कैश क्रंच: बैंक यूनियन की धमकी- बिना गलती सुननी पड़ रहीं गालियां, करेंगे आंदोलन

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव सीएच. वेंकटाचलम ने चेतावनी देते हुए कहा कि समस्या के निदान के लिए तत्काल कदम नहीं उठाने पर बैंककर्मी आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने इस समस्या के लिए आरबीआई और सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

देश के कई राज्यों में ATM खाली पड़े हैं। 'कैश क्रंच' से जनता परेशान है।

नकदी संकट को लेकर अब बैंक यूनियन ने आंदोलन की धमकी दी है। यूनियन का कहना है कि गलती आरबीआई और सरकार की है, लेकिन कस्टमर की गालियां बैंक कर्मचारियों को सुननी पड़ रही हैं। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव सीएच. वेंकटाचलम ने गुरुवार (19 अप्रैल) को चेतावनी देते हुए कहा कि समस्या के निदान के लिए तत्काल कदम नहीं उठाने पर बैंककर्मी आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा, ‘सिर्फ बयान देने से कुछ नहीं होगा। नोटों की आपूर्ति के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे।’ पिछले कुछ सप्ताहों में खासकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में नकदी की भारी किल्लत हो गई है। इसके कारण एटीएम से भी पैसे नहीं निकल रहे हैं, लिहाजा लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वेंकटाचलम ने बताया कि नकदी की भारी कमी के कारण आमलोगों का गुस्सा बैंक कर्मचारियों को झेलना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कस्टमर बैंककर्मियों पर चिल्ला रहे हैं और उनके साथ गाली-गलौच कर रहे हैं।

‘दो हजार के नोट छापने से शुरू हुई दिक्कत’: देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को नकदी की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है, लेकिन आरबीआई ने पर्याप्त मात्रा में नकदी होने का दावा किया है। वहीं, सरकार ने निकासी में अप्रत्याशित वृद्धि को नकदी संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया है। वेंकटाचलम ने करेंसी की कमी के लिए केंद्र और आरबीआई दोनों को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में नोटबंदी की घोषणा के बाद 2000 रुपये के नोट छापने के फैसले के बाद से ही यह समस्या शुरू हो गई थी। वेंकटाचलम ने कहा, ‘काला धन और नकदी की जमाखोरी रोकने के लिए 1000 के नोट वापस लिए गए थे। ऐसे में 2000 नोट के अमल में आने से स्वाभाविक तौर पर दोनों काम आसान हो गए हैं।’ उन्होंने आरबीआई को कमजोर नकदी प्रबंधन के लिए भी जिम्मेदार ठहराया है। बैंक यूनियन के महासचिव ने कहा, ‘आरबीआई गवर्नर ने कहा था कि पर्याप्त मात्रा में नोट छापे गए हैं, लेकिन वे गए कहां। क्या इनकी जांच नहीं होनी चाहिए? क्या यह सुनिश्चित करने की जरूरत नहीं है कि है कि बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में कैश हो जिससे ग्राहकों की मांग को पूरा किया जा सके?’ उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी के 16 महीने बाद भी कई एटीएम को अब तक नए नोटों के अनुकूल नहीं बनाया जा सका है।

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