, धमकाना और चुप कराना है।

बरखा दत्त के अलावा पत्रकार राणा अय्यूब और डीयू की छात्रा गुरमेहर कौर ने इस कैंपेन का हिस्सा हैं- 

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