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बांग्लादेश से आई नरेंद्र मोदी को चिट्ठी- लोगों को बांटिए मत, भारत की धर्मनिरपेक्ष परंपरा याद रखिए

मोमताज ने लिखा है कि हम हमेशा से भारत को एक लोकतांत्रिक देश और जीवंत लोकतंत्र के रूप में देखते रहे हैं... संशोधित नागरिकता कानून के लागू किए जाने और नागरिकता पंजी की संभावना से हम भारत को नहीं समझ पा रहे हैं।

पीएम को लिखे पत्र में 1947 के बंटवारे के दौरान खून खराबे का भी जिक्र किया गया है। (फोटोः पीटीआई)

भारत में नागरिकता संशोधन कानून (CAA), एनआरसी और एनपीआर के विरोध में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए पड़ोसी देश बांग्लादेश से पत्र आया है। पत्र में बांग्लादेशी शिक्षाविद् मोमताज जहां ने पीएम मोदी को पत्र में भारत की धर्मनिरपेक्ष परंपरा की याद दिलाई है।

पत्र में भारत में लोगों को बांटने के लिए कृत्रिम नियम या कटीली तार या दीवार नहीं बनाने का आग्रह किया गया है। मोमताज जहां बांग्लादेश फोरम फॉर एजुकेशन डेवलपमेंट के संस्थापक सदस्य हैं। इसके साथ ही वे समाजशास्त्र के प्रोफेसर भी रह चुके हैं। मोमताज ने लिखा है कि हम हमेशा से भारत को एक लोकतांत्रिक देश और जीवंत लोकतंत्र के रूप में देखते रहे हैं।

उन्होंने आगे लिखा कि हम संशोधित नागरिकता कानून के लागू किए जाने और नागरिकता पंजी की संभावना से हम भारत को नहीं समझ पा रहे हैं। मैं अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए आपसे आग्रह कर रहा हूं और इसलिए आपको यह पत्र लिख रहा हूं। मालूम हो कि मोमताज जहां एक सेक्यूलर बांग्लादेश फोरम एकात्तोरेर घटक दलाल निर्मूल कमिटी के सक्रिय सदस्य भी हैं।

मोमताज ने पत्र में लिखा है कि बांग्लादेश भारत की तत्कालीन सरकार, सेना और लोगों का मेरे देश के जन्म के लिए ऋणी है। उन्होंने लिखा है कि हमारा कभी न टूटने वाला बंधन भारतीय सेना के जवानों और बंगाली स्वतंत्रता सेनानियों दोनों के बलिदान से पैदा हुआ है।

उन्होंने लिखा, ‘मुझे आश्चर्य है कि आपने एक असामान्य रूप से घृणित विभाजनकारी नागरिकता संशोधन कानून बनाया गया है, जो अनिवार्य रूप से भारत में और बांग्लादेश में लंबे समय तक पोषित धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के भारतीयों की गौरवशाली विरासत को प्रभावित करेगा।

हम इन उपायों के परिणाम और प्रभाव के बारे में बहुत चिंतित हैं जो न केवल भारत में बल्कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी पहले से ही कट्टरपंथी आतंकवादी और सांप्रदायिक समूहों द्वारा हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं।

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