किसानों के भारत बंद को बैंक कर्मचारियों का भी समर्थन, इस दिन रहेंगी कई सेवाएं बाधित!

केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के विरोध में पिछले साल नवंबर से ही कई किसान संगठन दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि केंद्र सरकार इन तीनों कानूनों को वापस ले।

Rakesh Tikait, Farmers Protest
तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर आंदोलन करते किसान(फोटो सोर्स: PTI)

केंद्र सरकार द्वारा पारित तीन नए कृषि कानूनों को लेकर पिछले 9 महीनों से दिल्ली की सीमा पर किसान संगठनों का आंदोलन चल रहा है। ऐसे में 27 सितंबर को किसान संगठनों के मोर्चे ने ‘भारत बंद’ का ऐलान किया है। वहीं अब इस बंद को बैंक यूनियन का भी समर्थन मिला है। अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (एआईबीओसी) ने किसान आंदोलन को लेकर केंद्र से अनुरोध किया है कि सरकार संयुक्त किसान मोर्चा की मांगों पर फिर से बातचीत का सिलसिला शुरू करे।

एआईबीओसी ने कहा है कि सरकार तीनों विवादित कृषि कानूनों को रद्द करे, और किसानों संगठनों से बातचीत जारी करे। वहीं दूसरी तरफ किसान संगठनों ने भारत बंद के ऐलान से पीछे हटने से मना कर दिया है। भारत बंद को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि “बंद” की योजना में श्रमिक संघों, ट्रेड यूनियनों, कर्मचारियों और छात्र संघों, महिला संगठनों और ट्रांसपोर्टरों के संघों को इसमें शामिल किया जा रहा है।

वहीं “भारत बंद” को लेकर किसान महापंचायतों का भी आयोजन किया जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि इस मौके पर साइकिल और मोटरसाइकिल रैलियों का भी आयोजन होगा। इस बंद के दौरान देश में कई सेवाओं के बाधित रहने की संभावनाएं हैं। जिसमें यातायात भी प्रभावित हो सकता है।

गौरतलब है कि किसान संगठन भारत बंद के जरिए केंद्र सरकार पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाना चाहते हैं। वहीं पिछले हफ्ते भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा था कि जब तक सरकार तीन कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती है, तबतक उनका आंदोलन चलता रहेगा।

इसके अलावा हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के गुरनाम सिंह चंढ़ूनी ने भी इसी बात पर जोर देते हुए कहा है कि दिल्ली की सीमा पर बैठे किसान तबतक वहां से नहीं जाएंगे, जबतक केंद्र के तीनों विवादित कृषि कानून रद्द नहीं होते।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल सितंबर में संसद द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के चलते कई किसान संगठन पिछले साल नवंबर से ही दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे हैं। उनका दावा है कि ये कानून कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में हैं।

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