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कोरोना की वजह से आर्थिक संकट से जूझ रहा देश, 9 महीने में बैंकों ने राइट ऑफ किए 1.15 लाख करोड़ के बैड लोन

आरबीआई के डेटा के मुताबिक शेड्यूल्ड कमर्शल बैंक्स ने 2,36,265 करोड़, 2,34,170 करोड़ और 1,15,038 करोड़ रुपये पिछली तीन तिमाहियों में राइटऑफ किए।

Economyसांकेतिक फोटो।

दूसरी तरफ पिछले 9 महीने में बैंकों ने 1.15 लाख करोड़ के बैड लोन को राइट ऑफ कर दिया। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने सोमवार को लोकसभा में यह जानकारी दी। लिखित जवाब में उन्होंने कहा कि आरबीआई की गाइडलाइन के मुताबिक ऐसे एनपीए जिनकी प्रोविजनिंग को चार साल हो गए हैं, उन्हें बैलंस शीट से हटा दिया गया है।

बता दें कि बैंक राइट ऑफ को अपनी नियमित एक्सरसाइज समझते हैं जो कि उनकी बैलंस शीट को साफ रखने के लिए ज़रूरी है। आरबीआई की गाइडलाइन के मुताबिक इससे टैक्स का लाभ मिलता है और कैपिटल हासिल करने में मददगार होता है। अनुराग ठाकुर ने यह भी कहा कि राइट ऑफ करने का मतलब यह नहीं है कि कर्ज माफ कर दिया गया है। कर्ज लेने वालों को इसे अदा करना होगा। उन्हें किसी तरह का फायदा नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘आरबीआई के डेटा के मुताबिक शेड्यूल्ड कमर्शल बैंक्स ने 2,36,265 करोड़, 2,34,170 करोड़ और 1,15,038 करोड़ रुपये पिछली तीन तिमाहियों में राइटऑफ किए। इस कर्ज की वापसी के बारे में उन्होंने कहा बैंकों की रिकवरी पॉलिसी के मुताबिक यह काम किया जाएगा।’

वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी ने जानकारी दी है कि गलत गतिविधियों पर विराम लगाने के लिए 27 लोन लेंडिंग ऐप को बंद कर दिया गया है। इनपर कार्रवाई आईटी ऐक्ट 69ए के तहत की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग ऑपरेशन को पांच दिन करने पर कोई चर्चा नहीं की गई है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने दी नसीहत

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के वी सुब्रमण्यन ने मंगलवार को वित्तीय संस्थानों को नसीहत देते हुये कहा कि वह यारी- दोस्ती में कर्ज बांटने से बचें और कर्ज देते हुये उच्च गुणवत्ता मानकों पर ध्यान दें ताकि देश को 5,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिल सके।

उन्होंने माना कि 1990 के शुरुआती वर्षों में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को कमजोर गुणवत्ता के कर्ज देने की समस्या से जूझना पड़ा। खासतौर से बड़ी राशि के कर्ज उच्च गुणवत्ता मानकों का पालन किये बिना दिये गये। ये कर्ज पूंजीवादी मित्रों को दिये गये जिससे कि बैंकिंग क्षेत्र में समस्या बढ़ गई।

वाणिज्य एवं उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘जब कभी वित्तीय क्षेत्र ऐसे किसी खास व्यक्ति को कर्ज देने का फैसला करता है जो कि कर्ज देने योग्य नहीं है लेकिन आपसे अधिक जुड़ा हुआ है, तो इसका सीधा सा मतलब है कि पूंजी उपलब्ध नहीं कराई जा रही। जब पूंजी अधिक पात्र कर्जदार को नहीं जाती है तो उस अवसर की एक लागत वहन करनी पड़ती है।’’

(भाषा से इनपुट्स के साथ)

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