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निजीकरण पर RS में गूंजा बैंक हड़ताल का मुद्दाः बोले राहुल- PSU बैंकों को बेचना वित्तीय सुरक्षा संग समझौता; जावड़ेकर ने कहा- अफवाहों पर न करें यकीन

वरिष्ठ कांग्रेस नेता खड़गे ने कहा, ‘‘आज बैक कर्मचारी रास्तों पर बैठे हैं। हड़ताल कर रहे हैं। उनकी समस्या को सुलझाने के लिए वित्त मंत्री को यहां बयान देना चाहिए।’’

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: March 16, 2021 1:01 PM
Privatisation of Banks, INC, BJPउच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए खड़गे ने कहा कि कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से बैंकों का कामकाज ठप्प पड़ गया है और आम जनता से लेकर कोराबारी तक इससे परेशान हैं। (फाइल फोटोः एक्सप्रेस/पीटीआई)

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के खिलाफ दो दिवसीय हड़ताल का मुद्दा मंगलवार को संसद में गूंजा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को उठाते हुए समस्या के समाधान के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बयान देने की मांग की।

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए खड़गे ने कहा कि कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से बैंकों का कामकाज ठप्प पड़ गया है और आम जनता से लेकर कोराबारी तक इससे परेशान हैं। उन्होंने कहा, ‘‘देश भर में लगभग 12 राष्ट्रीयकृत बैंक हैं और इनकी एक लाख शाखाएं हैं। इनमें करीब 13 लाख लोग काम करते हैं और 75 करोड़ से ज्यादा खातेदार हैं। ये खातेदार भी बैंक के हितधारक हैं और उनके पूछे बगैर सरकार ने निजीकरण का फैसला कर लिया।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ‘‘गलत नीतियों और अंधाधुंध निजीकरण’’ के चलते आज यह स्थिति पैदा हुई है और उनक रोजी-रोटी पर भी संकट उत्पन्न हो गया है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता खड़गे ने कहा कि वर्ष 2008 में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट आया था तब राष्ट्रीयकृत बैंकों के कारण ही भारत की अर्थव्यवस्था संभली थी। उन्होंने कहा, ‘‘आज बैक कर्मचारी रास्तों पर बैठे हैं। हड़ताल कर रहे हैं। उनकी समस्या को सुलझाने के लिए वित्त मंत्री को यहां बयान देना चाहिए।’’

क्या बोले पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष?: इसी बीच, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कई सरकारी बैंकों के कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर मंगलवार को सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को ‘सांठगांठ वाले पूंजीपतियों’ (क्रोनी) के हाथों में बेचना देश की वित्तीय सुरक्षा के साथ समझौता होगा। उन्होंने हड़ताल करने वाले बैंक कर्मचारियों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए यह दावा भी किया कि सरकार ‘लाभ का निजीकरण’ और ‘नुकसान का राष्ट्रीयकरण’ कर रही है।

कांग्रेस नेता ने ट्वीट किया, ‘‘केंद्र सरकार लाभ का निजीकरण और नुकसान का राष्ट्रीयकरण कर रही है। सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों को क्रोनी के हाथों में बेचना भारत की वित्तीय सुरक्षा के साथ समझौता होगा।’’ दरअसल, सार्वजनिक क्षेत्र के दो और बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में सरकारी बैंकों की हड़ताल के पहले दिन बैंकिंग कामकाज प्रभावित हुआ। हड़ताल के चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नकदी निकासी, जमा, चेक समाशोधन और कारोबारी लेनदेन प्रभावित हुआ।

‘LIC का निजीकरण नहीं हो रहा’: उधर, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का निजीकरण नहीं किया जा रहा है व बैंकों के संदर्भ में अफवाहों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। जावड़ेकर ने शिवसेना सांसद अरविंद सावंत के प्रश्न के उत्तर में यह बात कही। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का हमेशा यह प्रयास होता है कि जिन सार्वजनिक उपक्रमों को फिर से खड़ा किया जा सकता है, उसे किया जाए।

सावंत के एक पूरक प्रश्न के उत्तर में सूचना एवं प्रसारण तथा भारी उद्योग मंत्री जावड़ेकर ने कहा, ‘‘एलआईसी का निजीकरण नहीं हो रहा है। यह गलतफहमी है। जहां तक बैंकों का सवाल है जो उस बारे में अफवाहों पर विश्वास नहीं करें।’’ इससे पहले, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने सोमवार को लोकसभा में कहा था कि एलआईसी का आईपीओ लाने का प्रस्ताव है तथा इस कदम से किसी भी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी तथा एलआईसी एवं निवेशकों दोनों को फायदा होगा।

बता दें कि नौ यूनियनों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने 15 और 16 मार्च को हड़ताल का आह्वान किया है। ये नौ बैंक यूनियनें हैं…एआईबीईए, एआईबीओसी, एनसीबीई, एआईबीओए, बीईएफआई, आईएनबीओसी, एनओबीडब्ल्यू और एनओबीओ। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने पेश आम बजट में सरकार की विनिवेश योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण की घोषणा की थी।

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