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Salman Rushdie: शाह बानो और सैटेनिक वर्सेज पर बैन…वोटबैंक के लिए किए गए फैसले- बोले आरिफ मोहम्मद खान

भारत में, प्रकाशन के नौ दिन बाद राजीव गांधी सरकार ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए द सैटेनिक वर्सेज पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। किताब को बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका, सूडान, ईरान, केन्या सहित कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया था।

Salman Rushdie: शाह बानो और सैटेनिक वर्सेज पर बैन…वोटबैंक के लिए किए गए फैसले- बोले आरिफ मोहम्मद खान
केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान। (इंडियन एक्सप्रेस फाइल फोटो)

लेखक सलमान रुश्दी पर 12 अगस्त 2022 पर न्यूयॉर्क पर हुए हमले के बाद उनकी विवादित किताब ‘द सैटेनिक वर्सेज’ एक बार फिर चर्चा में आ गयी है। 1988 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने भारत में इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह वही सरकार थी जिसने शाह बानो के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदल दिया था। जिसकेविरोध में केरल के वर्तमान गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान ने इस्तीफा दे दिया था। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए उन्होंने इन्हें वोटबैंक के लिए किया गया फैसला करार दिया।

1980 के दशक में घटी ये घटनाएं आपस में जुड़ी हुई बताई जा रही है- राजीव गांधी सरकार का शाह बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद में कानून लाकर पलटने का फैसला और रुश्दी की किताब ‘द सैटेनिक वर्सेज’ पर बैन। इस सवाल पर अपना नजरिया बताते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भारत दुनिया का पहला देश था जिसने इस किताब पर बैन लगाया था।

भारत बैन लगाने वाला पहला देश था: उन्होंने कहा कि जिसके बाद अगले दिन पाकिस्तान में मार्च निकाला गया और इस आधार पर विरोध किया गया कि भारत ने कार्रवाई की, लेकिन पाकिस्तान की मुस्लिम सरकार ने इस किताब पर प्रतिबंध नहीं लगाया था। बाद में कई देशों ने इस पर कार्यवाई की और ईरान का फतवा आ गया।

केरल के गवर्नर ने उस समय के घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा, “करीब तीन महीने बाद संसद में मेरे सवाल के जवाब में सरकार ने जवाब दिया कि बैन के बाद किताब की एक भी कॉपी जब्त नहीं हुई। दरअसल, बैन के बाद किताब की रिकॉर्ड बिक्री हुई थी।” उन्होंने बताया कि सैयद शहाबुद्दीन जिन्होंने शाह बानो के फैसले को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, वही व्यक्ति थे जिन्होंने बैन की मांग करते हुए राजीव गांधी को पत्र लिखा था और उन्होंने माना भी।

शहाबुद्दीन ने खुद खिताब नहीं पढ़ी थी: आरिफ मोहम्मद ने बताया कि बाद में शहाबुद्दीन ने खुद स्वीकार किया कि उन्होंने खुद खिताब नहीं पढ़ी थी और कुछ समाचार रिपोर्टों के आधार पर बैन की मांग की गई थी। 2015 में, वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम जो सैटेनिक वर्सेज पर प्रतिबंध के समय गृह राज्य मंत्री थे ने कहा था कि बैन का फैसला गलत था। ऐसे में राजीव गांधी को यह निर्णय लेने के लिए किस बात ने प्रेरित किया?

वोट बैंक के लिए किए गए फैसले: इस सवाल के जवाब में आरिफ मोहम्मद ने कहा, “2015 के आसपास, कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने शाह बानो पर फैसले को भी गलत पाया था। लेकिन 2017 में यह कांग्रेस के नेता थे जो फिर से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का समर्थन कर रहे थे और राज्यसभा में ट्रिपल तलाक पर बैन लगाने वाले कानून को पास नहीं होने दिया।” उन्होंने कहा कि ये सभी फैसले पूरी तरह से वोट बैंक के लिए किए गए थे और इसके परिणाम देश के लिए घातक साबित हुए।

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